झारखंडः बकोरिया एनकाउंटर की HC ने दिए जांच के आदेश

पलामू के बकोरिया कांड पर झारखंड हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है. कथित रूप से नक्सली बताकर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शिक्षक उदय यादव के परिजन ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच का आदेश देने के लिए याचिका दाखिल की थी.

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मुठभेड़ में बरामद वाहन (फाइल फोटो) मुठभेड़ में बरामद वाहन (फाइल फोटो)

धरमबीर सिन्हा / वरुण शैलेश

  • रांची,
  • 22 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 7:35 PM IST

झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के बकोरिया में 8 जून 2015 को हुए मुठभेड़ मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है. मामले में सीआईडी पुलिस को पहले ही क्लीन चीट दे चुकी थी. इस कथित फर्जी मुठभेड़ में 12 लोग मारे गए थे जिनमें पांच नाबालिग थे.

पलामू के बकोरिया कांड पर झारखंड हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है. कथित रूप से नक्सली बताकर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शिक्षक उदय यादव के परिजन ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच का आदेश देने के लिए याचिका दाखिल की थी.

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परिजनों का दावा-निर्दोषों को मारा

कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों का दावा है कि मारे गए सभी लोग निर्दोष थे, जो हथियार बरामद हुए थे वे प्रायोजित थे. उस वक्त मानवाधिकार आयोग ने भी सीआईडी जांच को सही नहीं माना था. दरअसल इस मामले में राज्य के डीजीपी समेत कई पुलिस अधिकारियों की गर्दन फंसी हुई है. हाईकोर्ट ने मामले के सभी पक्षों की मार्च में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

पुलिस रिपोर्ट के 25, 27 मई और तीन जून 2015 को आईबी ने 14 नक्सलियों के मोबाइल लोकेशन को लातेहार जिले के बार्डर पर ट्रैप किया था. सूचना सीआरपीएफ को दी गई थी. सीआरपीएफ के कोबरा 209 के कमांडेंट ने टीम बनाकर ऑपरेशन शुरू किया. आठ जून की रात पलामू एसपी ने सतबरवा ओपी इनचार्ज को लातेहार पलामू हाइवे पर नक्सलियों के जाने की सूचना दी और कोबरा बटालियन को सहयोग करने का निर्देश दिया.

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पोस्टमॉर्टम से उठे सवाल

मुठभेड़ के बाद देर रात एक बजे पलामू आईजी, एसपी, जोनल आईजी पलामू, कोबरा के सीओ एसपी लातेहार पहुंचे. मौके से बारह शव और आठ हथियार बरामद किए गए थे. शवों के पोस्टमॉर्टम के बाद से ही इस मुठभेड़ पर सवाल उठने लगे थे.

मुठभेड़ के बाद पलामू डीआईजी हेमंत टोप्पो, लातेहार के तात्कालिक एसपी अजय लिंडा, पलामू सदर थाना के प्रभारी हरीश पाठक ने मुठभेड़ पर सवाल उठाया था. वैसे दिसंबर 2017 में सीआईडी के तत्कालीन एडीजी एमवी राव ने भी मामले की समीक्षा करते हुए जांचकर्ता को आदेश दिया था.

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