270 kg Mephedrone Seizure: डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने देश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है. एजेंसी ने मल्टी-स्टेट ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. 11 और 12 जनवरी 2026 को चली इस सुनियोजित कार्रवाई में 270 किलो मेफेड्रोन जब्त की गई है. यह एक सिंथेटिक नशीला पदार्थ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में भारी मांग है. जब्त की गई ड्रग्स की कीमत अवैध बाजार में करीब 81 करोड़ रुपये आंकी गई है. कई राज्यों में यह कार्रवाई एक साथ की गई, जिससे तस्करों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
चिकन फीड की आड़ में ड्रग तस्करी
जांच में सामने आया कि तस्करों ने नशे की खेप को छिपाने के लिए एक नया तरीका अपनाया था. मेफेड्रोन को चिकन फीड यानी पशु आहार की खेप में छिपाकर घरेलू स्तर पर ट्रांसपोर्ट किया जा रहा था. यह तरीका इसलिए अपनाया गया ताकि जांच एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके. आमतौर पर कृषि आधारित सामानों की जांच कम होती है, जिसका फायदा उठाने की कोशिश की गई. हालांकि DRI की खुफिया जानकारी के आगे यह चाल भी नाकाम साबित हुई.
खुफिया सूचना पर कार्रवाई
DRI को इस ड्रग मूवमेंट को लेकर पहले से पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी. इसी इनपुट के आधार पर टीमों को अलर्ट पर रखा गया. अधिकारियों ने संभावित रूट्स और वाहनों की पहचान की. लगातार निगरानी के बाद सही समय पर कार्रवाई को अंजाम देने की योजना बनाई गई. इस ऑपरेशन में तकनीकी सर्विलांस और जमीनी इंटेलिजेंस दोनों की अहम भूमिका रही.
राजस्थान में रोका गया ट्रक
खुफिया सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने राजस्थान में एक ट्रक को रोका. ट्रक में दिखने में कृषि आधारित सामान यानी चिकन फीड लदा हुआ था. शुरुआती तौर पर यह एक सामान्य मालवाहक वाहन लग रहा था. लेकिन जब ट्रक की गहन तलाशी ली गई, तो सच्चाई सामने आ गई. चिकन फीड की बोरियों के भीतर बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन छिपाकर रखा गया था.
270 किलो मेफेड्रोन बरामद
तलाशी के दौरान कुल 270 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया. यह मात्रा अब तक की बड़ी घरेलू जब्तियों में से एक मानी जा रही है. बरामद नशीले पदार्थ की कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में लगभग 81 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इतनी बड़ी खेप यह साबित करती है कि सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था. इसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था.
मौके से ड्राइवर गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान ट्रक ड्राइवर को मौके से हिरासत में लिया गया. इसके अलावा, खेप की निगरानी कर रहे और उसे सुरक्षित पहुंचाने वाले अन्य लोग भी पकड़े गए. ये सभी लोग सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क का हिस्सा थे. पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई. यहीं से पूरे सिंडिकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं
हरियाणा में फॉलो-अप सर्च ऑपरेशन
राजस्थान में बरामदगी के बाद DRI ने तुरंत फॉलो-अप कार्रवाई शुरू की. इसके तहत हरियाणा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. इन छापों के दौरान सिंडिकेट के अन्य अहम सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. ये आरोपी न सिर्फ सप्लाई बल्कि निर्माण से भी जुड़े हुए थे. इससे साफ हो गया कि मामला सिर्फ तस्करी का नहीं, बल्कि अवैध उत्पादन का भी है.
अवैध ड्रग फैक्ट्री का खुलासा
हरियाणा में की गई तलाशी के दौरान एक डिसमेंटल की गई अवैध ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भी पता चला. यहां से कुछ कच्चा माल बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल मेफेड्रोन बनाने में किया जाता था. इससे यह स्पष्ट हुआ कि सिंडिकेट स्थानीय स्तर पर नशे का उत्पादन कर रहा था. बाद में इसे अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाता था.
छह राज्यों में फैले नेटवर्क की पुष्टि
इस पूरे ऑपरेशन में DRI ने छह अहम आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में यह सामने आया कि यह सिंडिकेट कई राज्यों में फैला हुआ था. निर्माण, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई... हर स्तर पर अलग-अलग लोग जुड़े थे. यही वजह है कि इसे एक संगठित और मल्टी-ज्यूरिस्डिक्शनल नेटवर्क माना जा रहा है. जांच एजेंसियां अब इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक भी खंगाल रही हैं.
चुनौती भरा ऑपरेशन
यह ऑपरेशन DRI के लिए लॉजिस्टिक तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था. कई राज्यों में एक साथ टीमों की तैनाती की गई. आपसी तालमेल और सटीक टाइमिंग के बिना यह संभव नहीं था. अधिकारियों को लगातार मूवमेंट पर नजर रखनी पड़ी. आखिरकार सटीक योजना और अनुभव के दम पर यह कार्रवाई सफल रही.
अब तक छह फैक्ट्रियों का भंडाफोड़
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में DRI अब तक छह अवैध ड्रग फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ कर चुकी है. इनमें मेफेड्रोन, अल्प्राजोलम और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स का निर्माण हो रहा था. यह आंकड़ा बताता है कि एजेंसी लगातार इस नेटवर्क पर शिकंजा कस रही है. अलग-अलग राज्यों में फैली इन फैक्ट्रियों से करोड़ों की ड्रग्स जब्त की गई हैं.
मेफेड्रोन फैक्ट्रियों पर एक्शन
मेफेड्रोन बनाने वाली अवैध फैक्ट्रियों पर अप्रैल 2025 में लातूर, अगस्त 2025 में भोपाल और दिसंबर 2025 में वर्धा में कार्रवाई की गई. इन सभी मामलों में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और कच्चा माल जब्त किया गया. इससे साफ है कि यह ड्रग देश के अलग-अलग हिस्सों में बनाई जा रही थी. DRI की कार्रवाई से इस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है.
अन्य ड्रग्स पर भी शिकंजा
इसके अलावा अल्प्राजोलम की फैक्ट्रियां नवंबर 2025 में वापी और अक्टूबर 2025 में हैदराबाद में पकड़ी गईं. वहीं, मेथामफेटामाइन की अवैध फैक्ट्री अक्टूबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में सामने आई थी. ये सभी ड्रग्स युवाओं और समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं. DRI की इन कार्रवाइयों ने ड्रग माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है.
‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प की ओर
DRI ने दोहराया है कि वह ड्रग्स के निर्माण और तस्करी के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा. नशीले पदार्थ न सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ढांचे के लिए भी गंभीर खतरा हैं. ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एजेंसी इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई पर जोर दे रही है. आने वाले समय में भी ऐसे नेटवर्क्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
दिव्येश सिंह