उत्तर प्रदेश की बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या की जांच सीबीआई से कराने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर आप बड़े दायरे यानी अदालत परिसर में महिलाओं की सुरक्षा मांग कर रही हैं, तो दूसरी याचिका दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दरवेश यादव हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करें.
दरसअल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई. याचिका में देश भर की महिला वकीलों को कोर्ट परिसर में सुरक्षा देने की भी मांग की गई है. मृतक दरवेश बार काउंसिल की पहली महिला प्रमुख थीं.
महिला अधिवक्ता दरवेश यादव ने जिस शहर में रहकर नाम कमाया. पहचान बनाई, उसी शहर में बीती 13 जून को अधिवक्तागण उनका सम्मान कर रहे थे. कोर्ट परिसर में आने से पहले रास्ते में भी कई लोगों ने उन्हें फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया था. मगर दरवेश को इस बात अहसास बिल्कुल भी नहीं था कि ये दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा.
सम्मान समारोह के बाद दरवेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार मिश्रा के चैंबर में बैठी थीं. तभी एडवोकेट मनीष शर्मा वहां पहुंचा और पिस्तौल निकालकर दरवेश पर तीन गोलियां दाग दी. इससे पहले कोई कुछ समझ पाता, उसने खुद को भी एक गोली मार ली और सब खत्म हो गया.
दरवेश को एक गोली सिर में और एक गोली सीने में लगी थी, वो खून लथपथ जमीन पर गिर पड़ी थीं. हॉस्पिटल में ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. और इस तरह से दो दिन पहले ही यूपी बार काउंसिल की चेयरमैन बनी दरवेश की जिंदगी का सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया.
मनीष को सिर में गोली लगी थी. लिहाजा उसकी हालत गंभीर होने पर उसे आगरा से दिल्ली रेफर कर दिया गया था. जहां कुछ दिन बाद उसकी भी मौत हो गई.
परवेज़ सागर / संजय शर्मा