आजकल कॉर्पोरेट जगत में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है. अगर किसी कर्मचारी को बाहर निकालना हो तो कह दो कि 'अब तुम्हारा काम AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कर रहा है.' लेकिन क्या वाकई AI नौकरियों को खा रहा है, या फिर कंपनियां अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए AI को ढाल बना रही हैं? एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर अपनी कंपनी का जो कच्चा चिट्ठा खोला है, उसने इस 'प्रणाली' पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रेडिट पर फूटा कर्मचारी का दर्द
हाल ही में रेडिट पर एक कर्मचारी की पोस्ट खूब वायरल हो रही है. इस कर्मचारी ने बताया कि उसकी कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई. इसमें QA ऑटोमेशन स्टाफ, डेवलपर्स और बिजनेस टीम के कई लोग शामिल थे.
जब कर्मचारियों ने पूछा कि उन्हें क्यों निकाला जा रहा है तो कंपनी ने बड़े ही ठंडे अंदाज में जवाब दिया कि अब हम AI की मदद से ज्यादा काम कर सकते हैं, इसलिए हमें इतने लोगों की जरूरत नहीं है. बस फिर क्या था, इससे पूरी वर्कफोर्स में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया. हर कोई सोचने लगा कि क्या अब वाकई इंसानों की जगह मशीनें ले रही हैं?
ऐसे खुली 'झूठ' की पोल
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कुछ समय बाद कंपनी की एक इंटरनल मीटिंग (टाउन हॉल) हुई. कंपनी के बड़े अधिकारियों ने बातों-बातों में कह दिया कि हां, वैसे अगले महीने से हमारे हाथ से एक बहुत बड़ा बिजनेस (क्लाइंट) निकलने वाला है, लेकिन आप चिंता मत कीजिए, हम उसकी भरपाई के लिए नए प्लान बना रहे हैं.
अधिकारी तो बोलकर निकल गए लेकिन कर्मचारियों ने जब कड़ियों को जोड़ा तो सच सामने आ गया. जो लोग निकाले गए थे, वे सभी उसी बड़े क्लाइंट के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे जिसे कंपनी ने खो दिया था.
AI या बिजनेस की नाकामी?
यह मामला एक बड़ी बहस को जन्म देता है. क्या कंपनियां AI का नाम सिर्फ इसलिए ले रही हैं ताकि उन्हें रेवेन्यू में गिरावट या क्लाइंट खोने जैसे 'ट्रेडिशनल' कारणों को न बताना पड़े? कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इस घटना ने मेरा डाउट बढ़ा दिया है. कंपनियों को छंटनी के पीछे के असली कारणों को ईमानदारी से बताना चाहिए, न कि AI की आड़ लेनी चाहिए.'
आजतक एजुकेशन डेस्क