टेक जगत में इस समय दो ही शब्द गूंज रहे हैं, AI और छंटनी यानी ले-ऑफ. जहां गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियां एआई में निवेश बढ़ाने के लिए हजारों पुराने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं, वहीं क्लाउड सॉफ्टवेयर दिग्गज सेल्सफोर्स ने एक ऐसी 'लकीर' खींची है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
1000 नई नौकरियां: एआई के लिए 'युवा जोश' पर दांव
सेल्सफोर्स के CEO मार्क बेनियॉफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एलान किया है कि कंपनी 1,000 नए ग्रेजुएट्स और इंटर्न की हायरिंग करने जा रही है. मार्क का यह एलान उन डरावनी भविष्यवाणियों को चुनौती देता है जिनमें कहा गया था कि एआई आने के बाद 'एंट्री लेवल' (शुरुआती स्तर) की 50% नौकरियां खत्म हो जाएंगी.
मार्क बेनियॉफ के मुताबिक, एआई टूल्स को केवल चलाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बनाने और बेहतर करने के लिए नई पीढ़ी के दिमाग की जरूरत है. ये नए कर्मचारी कंपनी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स जैसे 'एजेंट फोर्स' और 'हेडलेस 360' पर काम करेंगे.
सीनियर आउट, जूनियर इन? बदल रहा है कॉर्पोरेट कल्चर
दिलचस्प बात यह है कि जहां माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गज अपने 'सीनियर' कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने (VRS) का ऑफर दे रहे हैं, वहीं सेल्सफोर्स युवाओं को मौका दे रही है. इसके पीछे कंपनी का मानना है कि:
लर्निंग स्पीड: युवा लोग नई तकनीक (AI) को वरिष्ठों की तुलना में जल्दी सीख और अपना लेते हैं.
फ्यूचर फोर्स: एआई के इस दौर में अनुभव से ज्यादा 'अडैप्टेबिलिटी' (अनुकूलन क्षमता) की अहमियत बढ़ गई है.
सिक्के का दूसरा पहलू: क्या सेल्सफोर्स में सब 'ऑल इज वेल' है?
भले ही 1000 नई भर्तियों का जश्न मनाया जा रहा हो, लेकिन सेल्सफोर्स का रिकॉर्ड पूरी तरह छंटनी मुक्त नहीं रहा है. इस साल की शुरुआत में ही कंपनी ने मार्केटिंग, प्रोडक्ट मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स विभाग से करीब 700-1000 पदों पर कटौती की थी.
आजतक एजुकेशन डेस्क