Piragarhi Triple Murder Case: दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर के नीचे खड़ी एक टिगोर कार और उसके अंदर मौजूद तीन बेजान जिस्म. न खून का निशान था, न संघर्ष के सबूत. फिर उन तीन लोगों की मौत आई कैसे? यही सवाल सबके जेहन में घूम रहा था. ये मामला शुरुआत में हादसा या सुसाइड लगा, लेकिन इसकी सच्चाई कहीं ज्यादा खौफनाक थी. प्रॉपर्टी डील की आड़ में ‘धनवर्षा’ का जाल बुना गया था. और जहरीले लड्डुओं के प्रसाद ने तीन जिंदगियां निगल लीं. इस रहस्य की डोर जाकर जुड़ी लोनी के एक ढोंगी तांत्रिक बाबा से, जो असल में एक सीरियल किलर निकला. ट्रिपल मर्डर की ये कहानी बेहद हैरान करने वाली है.
जब बाहरी दिल्ली की पुलिस ने पीरागढ़ी की ट्रिपल डेथ मिस्ट्री की जांच चालू की तो सीन ऑफ क्राइम का मुआयना करने के साथ-साथ पुलिस ने कार का चप्पा-चप्पा बारीकी से छान लिया. लेकिन जब पुलिस को कार में किसी जोर जबरदस्ती के निशान नहीं मिले, तो फिर पुलिस ने डिजिटल इनवेस्टिगेशन की शुरुआत की. अब तक मरने वाले तीनों लोगों की पहचान भी साफ हो चुकी थी. इनमें एक थे 76 साल के बुजुर्ग रणधीर, दूसरे 47 साल के शिव नरेश और तीसरी 40 साल की लक्ष्मी. तीनों बाहरी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले थे. और तीनों ही प्रॉपर्टी डिलिंग के कारोबार से जुड़े थे. तीनों की आपसी जान-पहचान की वजह भी प्रॉपर्टी का कारोबार ही थी. तीनों के घरवालों ने पुलिस को बताया कि रविवार की सुबह तीनों किसी डील के सिलसिले में घर से निकले थे, लेकिन शाम तक घर लौटने की जगह उन्हें उनकी मौत की खबर मिली.
तीनों की पहचान पता होने के साथ ही पुलिस ने सबके मोबाइल नंबर निकलवाए और उनकी सीडीआर की जांच शुरू कर दी. जिस तरह से कार की ड्राइविंग सीट के बगल वाली सीट खाली थी और एक महिला और पुरुष पीछे बैठे थे, उससे भी मामले को लेकर शक गहरा रहा था. लोगों को लग रहा था कि इस कार में कोई चौथा शख्स भी जरूर रहा होगा, जिसने ये साजिश रची होगी. अब पुलिस ने सीसीटीवी में कैद कार की फुटेज की रिवर्स सर्च की शुरुआत की. और इस रिवर्स सर्च में कुछेक जगहों पर एक बुजुर्ग शख्स कार में ड्राइविंग सीट के बगल में बैठा दिखाई दिया. उधर, सीडीआर की जांच से एक नंबर उभर कर सामने आया. जिसकी लोकेशन गाजियाबाद का लोनी इलाका था.
अब पुलिस को इस मामले की एक लीड मिल चुकी थी. जल्द ही पुलिस ने इस लीड के सहारे चौथे शख्स का पता किया. ये चौथा आदमी कोई और नहीं बल्कि लोनी का ही एक तांत्रिक बाबा कमरुद्दीन मियां था. वो कमरुद्दीन जो हर मर्ज का इलाज करने का दम भरता था. अब पुलिस को दो बातें पता करनी थी. एक तो इन तीनों का कमरुद्दीन से क्या रिश्ता था? और दूसरा क्या इन मौतों के पीछे कमरुद्दीन ही था, जिसने धोखे से तीनों को कोई जहरीली चीज खिला दी थी? तो अब तफ्तीश में तीनों मौतों का असली सच बाहर आने लगा था. पुलिस को पता चला कि कमरुद्दीन असल में खुद के काले इल्म का माहिर बताता था और लोगों का इलाज करने के साथ-साथ धनवर्षा से उनके रुपये-पैसे डबल-ट्रिपल करने का झांसा दिया करता था. और अपनी मौत से पहले ये तीनों ही लोग उसके संपर्क में आ चुके थे.
असल में कार में मुर्दा पाई गई महिला यानी लक्ष्मी सबसे पहले तांत्रिक कमरुद्दीन के संपर्क में आई थी. वो पिछले कई महीनों से उसके टच में थी. महिला अपने बीमार पति के इलाज के सिलसिले में कमरुद्दीन से मिली थी, लेकिन कमरुद्दीन ने उसे काला जादू दिखा कर अपने वश में कर लिया था. एक रोज़ कमरुद्दीन ने अपने शॉल से ढेर सारे रुपये निकालने का करतब दिखाते हुए महिला से कहा कि अगर वो 2-3 लाख रुपये का इंतजाम कर ले, तो वो अपने धनवर्षा के हुनर से इसी तरह उसे करोड़ों रुपये में बदल सकता है.
असल में धनवर्षा की बात तो सिवाय झूठ के कुछ और नहीं थी. ऐसे में 8 फरवरी को जब वो महिला रणधीर और शिव नरेश को लेकर अपने साथ लोनी में कमरुद्दीन के इसी ठिकाने पर पहुंची, तो कमरुद्दीन ने पहले वहां तंत्र-मंत्र का नाटक किया और फिर अपने साथ पॉलीथिन के पैकेट में जहरीले लड्डुओं का पैकेट लेकर तीनों के साथ उनकी गाड़ी में बैठ गया. तीनों को पहले उसने बातों में उलझाया और फिर प्रसाद बता कर लड्डू खाने को दिए. समझा जाता है कि इसी के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ने लगी. और जब कमरुद्दीन को लगा कि किसी भी वक्त तीनों की मौत हो जाएगी, वो मौका देख कर कार से नीचे उतर गया.
लेकिन फ्लाई ओवर के किनारे ये कार यूं नहीं पड़ी थी, बल्कि इस कार में थी तीन-तीन लाशें. एक ड्राइविंग सीट पर, जबकि दो पिछली सीटों पर. मरने वालों में एक महिला भी थी. मामला पहली ही नजर में बेहद रहस्यमयी लग रहा था. क्योंकि तीनों की मौत की वजह समझ में नहीं आ रही थी. किसी को ये हादसा लग रहा था, किसी को मास सुसाइड, तो किसी को क़त्ल.
इसी केस जुड़ी एक दूसरी फुटेज भी सामने आई. सीसीटीवी की वो तस्वीर दिल्ली के पीरागढ़ी से करीब 30 किलोमीटर गाजियाबाद के लोनी इलाके की है. इत्तेफाक से वो तस्वीर भी रविवार 8 फरवरी की है. सीसीटीवी कैमरे की घड़ी में वक़्त हो रहा है दोपहर के 1 बज कर 13 मिनट. खाली-खाली सी दिख रही इस गली से इस वक्त एक बुजुर्ग शख्स हाथ में पॉलीथिन का एक पैकेट लिए पैदल चला जा रहा है. और इसी तरह वो चलते-चलते कैमरे की जद से बाहर चला जाता है.
जाहिर है सीसीटीवी कैमरे में कैद इस तस्वीर में ऐसा कोई भी एक्शन नहीं है, जिसे देख कर कोई इसका कनेक्शन दिल्ली की ट्रिपल डेथ मिस्ट्री से होने की बात कह सकता है. लेकिन जब दिल्ली पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ती है, तो ना सिर्फ इस सीसीटीवी फुटेज से कार में मिली तीन-तीन लाशों का कनेक्शन जुड़ जाता है, इसी फुटेज के सहारे तीनों का कातिल भी पकड़ा जाता है.
अब आप समझ ही गए होंगे कि कार में जो तीन लाशें मिली थीं, उनकी मौत यूं ही नहीं हुई. बल्कि उनकी जान ली गई थी. मामला कत्ल का था. लेकिन आखिर इस ट्रिपल मर्डर के पीछे की मोटिव क्या था? और आखिर इस पूरी वारदात को कैसे और किसने अंजाम दिया? तो आइए इस कहानी को सिलसिलेवार तरीके से समझने के लिए आपको एक बार फिर पीरागढ़ी की उसी लोकेशन में लिए चलते हैं, जहां कार से वो तीन लाशें बरामद हुई थीं.
पीरागढ़ी में जब लोगों की नजर इस कार पर पड़ी, तो इसके अंदर तीन लोग मौजूद थे. मगर तीनों के तीनों बेसुध. करीब 75-76 साल का एक बुजुर्ग शख्स ड्राइविंग सीट पर, जबकि 40-45 साल की एक महिला और पुरुष पीछे की सीट पर. मगर ये लोग कौन थे? कहां से आए थे? भीड़ भरी सड़क पर कार के अंदर तीनों एकाएक बेहोश कैसे हो गए? ऐसे तमाम सवाल लोगों के जेहन में थे.
लोगों ने कार में इस तरह तीन लोगों को बेहोश देख कर पुलिस को खबर दी. आनन-फानन में पहले पुलिस कंट्रोल रूम की टीम मौका-ए-वारदात पर पहुंची और फिर दिल्ली के पश्चिमी विहार थाने की पुलिस ने भी बताई गई जगह का रुख किया. कार के अंदर बेहोशी की हालत में पड़े तीनों लोगों को किसी तरह बाहर निकाल कर पास के संजय गांधी अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों को मुर्दा करार दिया. यानी ब्रॉट डेड.
तीन लोगों के इस तरह कार के अंदर मारे जाने का रहस्य अब गहरा हो चुका था. कार में कार में ना तो खून का कोई कतरा था, ना किसी हथियार के निशान और ना ही कोई जोर जबरदस्ती के सबूत. अलबत्ता कार में शराब की बोतलें, डिस्पोज्बल ग्लासेज और कुछ खाने-पीने की चीजें जरूर पड़ी थीं. ऐसे में कार को देख कर ये शक हो रहा था कि शायद तीनों की मौत खाने-पीने के दौरान हुई फूड प्वाइजनिंग हुई या फिर तीनों ने एक राय हो कर कोई जहरीली चीज खा ली. यानी सुसाइड कर लिया. मगर एक पहेली ये भी थी कि कार में पुलिस को ना तो कोई सुसाइड नोट मिला और ना ही मरने वालों के मोबाइल फोन से ऐसी कोई बात पता चली, जिससे इन मौतों के सुसाइड होने की बात पर मुहर लगती. उधर, मरने वालों के घर वाले इस वारदात में सीधे-सीधे किसी साजिश इल्जाम लगा रहे थे. उनके मुताबिक ये केस सुसाइड का हो ही नहीं सकता था.
दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास रविवार 8 फरवरी की शाम ये टाटा टिगोर कार लोगों को संदिग्ध हालत में सड़क किनारे पड़ी मिली. कार का नंबर था - डीएल 7 सीयू 6492.
इधर, तांत्रिक कमरुद्दीन गाड़ी से नीचे उतर कर फरार हो गया और उधर तीनों ने छटपटाते हुए कार के अंदर ही दम तोड़ दिया. पुलिस को कार से ही करीब 2 लाख रुपये भी मिले, जिन्हें लेकर तीनों धनवर्षा करवाने के इरादे से कमरुद्दीन के पास पहुंचे थे. कमरुद्दीन शायद इन्हीं रुपयों की लालच में उनके साथ पीरागढ़ी तक गया भी था, लेकिन लड्डू खाने के बाद जब तीनों की तबीयत तेजी से बिगड़ी, तो शायद कमरुद्दीन को उनके रुपये चुराने का मौका भी नहीं मिला. पुलिस को जांच के दौरान लोनी का जो सीसीटीवी फुटेज मिला था, उसमें कमरुद्दीन की ही तस्वीरें थीं. इन तस्वीरों में कमरुद्दीन हाथ में जो पैकेट लेकर जाता हुआ दिखा, वो असल में जहरीले लड्डुओं का पैकेट था.
कमरुद्दीन के गिरफ्त में आने के साथ ही उसके तंत्र-मंत्र का पूरा जाल-बट्टा भी पुलिस के सामने आ गया. पता चला कि कमरुद्दीन लोगों को इलाज का झांसा देकर फांसता और फिर उन्हें धनवर्षा की कहानियां सुना कर ठग लेता. उसके साथ कुछ और भी लोग जुड़े हुए थे, जिन्होंने इसी तरह की एक कम्युनिटी बना रखी थी, जो ठगी का कारोबार करते थे.
दिल्ली पुलिस अभी कमरुद्दीन के नए-नए किए धरे की जांच कर ही रही थी कि उसे इस ढोंगी तांत्रिक के बारे में कुछ ऐसा पता चला जो बेहद चौंकानेवाला था. कमरुद्दीन ने ऐसा पहली बार नहीं किया था. इससे पहले उसने इसी तरह धनवर्षा के नाम पर लोगों को लालच देकर उन्हें लूटा था और उनकी हत्याएं की थी. उसने अपने गृह जिले यानी यूपी के फिरोजाबाद में दो लोगों की हत्याएं की थीं, जबकि राजस्थान के धौलपुर में भी एक शख्स की जान ली थी. इस लिहाज से देखा जाए तो कमरुद्दीन कोई मामूली कातिल नहीं बल्कि एक सीरियल किलर है.
कमरुद्दीन के पापों का हिसाब-किताब करने के लिए हमारी टीम यूपी के फिरोजाबाद में भी पहुंची, जहां उसने पहले दो हत्याएं की थीं. वहां भी कमरुद्दीन ने अपने शिकार लोगों को गड़ा हुआ धन मिलने का झांसा दिया था और उनकी जान ले ली थी. मामले की पड़ताल करते हुए 'आज तक' की टीम कमरुद्दीन के उस ठिकाने तक भी पहुंचने में कामयाब हुई, जहां बैठ कर वो ठगी की दुकान चलाया करता था. वहां हमें एक मजार के साथ-साथ तंत्र-मंत्र के तमाम साजो-सामान भी देखने को मिले.
फिलहाल, पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर तांत्रिक कमरुद्दीन को तो दबोच लिया है, लेकिन वो कमरुद्दीन के दूसरे साथियों का पता लगाने में जुटी है. खास तौर पर वो ये पता करने की कोशिश कर रही है कि क्या इस साजिश को अंजाम तक पहुंचाने में किसी और ने भी उसका साथ दिया या नहीं? लेकिन आज के जमाने में धनवर्षा जैसी झूठी कहानी और अंधविश्वास में फंस कर जिस तरह से 6 लोगों की मौत हो गई, उस कहानी पर यकीन करना भी मुश्किल लगता है.
(दिल्ली से ओपी शुक्ला और अरविंद ओझा के साथ गाजियाबाद से मयंक गौर और हिमांशु मिश्र का इनपुट)
aajtak.in