नोएडा में ‘भूत’! मौत के चार महीने बाद जिंदा मिली महिला... जेल में बंद था बेगुनाह पति, हैरान कर देगी कहानी

बिहार के मोतीहारी में चार महीने पहले एक महिला का कत्ल हुआ. उसकी हत्या के संगीन आरोप में उसके पति को ही जेल भेज दिया गया. मगर अचानक वो महिला जिंदा हो गई और यूपी के नोएडा में हंसी खुशी रहते हुए मिली. ये अजब कत्ल की, गजब कहानी आपको हैरान कर देगी.

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गुंजा के कत्ल और फिर जिंदा होने की कहानी हैरान करती है (फोटो-ITG) गुंजा के कत्ल और फिर जिंदा होने की कहानी हैरान करती है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • मोतीहारी,
  • 28 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

Motihari Gunja Fake Death Story: एक शख्स पर अपनी पत्नी के कत्ल का इल्जाम था. पुलिस पति को गिरफ्तार कर लेती है और उसे जेल भेज दिया जाता है. इतना ही नहीं, तीन महीने बाद इसी कत्ल के मामले में पुलिस उसी पति के खिलाफ बकायदा चार्जशीट भी दाखिल कर देती है. फिर चार महीने बाद अचानक नोएडा में एक भूत दिखाई देता है. कुछ लोग उस भूत को पहचान लेते हैं. बाद में पुलिस उस भूत को भी हिरासत में ले लेती है. इसके बाद जो कहानी निकलकर सामने आती है, वो आपको हैरान कर देगी.

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सलवार सूट पहने उस मैडम के हाथ में मोबाइल है, जो कान से लगा है. यानि बातचीत जारी है. मैडम बिंदास सड़क पर चल रही हैं. तभी अचानक फ्रेम में एक पुलिस अफसर नजर आता है. पुलिस अफसर आगे-आगे, मैडम पीछे-पीछे. फिर फ्रेम में एक कार की एंट्री होती है. पुलिस अफसर कार का दरवाजा खोलता है और मैडम बैठ जाती हैं. फिर मैडम की दूसरी तस्वीर सामने आती है. हाथ में अब भी मोबाइल है, जो कान से लगा है. यानि बातचीत का सिलसिला अभी थमा नहीं है. उस फ्रेम में मैडम के साथ और आगे तीन पुलिसवाले चल रहे हैं. 

अब चलिए इन मैडम से आपका तार्रुफ कराते हैं. पर डरिएगा मत दरअसल ये मैडम एक भूत हैं. आप चाहें तो आत्मा भी बुला सकते हैं. मजाक नहीं कर रहे हैं, वो तस्वीर और वीडियो भले ही 24 नवंबर 2025 के हों. पर इन मैडम को मरे हुए अब चार महीने हो चुके हैं. इन मैडम की मौत तो 3 जुलाई 2025 को ही हो चुकी थी. मौत भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि सीधे उनका कत्ल किया गया था. और इनका कातिल भी कोई और नहीं बल्कि इनका अपना पति था. वो पति जो इनके कत्ल के इलजाम में पिछले चार महीने से जेल में बंद है. ना सिर्फ जेल में बंद है बल्कि इन्हीं मैडम के कत्ल के इल्जाम में उस पति के खिलाफ अदालत में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है. 

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अब आप कहेंगे ये क्या मजाक है? लेकिन मजाक नहीं है. चार महीने पहले जिस मैडम का कत्ल हो चुका उसे यूं घूमता देख जब रिपोर्टर ने पुलिस के एक बड़े साहब से सीधा और मासूम सवाल पूछा कि आखिर मामला क्या है? तो उससे भी कहीं ज्यादा मासूमियत से पुलिस वाले बड़े साहब ने क्या खूब जवाब दिया. जवाब सुनकर एक पल को तो रिपोर्टर भी चकरा गया कि साहब सचमुच पुलिस वाले हैं या कोई नेता या मंत्री. 

आला अफसर कहना था कि इस जिंदा-मुर्दा भूत की कहानी दरअसल तबकि है जब उन्होंने इस थाने में अपना पदभार ग्रहण नहीं किया था. पदभार ग्रहण खैर, इनके पदभार ग्रहण को रहने देते हैं और अब खुद ही इस जिंदा या मुर्दा मैडम की कहानी का सच समझते हैं. चार महीने पुरानी इस मुर्दा मैडम का नाम है- गुंजा. वह बिहार के मोतीहारी जिले की रहने वाली है. इसी साल मार्च में गुंजा की शादी पड़ोस के गांव में रहने वाले रंजीत कुमार से होती है. 

शादी को चार महीने बीत जाते हैं. फिर आती है 3 जुलाई की रात. वो रात जब सीसीटीवी कैमरे में कुछ तस्वीरें कैद हुई थी. तारीख उस पर भी लिखी हुई है. वक्त भी है. रात 12 बजकर 7 मिनट. तेज कदमों से कमरे से बाहर निकलने वाली वही जिंदा मुर्दा गुंजा है. उस कमरे से निकलने के साथ ही अब गुंजा हमेशा हमेशा के लिए गायब हो चुकी थी. 

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उधर, देर रात गुंजा के पति रंजीत को अहसास हुआ कि उसकी पत्नी कमरे में नहीं है. हर तरफ ढूंढा. तलाश किया. कुछ पता नहीं चला. सुबह तक खबर ससुराल भी पहुंच गई. पर गुंजा कहीं नहीं मिली. फिर पति रंजीत समेत पूरा परिवार अरेराज थाना पहुंचता है और गुंजा की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाता है. रंजीत पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की तस्वीर के बारे में भी बताता है. 

मगर पुलिस तो पुलिस है, उनकी तफ्तीश में कोई और दखल दे या कोई उन्हें ये बताए कि कैसे जांच की जानी है तो भला उन्हें बुरा तो लगेगा ही. सो यहां कि पुलिस ने भी अपना काम करने की बजाय उल्टे रंजीत पर ही ये जिम्मेदारी डाल दी कि वो अपनी बीवी गुंजा को ढूंढ कर पुलिस के सामने पेश करे. 

उधर, इस बीच ये भी हुआ कि गुंजा के घरवालों ने उल्टे रंजीत पर ही दहेज की वजह से अपनी बीवी को मारकर उसकी लाश कहीं छुपा देने का इल्जाम लगा दिया. खुंदक खाई पुलिस को और क्या चाहिए था, रंजीत की बीवी को ढूंढने के बजाय 9 जुलाई को सिर्फ गुंजा के घरवालों की एक शिकायत पर उल्टे रंजीत को ही गिरफ्तार कर लिया. इल्जाम ये कि उसने अपनी बीवी को किडनैप किया, उसका कत्ल किया और फिर लाश कहीं छुपा दी.

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अब रंजीत जेल जा चुका था. पर कमाल पुलिस कि जिस गुंजा के कत्ल के इल्जाम में रंजीत को जेल भेजा उस गुंजा की लाश तक पुलिस ढूंढ नहीं पाई. ढूंढ नहीं पाई शायद ये कहना गलत होगा. असल में कभी ढूंढने की कोशिश ही नहीं की. तीन जुलाई की रात की सीसीटीवी कैमरे की कुछ तस्वीरें साफ बता रही थी कि गुंजा अपनी मर्जी से घर से गई है. वो भी रात के अंधेरे में. जब वो जा रही है, तब कैमरे में दूसरा कोई शख्स है ही नहीं. रंजीत घर के अंदर ही है. पर इतना बड़ा और पुख्ता सबूत होने के बावजूद पुलिस ने गुंजा को मुर्दा मान लिया और उसके पति को कातिल. 

इधर, बेटे के जेल जाते ही पूरा घर बर्बाद होना शुरु हो गया. इज्जत के साथ साथ मुकदमेबाजी ने जमा-पूंजी को भी नजर लगा दी. रंजीत को जेल गए हुए तीन महीने हो चुके थे. इस मुद्दत में पुलिस ने बड़ी खूबसूरत कहानी बनाकर चार्जशीट की शक्ल में उसे अदालत में पेश भी कर दिया. अब बस ट्रायल शुरू होना बाकी था. मामला कत्ल का था, फांसी नहीं तो कम से कम उम्रकैद तो पक्की थी. 

पर फिर अब तभी बिहार के इस मोतीहारी से कई सौ किलोमीटर दूर नोएडा में 24 नवंबर को अचानक एक भूत दिखाई देता है. इन्ही मैडम का भूत. इत्तेफाक से मुर्दा मैडम के जिंदा होने की खबर मोतीहारी रंजीत के घऱ और पुलिस तक पहुंचती है. चार महीने से जेल में बंद रंजीत की बेगुनाही का परवाना यही मुर्दा भूत थी. रंजीत के घरवाले मोतीहारी पुलिस के साथ जल्द से जल्द नोएडा पहुंच कर मुर्दा से जिंदा हो चुकी गुंजा को वापस गांव ले जाना चाहते थे. ताकि उनका बेटा जेल से बाहर आ जाए. 

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पर यहां भी कमाल देखिए, देर से पदभार ग्रहण करने वाले इस थाने के इन बड़े साहब ने रंजीत के घरवालों से कहा नोएडा दूर है, लिहाजा वहां तक जाने के लिए सफर और गाड़ी का इंतजाम आप लोगों को करना होगा. हम बस आपके साथ पर्यटक बनकर चल पड़ेंगे. देर से पदभार ग्रहण करने वाले पुलिस के ये साहब शायद भूल बैठे थे कि केस की तफ्तीश के दौरान कहीं आने जाने या सफर के लिए पुलिस विभाग में अलग से बजट होता है, जो उन्हें सरकार देती है. 

खैर साहब लोग मुफ्त की गाड़ी में, मुफ्त का खाना खाते हुए मोतीहारी से सड़क के रास्ते नोएडा पहुंचते हैं. यहीं उन्हें चार महीने पहले मर चुकी गुंजा जिंदा मिलती है. अब सवाल ये था कि गुंजा मुर्दा से जिंदा कैसे हो गई? तो कहानी वही पुरानी है. असल में गुंजा गांव में पड़ोस मे रहने वाले एक लड़के से प्यार करती थी. पर घरवालों ने उसकी मर्जी के खिलाफ रंजीत से उसकी शादी करा दी. लेकिन शादी के बाद भी गुंजा और उसके प्रेमी के बीच रिश्ता कायम रहा. 

फिर इन दोनों ने मिलकर हमेशा के लिए मिलने की एक तरकीब निकाली. तरकीब ये थी कि गुंजा एक रात अंधेरे में अपने घर से गायब हो जाएगी और फिर दोनों नोएडा में रहेंगे और वहीं अपनी एक नई दुनिया बसाएंगे. क्योंकि गुंजा का प्रेमी नोएडा मे ही जॉब करता है. तरकीब काम कर गई. चार महीने से दोनों साथ थे. 

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पुलिस पर इन सबके बीच बेचारा रंजीत ख्वामा खां पिछले चार महीने से एक ऐसे कत्ल के इलजाम में जेल में बंद था, जो उसने किया नहीं, बल्कि कभी हुआ ही नहीं था. अब सवाल ये है कि गुंजा और उसके प्रेमी को जिंदा होकर भी मुर्दा बनने के लिए कानून की किसी ना किसी धारा में तो लपेट ही देगी. पर क्या इस अरेराज थाना में देर से पदभार ग्रहण करने वाले इन साहब और इनके बाकी साथियों को भी कानून की धाराओं में लपेट कर इन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए? ये एक बड़ा सवाल है.

(मोतीहारी से सचिन पांडेय का इनपुट)

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