कार में मिली तीन लाशों की मिस्ट्री को तांत्रिक, हेलमेट और शराब ने और उलझाया? क्या है पूरा सच?

दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कार में मिली तीन लाशों के मामले में तांत्रिक ‘बाबा’ की एंट्री, कार में शराब की बोतलें और संदिग्ध हालात ने जांच को और ज्यादा उलझा दिया है. कहानी में कई नए एंगल सिर उठा रहे हैं. पुलिस हर पहलू को खंगाल रही है. जानिए क्या है इस ट्रिपल डेथ मिस्ट्री का पूरा सच.

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तांत्रिक बाबा की एंट्री और प्रसाद ने मामले को उलझा दिया है (फोटो-ITG) तांत्रिक बाबा की एंट्री और प्रसाद ने मामले को उलझा दिया है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

Delhi Car Death Mystery: दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाइओवर के पास एक सफेद टाटा टिगोर कार में मिली तीन लाशों का मामला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है. पुलिस एक पहेली को सुलझाती है, तो दूसरा सवाल सामने आकर खड़ा हो जाता है. अब इस केस में एक तांत्रिक ‘बाबा’ की एंट्री, कार में शराब की बोतलें और संदिग्ध हालात ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है. पुलिस इस केस की पहेली को सुलझाने में जुटी है. चलिए एक बार इस पूरी कहानी को फिर से जान समझने की कोशिश करते हैं.  

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सफेद संदिग्ध कार
वारदात के दिन यानी रविवार की दोपहर करीब 3:50 बजे पुलिस को एक PCR कॉल मिली थी. जिसमें बताया गया कि एक संदिग्ध कार में बैठे लोग कोई जवाब नहीं दे रहे हैं. वो बेसुध दिख रहे हैं. इसी पर राहगीरों को शक हुआ और पुलिस को कॉल की गई थी. जानकारी मिलने के कुछ मिनटों बाद पुलिस मौके पर पहुंची. पहली नजर में मामला आत्महत्या जैसा लगा, लेकिन हालात कुछ और कहानी कह रहे थे. जब कार का दरवाजा खोला गया तो मंजर खौफनाक था. अंदर बैठे तीनों लोग दरअसल मर चुके थे. जिनमें एक महिला थी. इस खबर ने इलाके में दहशत फैला दी.

कौन थे मरने वाले?
कार के भीतर का मंजर देखकर पुलिसवाले भी हैरान थे. पुलिस ने फौरन मामले की तफ्तीश शुरू की. मरने वालों की शिनाख्त करना पहला काम था. लिहाजा, कुछ घंटों में ही पुलिस ने मृतकों की पहचान कर ली. जिनमें रणधीर (76), शिव नरेश (40) और लक्ष्मी देवी (40) शामिल थी. जिस सफेद टाटा टिगोर कार में लाशें मिलीं थीं, वो भी रणधीर की ही थी. ये तीनों लोग अलग-अलग इलाकों के रहने वाले थे. रणधीर और शिव नरेश रणहोला के निवासी थे, जबकि लक्ष्मी देवी जहांगीरपुरी की रहने वाली थी. वैसे मूल रूप से वह बिहार की निवासी थी.

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रिश्तों का ताना-बाना!
कार में मुर्दा पाए गए तीनों लोगों के आपसी संबंध ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया. शिव नरेश, रणधीर के यहां प्रॉपर्टी का काम देखता था. यानी उन दोनों के बीच मालिक और कर्मचारी का रिश्ता साफ था. रणधीर मालिक था और शिव नरेश उसका कर्मचारी. लेकिन कार में लक्ष्मी देवी की मौजूदगी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए. क्या वे तीनों किसी प्रॉपर्टी डील के सिलसिले में मिले थे? या पहले से उनकी कोई योजना थी? पुलिस अब तीनों की कॉल डिटेल भी खंगाल रही है.

कार में शराब की बोतलें
तफ्तीश और तलाशी के दौरान कार के अंदर से तीन शराब की बोतलें और तीन इस्तेमाल किए हुए डिस्पोजेबल ग्लास बरामद हुए हैं. शिव नरेश और लक्ष्मी के मुंह से उल्टी के निशान भी मिले हैं. इसी बात से शक गहरा गया कि कहीं शराब में जहर तो नहीं मिलाया गया? पुलिस ने शुरुआती अंदेशा जताया कि तीनों ने जहर मिला सॉफ्ट ड्रिंक या शराब पी हो सकती है. लेकिन सवाल यही है कि क्या यह खुदकुशी थी या कोई साजिश?

सीसीटीवी में दिखा ‘बाबा’
जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के सामने आई है. उसमें एक व्यक्ति ‘बाबा’ के वेश में कार की फ्रंट सीट पर बैठा नजर आ रहा है. बताया गया कि वह तीनों से बातचीत कर रहा था. यही ‘बाबा’ अब जांच का सबसे अहम किरदार बन चुका है. पुलिस ने उसे ट्रेस कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. उस किरदार पर पूरे केस का असली दारोमदार टिका है.

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सुबह 10:30 से शुरू हुआ सफर
पुलिस के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 10:30 बजे तीनों को पीरागढ़ी इलाके में देखा गया था. इसके बाद कार रिंग रोड होते हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली की ओर गई. इसी दौरान उन्होंने एक बाबा से मुलाकात की थी. सवाल उठ रहा है कि उस मुलाकात में क्या हुआ? क्या वहीं से इस कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया?

मोबाइल और कॉल डिटेल्स की जांच
मरने वाले तीनों लोगों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं. अब उनके कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और चैट खंगाले जा रहे हैं. पुलिस कार के रूट पर लगे हर सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देख रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम को दोबारा जोड़ा जा सके. हर मिनट की गतिविधि अब जांच का हिस्सा है.

कौन थी लक्ष्मी?
रणधीर और शिव नरेश छह साल से एक-दूसरे को जानते थे और प्रॉपर्टी बिजनेस में साझेदार थे. दोनों परिवार एक-दूसरे से परिचित थे. लेकिन लक्ष्मी देवी को लेकर परिजन अनजान थे. परिवारों का कहना है कि उन्होंने कभी लक्ष्मी को नहीं देखा. फिर वह इस सफर का हिस्सा कैसे बनीं?

लक्ष्मी की दोहरी जिंदगी!
जांच में सामने आया कि लक्ष्मी देवी ने दो शादियां की थीं. एक पति बिहार में रहता है, जबकि दूसरे के साथ वह दिल्ली में रहती थीं. वह होम केयर सर्विस से जुड़ी थी और बुजुर्गों की देखभाल का काम करती थी. उनकी निजी जिंदगी अब इस केस का अहम हिस्सा बन चुकी है.

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पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट का इंतजार
रणधीर और शिव नरेश का पोस्टमार्टम हो चुका है, जबकि लक्ष्मी का होना बाकी है. दोनों का विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि शरीर में गए किसी भी तरह के केमिकल की जांच की जा सके. पुलिस साफ कह रही है कि प्रथम दृष्टया जहर की आशंका है, लेकिन अंतिम सच फोरेंसिक रिपोर्ट ही बताएगी.

परिवार ने नकारी आत्महत्या की थ्योरी
रणधीर के परिवार ने आत्महत्या की संभावना को सिरे से नकार दिया है. बेटी सविता का कहना है कि पिता सुबह सामान्य हालत में घर से निकले थे. उन्होंने फोन पर बताया था कि वे खेत में हैं और बाद में लौटेंगे. परिवार का दावा है कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी.

भाई से आखिरी मुलाकात 
रणधीर के चचेरे भाई ने बताया कि सुबह करीब 9:30 बजे उनकी मुलाकात रणधीर से हुई थी. उन्होंने कहा कि वह किसी काम से बाहर जा रहे हैं, लेकिन जगह नहीं बताई. उनका कहना है कि रणधीर बेहद नेक इंसान थे और आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे.

आत्महत्या या साजिश?
शराब, जहर, तांत्रिक और पुराने रिश्ते—हर एंगल जांच के दायरे में है। क्या तीनों ने किसी धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर कुछ खा-पी लिया? या फिर यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था? पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।

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तंत्र साधना का कनेक्शन
सूत्रों के मुताबिक, जिस ‘बाबा’ से मुलाकात हुई थी, वह तंत्र साधना करता है. उससे और उसके साथी से पूछताछ हो रही है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या तीनों किसी समस्या के समाधान के लिए उसके पास गए थे. या कहानी कुछ और है?

दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक पीरागढ़ी मामले की जांच इस वक्त एक तथाकथित ‘बाबा’ के इर्द-गिर्द घूम रही है. पुलिस को पता चला है कि इस बाबा पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं. उसके कई क्लाइंट्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है या वे लापता हो गए, लेकिन हर बार सबूतों के अभाव में वह बच निकलता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि घटना वाले दिन बाबा काफी देर तक कार में मौजूद था और वह रणधीर के साथ वाली सीट पर बैठा हुआ था. मृतका लक्ष्मी का परिवार बाबा को पहले से जानता था और पुलिस को आशंका है कि लक्ष्मी ने ही बाबा की मुलाकात शिवनरेश और रणधीर से करवाई हो सकती है. फिलहाल पुलिस हत्या और आत्महत्या- दोनों एंगल से मामले की जांच कर रही है.

सूत्रों के अनुसार यह बाबा लोगों को पैसे कमाने के लुभावने वादे कर अपने जाल में फंसाता था. वह तंत्र-मंत्र के जरिए धन दोगुना-चौगुना करने और ‘धनवर्षा’ कराने का दावा करता था. पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक उसके झांसे में आकर कई लोग अपना पैसा गंवा चुके हैं, जबकि कुछ ने अपनी जान भी खोई है.

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हैरानी की बात यह है कि बाबा साधारण जीवन जीता है, उसका परिवार भी है और वह किसी खास भेषभूषा में नहीं रहता. अब तक की जांच में सामने आई उसकी पिछली गतिविधियों के बाद वह दिल्ली पुलिस के रडार पर आ चुका है.

सच का इंतजार
पीरागढ़ी फ्लाईओवर की यह घटना अब दिल्ली की बड़ी मिस्ट्री बन चुकी है. तीन जिंदगियां एक कार में खत्म हो गईं, लेकिन सवाल अभी जिंदा हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और बाबा से पूछताछ के बाद ही सच सामने आएगा. तब तक यह मामला रहस्य और अटकलों के बीच झूलता रहेगा.

(दिल्ली से हिमांशु मिश्रा के साथ अरविंद ओझा का इनपुट)

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