इंसान नहीं क‍िताबों के ल‍िए हुई थी AC की खोज, जान‍िए- साइंस के इन दो न‍ियमों पर किसने की थी ये खोज

एयर कंडीशनर (AC) का आविष्कार शुरुआत में इंसानों को गर्मी से बचाने के लिए नहीं बल्कि कागज और किताबों की सुरक्षा के लिए किया गया था. एसी की खोज करने वाले का पहला काम एक ऐसा सिस्टम डिजाइन करना था, जो लकड़ी और कॉफी सुखाने में मदद करें. 

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Air Conditioner Invention Willis Haviland Carrier  (Photo- asme.org) Air Conditioner Invention Willis Haviland Carrier (Photo- asme.org)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:48 AM IST

आज हम जिस एयर कंडीशनर (AC) के बिना गर्मी के दिनों में एक पल नहीं रह सकते हैं, उसका आविष्कार हमें गर्मी से बचाने के लिए नहीं बल्कि प्रिंटिंग प्रेस के कागजों को सड़ने से बचाने के लिए हुआ था. ऐसे में कई बार लोगों के दिमाग में यह सवाल भी उठता है कि AC किस तरह काम करती है, किसने इसका आविष्कार किया था. आइए जानते हैं साइंस के वो दो नियम जिन्होंने दुनिया बदल दी. 

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साल 1902 में न्यूयॉर्क की एक प्रिंटिंग प्रेस सैकेट विल्हेम्स एक अजीब परेशानी का सामना कर रहे थे. गर्मी और उमस के कारण कागज फूल रहे थे और स्याही फैल रही थी. उनकी किताबें और मैग्जीन खराब हो रही थीं. इस समस्या को सुलझाने का जिम्मा मिला 25 साल के एक युवा इंजीनियर विलीज कैरियर को. वलीज ने कोई लग्जरी आइटम बनाने के बारे में नहीं सोचा था, वो तो बस कागजों को नमी से बचाना चाहते थे. इस समस्या का समाधान खोजा. उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जो हवा को ठंडा करने के साथ-साथ उसकी नमी को भी नियंत्रित कर सके. इसका उद्देश्य प्रिंटिंग प्लांट के अंदर हवा की गुणवत्ता को स्थिर रखना था ताकि कागज की शेप न बदले और छपाई सटीक हो. 

कौन से हैं साइंस के वो 2 नियम? 

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कंट्रोलिंग ह्यूमिडिटी: विलीज ने समझा कि सिर्फ हवा ठंडी करने से काम नहीं चलेगा. उन्होंने हवा को ठंडी पाइपों (Coils) के बीच से गुजारा. इससे हवा की नमी पानी बनकर बाहर निकल गई और प्रेस को मिली बिल्कुल सूखी हवा. इसी वजह से कागज का सिकुड़ना और फूलना बंद हो गया. यही वह नियम है जिसने किताबों को बचाया. जब गर्म और नम हवा ठंडी कॉइल्स के संपर्क में आती है, तो हवा में मौजूद वाटर वेपर में बदल जाता है. इस प्रक्रिया से हवा की नमी कम हो जाती है, जो कागज को गलने या फूलने से बचाती है. 

हीट एक्सचेंज: थर्मोडायनामिक्स के नियम का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कमरे की गर्मी को सोखकर उसे बाहर फेंकने और बदले में ठंडी हवा अंदर लाने का सिस्टम बनाया. वहीं, जब कोई तरल, गैस में बदलता है तो वह अपने आसपास से गर्मी सोख लेता है. AC के अंदर एक रेफ्रिजरेंट लिक्विड  होता है. 

शुरुआत के कई सालों तक एसी का इस्तेमाल सिर्फ फैक्ट्रियों, कपड़ा मिलों और छपाई खानों में होता रहा. इंसानों को इसका फायदा बहुत बाद में मिला. 1920 के दशक में जब पहली बार सिनेमाघरों में एसी लगाया गया, तब लोगों को समझ आया कि बाहर की चिलचिलाती गर्मी के बीच भी शिमला जैसी ठंडक का मजा भी लिया जा सकता है. 

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फादर ऑफ एयर कंडीशनिंग बन गए विलीज 

विलीज कैरियर को आज फादर ऑफ एयर कंडीशनिंग कहा जाता है. उनकी इस खोज ने न सिर्फ हमें चैन की नींद दी बल्कि डेटा सेंटर्स, अस्पतालों और बड़-बड़ी इमारतों को बनाना आसान कर दिया. अमेरिकी इंजीनियर और आविष्कारक विलिस हैविलैंड कैरियर ने एयर कंडीशनिंग को बनाने वाले फॉर्मूले का विकास किया. पश्चिमी न्यूयॉर्क में अंगोला के पास जन्मे कैरियर ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय में पढ़ाई किया और 1901 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की. वह माता-पिता के इकलौके बच्चे थे. बचपन से ही वह बेहद शांत और प्रतिभाशाली बच्चे के रूप में जाने जाते थे जो समस्याओं को आसानी से सॉल्व कर सकता था. पढ़ाई पूरी करने के बाद से उन्होंने बफेलो फोर्ज कंपनी में नौकरी शुरू की, जो स्टीम इंजन और पंपों का डिजाइन और निर्माण करती थी. उनका पहला काम एक ऐसा सिस्टम डिजाइन करना था, जो लकड़ी और कॉफी सुखाने में मदद करें. 

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