यौन शोषण, पुलिस-डॉक्टरों की लापरवाही और सच दबाने की साजिश... NEET छात्रा की डेथ मिस्ट्री का पूरा सच

पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है. पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में रेप की कोशिश के सबूत मिले हैं, जबकि शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया था. जानिए इस सनसनीखेज मामले की परत-दर-परत सच्चाई.

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इस मामले में डॉक्टरों और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG) इस मामले में डॉक्टरों और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • पटना,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

Patna NEET Student Death Case: वो 6 जनवरी का दिन था. नीट की एक छात्रा पटना के सहज सर्जरी अस्पताल में लाई जाती है. उसकी हालत गंभीर थी. कहा जाता है कि उसने नींद की गोलियां खा रखी थीं. अगर ऐसा था तो मामला खुदकुशी की कोशिश का था. अब सवाल है कि फिर भी अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इसकी खबर क्यों नहीं दी? किसके दबाव में नहीं दी? नीट छात्रा का ये पूरा मामला असल में पटना के चित्रगुप्त नगर थाना इलाके का है. अब मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस प्रसासन सवालों के घेरे में आ गया. 

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पुलिस की लापरवाही
6 जनवरी को उस नीट छात्रा को सहज अस्पताल से आईसीयू की कमी के चलते डॉक्टर प्रभात हॉस्पिटल भेजा गया. तब पहली बार 6 जनवरी की रात को ही चित्रगुप्त नगर थाने को इस बात की खबर दी गई. पर कमाल देखिए कि चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी को छोड़िए थाने का एक अदद सिपाही भी मामले की जांच के लिए ना अस्पताल पहुंचा ना हॉस्टल. पहली बार एफआईआर भी 9 जनवरी को लिखी गई. थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी की इसी लापरवाही के चलते अब जाकर उन्हें सस्पेंड किया गया है.

तीन दिनों तक नहीं पहुंची थी पुलिस
ज़रा सोचिए हॉस्टल का जो कमरा एक तरह से पूरा क्राइम सीन था, जिस कमरे में पीड़़िता बेहोश मिली थी. उस कमरे को सील करना तो छोड़िए उसकी जांच करने या वहां से कोई सबूत हासिल करने के लिए भी अगले तीन दिनों तक पुलिस पहुंची ही नहीं. ना फ़ॉरेंसिक टीम ही वहां गई. यानि पूरे तीन दिनों तक ना हॉस्टल सील हुआ, ना कमरा, ना बिस्तर, ना पीड़िता के कपड़े. यहां तक की पीड़िता के जिन अंडर गार्मेंट्स से स्पर्म मिले हैं, वो कपड़े भी खुद पुलिस ने बरामद नहीं किए बल्कि वो कपड़े पीड़िता के मां बाप ने पुलिस को सौंपे. 

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फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदला केस
वो कपड़े भी 10 जनवरी को पुलिस के हवाले किए गए थे, लेकिन पटना पुलिस ने उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा ही नहीं. वो तो जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की कोशिश की बात सामने आई तब कहीं जाकर इन कपड़ों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया. और अब जब पूरा केस ही फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बदल चुका है, तब पीड़िता के कमरे की तलाशी ली जा रही है.

एसएचओ और दरोगा सस्पेंड
पटना पुलिस की इन्हीं लापरवाहियों का ठीकरा किसी पर तो फोड़ना था. लिहाजा, चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के दरोगा हेमंत झा को सस्पेंड कर बाकी सीनियर अफसरों ने अपना पल्ला झाड़ लिया. पटना पुलिस से केस लेकर डीजीपी पहले ही जांच एसआईटी को सौंप चुके थे. लेकिन एसआईटी पर भी उंगली उठ रही थी क्योंकि एसआईटी में वो पुलिस अफसर भी शामिल थे, जिन पर इस केस का मर्डर करने का इल्जाम था. जैसे एएसपी अभिनवर कुमार और पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा. 

गृहमंत्री ने ली अधिकारियों की बैठक
इसी के बाद बिहार के नए-नए बने गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के डीजीपी विनय कुमार और सीनियर पुलिस अफसरों के साथ एक मीटिंग की. इस मीटिंग में एसआईटी की टीम भी शामिल थी. पूरे हफ्ते भर बाद भी एसआईटी कुछ कर नहीं पा रही थी. इसीलिए गृह मंत्री ने एसआईटी के साथ-साथ मामले की जांच में सीआईडी को भी शामिल कर दिया.

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नीट की तैयारी कर रही थी पीड़िता
जहानाबाद की रहने वाली एक लड़की डॉक्टर बनने का सपना लिए पटना पहुंचती है. पटना के एक कोचिंग सेंटर में वो नीट की तैयारी कर रही थी. पटना के चित्रगुप्तनगर में ही वो शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने लगी. नए साल की छुट्टी थी, इसलिए वो दिसंबर के आखिरी हफ्ते में अपने घर जहानाबाद चली गई थी. जहानाबाद से वो 5 जनवरी को पटना अपने हॉस्टल में वापस लौटी. लेकिन इसके अगले ही दिन 6 जनवरी को जब वो ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई तब हॉस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इसके बाद जब वो कमरे में दाखिल हुए तो लड़की बेहोश मिली.

11 जनवरी को हुई थी पीड़िता की मौत
सबसे पहले बेहोश छात्रा को पटना के सहजानंद अस्पताल ले जाया गया. लेकिन हालत गंभीर थी. लिहाजा वहां से उसे प्रभात मेमोरियल प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया. लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर फिर उसे तीसरे अस्पताल मेंदाता भेज दिया गया. जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. 6 जनवरी को जब लड़की को सहजानंद अस्पताल लाया गया था, तब उसी दिन चित्रगुप्तनगर पुलिस स्टेशन को इसकी खबर दी गई थी. लेकिन पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची.

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पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई
हालांकि इस दौरान खबर सुनकर लड़की के मां बाप जहानाबाद से पटना पहुंच चुके थे. बेटी की हालत देखते ही पिता ने पहले ही दिन ये कह दिया था कि उनकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है. पुलिस ने तब भी उनकी नहीं सुनी. जब 9 जनवरी को मेदांता में लड़की की तबीयत ज्यादा बिगड़ी तब पहली बार पटना पुलिस ने शिकायत दर्ज की. लेकिन किया कुछ नहीं. पर 11 जनवरी को जैसे ही लड़की की मौत की खबर पुलिस को मिली, पुलिस समझ गई कि अब उसके निकम्मेपन की कहानी मीडिया में आएगी. 

पटना पुलिस का दावा
अब पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश शुरु कर दी. उस कोशिश का पहला सबूत ये था कि एएसपी अभिनव ने लड़की की मौत के अगले दिन यानि 12 जनवरी को प्रेस कांफ्रेस कर ये बताने की कोशिश की कि उसकी मौत के पीछे कोई साजिश नहीं. मामला खुदकुशी का है. लड़की के साथ जैसा कि उनके पिता कह रहे हैं कोई सेक्सुल असॉल्ट नहीं किया गया. पटना पुलिस ने अपने दावे में ये भी कहा कि हॉस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हॉस्टल स्टाफ के बयान और शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट से भी ये जाहिर होता है कि छात्रा के साथ किसी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ.

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परिवार ने लिखा DGP को लैटर
अब जब पटना पुलिस की पूरी थ्योरी ही पलट चुकी है तो नीट छात्रा के पिता ने बिहार के डीजीपी विनय कुमार के नाम एक लेटर लिखकर कहा है कि इस पूरे मामले में हॉस्टल के मालिक, सहज और प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर, चित्रगुप्त नगर थाने की निलंबित एसएचओ की पूरी जांच होनी चाहिए। साथ ही उनके कॉल डिटेल की भी जांच होनी चाहिए ताकि उनकी बेटी की मौत की साजिश का खुलासा हो सके।

अस्पताल लाए गए थे संदिग्ध
पटना के गर्दनीबाग अस्पताल में पुलिस की निगरानी में एक-एक कर 6 लड़के इसलिए लाए गए थे ताकि उनके डीएनए सैंपल लिए जा सके. अस्पताल के अंदर जज और मेडिकल टीम की मौजूदगी में लगभग 2 घंटे में इन सभी के डीएनए सैंपल लेने के बाद इन्हें अस्पताल के बाहर ले जाया गया. अब सवाल ये है कि ये 6 लड़के कौन हैं. इनके डीएनए सैंपल क्यों लिए जा रहे हैं. इनके डीएनए सैंपलिंग से किसके डीएनए को मैच कराया जाएगा?

असल में ये वही 6 लड़के हैं जो 5 जनवरी को पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के अंदर जाते और बाहर निकलते सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे. उसी हॉस्टल के उसी कमरे में नीट की नाबालिग छात्रा अगले दिन यानि 6 जनवरी को बेहोश मिली थी. और फिर 5 दिन बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई थी. पीड़िता को लेकर पटना पुलिस ने शुरुआत में ये दावा किया था कि लड़की ने खुदकुशी की है और उसके साथ कोई रेप या जबरदस्ती नहीं की गई.

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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खारिज किया पुलिस का दावा
लेकिन पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पटना पुलिस की धज्जियां उड़ाते हुए ये खुलासा किया कि नीट की छात्रा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई थी. और उसके जिस्म पर लूट खसूट के अनगिनत निशान थे. बाकी रही सही कसर फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरी कर दी. फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक नीट छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म के सबूत मिले हैं, जो किसी और के हैं. अब वो कौन है उसी का पता लगाने के लिए पटना पुलिस ने सबसे पहले इन 6 लड़कों के डीएनए सैंपल लिए हैं. 

क्यों लिए गए 6 लड़कों के डीएनए सैंपल 
अब सवाल ये है कि इन 6 लड़कों के डीएनए सैंपल क्यों लिए गए. तो पटना पुलिस के मुताबिक, शम्भू गर्ल्स हॉस्टल और उसके इर्द गिर्द लगे सीसीटीवी कैमरों में ये 6 के 6 लड़के नजर आए थे. इतना ही नहीं ये सभी लड़के गर्ल्स हॉस्टल के अंदर गए थे. अब सवाल ये है कि एक गर्ल्स हॉस्टल के अंदर लड़कों को कैसे जाने दिया गया. पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे के आधार पर ही हॉस्टल के स्टाफ से जब पूछताछ की तो उन्होंने ने भी इन सभी 6 लड़को की पहचान की. सीसीटीवी कैमरे के अलावा पुलिस ने 5 जनवरी को जब इन 6 के 6 लड़कों की लोकेशन को खंगाला तो कॉल डिटेल और लोकेशन भी उसी गर्ल्स हॉस्टल का ही मिली. हालांकि अभी सिर्फ इनके डीएनए सैंपल लिए गए हैं. इनको गिरफ्तार नहीं किया गया है. यहां तक की पुलिस ने सभी लड़कों की पहचान भी गुप्त रखी है.

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परिवार के लोगों के डीएनए सैंपल
उन 6 लड़कों के अलावा शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन का भी डीएनए सैंपल लिया गया है. मनीष रंजन का सैंपल लेने के लिए एफएसएल की टीम पटना के बेऊर जेल गई थी. मनीष रंजन को नीट छात्रा की मौत के मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इन सात लोगों के अलावा पांच और लोगों के भी डीएनए सैंपल लिए गए हैं. इनमें नीट छात्रा की मां, पिता, भाई और दो मामा शामिल हैं. छात्रा के परिवार का डीएनए सैंपल इसलिए लिया गया है ताकि नीट छात्रा के डीएनए की सही पहचान हो सके.

सच दबाने की कोशिश
तो कुल 12 लोगों के डीएनए सैंपल लिए जाने के बाद और फॉरेंसिक रिपोर्ट में नीट छात्रा के अंडर गारमेंट्स में स्पर्म की मौजूदगी मिलने के बाद ये साफ है कि मौत से पहले छात्रा के साथ रेप की कोशिश की गई थी. लेकिन इसके बावजूद इस सच को पहले एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर और फिर पूरी पटना पुलिस ने छुपाने की कोशिश की. सवाल ये है कि पटना पुलिस ने ऐसा क्यों किया। उसने किन लोगों को बचाने की कोशिश की। क्या वो लोग बहुत ताकतवर हैं।

डॉक्टर सतीश उसी प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर हैं, जहां नीट छात्रा को भर्ती कराया गया था. उस हॉस्पिटल की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक 6 जनवरी को पीड़िता का इलाज करने वाले पहले डॉक्टर राजेश राय थे. सीटी स्कैन के बाद उनकी रिपोर्ट अलग थी. लेकिन 7 जनवरी को डॉक्टर सतीश ने कुछ और ही रिपोर्ट दी. डॉक्टर सतीश ने बिना किसी ठोस रिपोर्ट के ही ये दावा किया था कि पीड़िता के साथ रेप की कोई कोशिश नहीं की गई. ना उसके जिस्म पर कोई जख्म थे. बल्कि उसने खुदकुशी की थी. पटना पुलिस के एएसपी अभिनव कुमार ने इसी डॉक्टर सतीश की रिपोर्ट पर बाकायदा प्रेस कॉंफ्रेंस में ये ऐलान कर दिया था कि पीड़िता के साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं हुई थी.

26 जनवरी का एक वीडियो सामने आया है, जो शायद उसी प्रभात हॉस्पिटल के परिसर का. रिपब्लिक डे पर वही डॉक्टर सतीश बाकायदा ऐलानिया ये कहते हैं कि जो भी प्रभात हॉस्पिटल के खिलाफ साजिश रचेगा, उसे जमीन में गाड़ कर नेस्तोनाबूत कर देंगे.

दरअसल, 5 जनवरी को जब नीट छात्रा गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश मिली थी, तब सबसे पहले उसे पटना के इस सहज अस्पताल में ले जाया गया था. लेकिन छात्रा की हालत जब ज्यादा बिगड़ने लगी तब यहां से उसे प्रभात अस्पताल भेजा गया था. छात्रा जब इस हॉस्पिटल में आई तब उसकी हालत क्या और कैसी थी ये जानने के लिए एसआईटी की टीम ने सहज अस्पताल के डॉक्टरों से भी पूछताछ की है.

(पटना से सुजीत कुमार के साथ शशिभूषण का इनपुट)

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