आर्मी में बिना परीक्षा कैसे बन सकते हैं लेफ्टिनेंट? क्या है इसका प्रोसेस

भारत में ज्यादातर युवाओं का सपना होता है कि वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनें. ऐसे में चहिए जान लेते हैं कि बिना परीक्षा दिए आप कैसे बन सकते हैं?

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भारत में ज्यादातर युवाओं का सपना होता है कि वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनें. (Photo: Pexels) भारत में ज्यादातर युवाओं का सपना होता है कि वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनें. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनना कई युवाओं का सपना होता है. आमतौर पर इसके लिए एनडीए, CDS या अन्य प्रवेश परीक्षाओं को पास करना जरूरी होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खास रास्तों से बिना लिखित परीक्षा दिए भी लेफ्टिनेंट बनना संभव है? फिर चाहे आप NCC कैडेट हों, किसी प्रोफेशनल फील्ड से हों या डायरेक्ट कमीशन के पात्र हों. सही रास्ता का चुनाव कर आप सीधे इंटरव्यू और फिटनेस टेस्ट के आधार पर सेना में अधिकारी बन अपना सपना पूरा कर सकते हैं. 

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भारतीय सेना ने अपने 24वें एनसीसी स्पेशल कोर्स के लिए आवेदन मांगे हैं. इसके तहत अविवाहित ग्रेजुएट युवक और महिलाएं आवेदन कर सकती हैं. उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं. आवेदन की आखिरी डेट 16 मार्च 2026 है. उम्मीदवार को किसी भी तरह की परीक्षा देने की जरूरत नहीं है. 

होती है ये योग्यता

सेना की एसएससी स्पेशल एंट्री स्कीम के जरिए उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. उन्हें किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 50 फीसदी अंक से ग्रेजुएशन पास होना अनिवार्य है. इसके साथ ही एनसीसी सी सर्टिफिकेट में कम से कम बी ग्रेड होना चाहिए. उम्मीदवारों को एज पर भी ध्यान देना होगा. 1 जुलाई 2026 को वह 19 से 25 साल के बीच होनी चाहिए. पद पर आवेदन के लिए उन्हें भारत का नागरिक होना अनिवार्य है. 

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क्या है इसके लिए सिलेक्शन प्रोसेस?

भारतीय सेना में बिना परीक्षा दिए लेफ्टिनेंट बनने के लिए उम्मीदवारों को पहले आवेदन करना होगा. इसके बाद से एसएसबी यानी सर्विस सेलेक्शन बोर्ड इंटरव्यू के तहत उम्मीदवारों का चयन किया जाता है. इसके बाद मेडिकल टेस्ट होता है और लास्ट में मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है. इस स्कीम के तहत चयनित उम्मीदवारों को ट्रेंनिंग के लिए ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई भेजा जाता है, जहां 49 हफ्तों की ट्रेनिंग होती है और फिर उम्मीदवारों को लेफ्टिनेंट रैंक का काम दिया जाता है. 

होती है अच्छी सैलरी

ट्रेनिंग के बाद से उम्मीदवारों को सैलरी मिलती है. ट्रेनिंग के दौरान हर महीने 56,100 रुपये स्टाइपेंड मिलता है. वहीं, ट्रेनिंग के बाद यह करीब 56 से लेकर 1,77,500 रुपये तक हो जाती है. इसके अलावा उन्हें सरकार की ओर से कई भत्तों की सुविधा भी मिलती है.    

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