'ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने छुड़ा दिए छक्के, PAK सीजफायर की गुहार...', स्विस थिंक टैंक ने खोली पोल

स्विस थिंक टैंक की एक रिपोर्ट ने 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना (IAF) के दबदबे की पुष्टि की है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान हवाई जंग में अपनी क्षमता खो चुका था और उसे 10 मई 2025 तक युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा.

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ऑपरेशन सिंदूर पर स्विस थिंक टैंक की रिपोर्ट (File Photo: PTI) ऑपरेशन सिंदूर पर स्विस थिंक टैंक की रिपोर्ट (File Photo: PTI)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

स्विस मिलिट्री थिंक टैंक 'सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज' (CHPM) ने 47 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त हासिल की थी. 7 से 10 मई 2025 तक चले इस 88 घंटे के संघर्ष में भारत ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए.

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वायुसेना ने राफेल और मिराज-2000 विमानों के जरिए बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को निशाना बनाया. पाकिस्तान द्वारा दागी गई पीएल-15 मिसाइलों और 900 से ज्यादा ड्रोनों के बावजूद, भारत के एस-400 और हवाई रक्षा नेटवर्क ने ज्यादातर खतरों को नाकाम कर दिया.

आखिरकार, अपनी जवाबी हमला करने की क्षमता खोने के बाद पाकिस्तान ने 10 मई की दोपहर तक युद्धविराम की गुजारिश की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया.

7 मई की वो रात...

संघर्ष की शुरुआत 7 मई की रात को हुई, जब भारतीय वायुसेना के राफेल और मिराज-2000 जेट्स ने सीमा पार कर जैश और लश्कर के मुख्यालयों पर हमला किया. पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने 30 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ जवाबी कार्रवाई की कोशिश की. 

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ड्रोन और मिसाइल हमलों की विफलता

पाकिस्तान ने 7 मई से ड्रोनों की दो बड़ी लहरें (कुल 900 से ज्यादा ड्रोन) भेजीं, जिनका मकसद भारतीय रडार को एक्टिव करके उनकी पहचान करना था. हालांकि, भारत के 'आकाशतीर' नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की वजह से यह रणनीति विफल रही. आधे से ज्यादा ड्रोन तो केवल एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ही मार गिराए गए. पाकिस्तान भारत के एस-400 सिस्टम या किसी अन्य महत्वपूर्ण सैन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह नाकाम रहा.

भारत का पलटवार और पाकिस्तान की हार

10 मई की तड़के 2 से 5 बजे के बीच, भारत ने अपनी सीमा के अंदर से ब्रह्मोस और स्कैल्प-ईजी (SCALP-EG) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से पाकिस्तान के एयरबेस और रडार केंद्रों पर भीषण हमला किया. इस हमले में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, रडार और कमांड सेंटर खत्म हो गए. रनवे तबाह होने की वजह से पाकिस्तानी वायुसेना के हाथ-पांव फूल गए और दोपहर तक इस्लामाबाद को झुकते हुए युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी.

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स्विस स्टडी का निष्कर्ष

मिलिट्री इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलाज़ द्वारा तैयार इस रिपोर्ट की समीक्षा स्विस वायु सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल सहित विशेषज्ञों के एक पैनल ने की है. रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है कि भारत ने अपने राजनीतिक-सैन्य मकसदों को सफलतापूर्वक हासिल किया. भारत ने न सिर्फ आतंकी ढांचे को दंडित किया, बल्कि पाकिस्तान की हवाई जवाबी क्षमता को भी शून्य कर दिया, जिससे यह संघर्ष आधुनिक युद्धों की तरह लंबा खिंचने के बजाय जल्दी खत्म हो गया.

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