कारोबारी का अपहरण, 20 लाख फिरौती और खाकी पर दाग... हैरान कर देगी यूपी पुलिस के दो दारोगाओं की करतूत

मेरठ के लोहिया नगर थाने में तैनात दो सब-इंस्पेक्टरों पर एक धागा व्यापारी के अपहरण का संगीन इल्जाम है. उन दोनों पर कारोबारी से 20 लाख रुपये की उगाही करने का आरोप भी है. जब मामले की गुप्त जांच की गई तो आरोप सही पाए गए. पढ़ें वर्दी वाले गुंड़ों की पूरी कहानी.

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अब पुलिस दोनों सब इंस्पेक्टरों को तलाश कर रही है (फोटो-ITG) अब पुलिस दोनों सब इंस्पेक्टरों को तलाश कर रही है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • मेरठ,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

Meerut Police Extortion Case: मेरठ के लोहिया नगर थाने से एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने पुलिस महकमे को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. आरोप है कि वहां तैनात दो सब-इंस्पेक्टरों ने एक धागा व्यापारी का अपहरण कर उससे 20 लाख रुपये की उगाही कर डाली. यह मामला सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. जिस खाकी से सुरक्षा की उम्मीद होती है, उसी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. मामला इतना संगीन था कि वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत दखल देना पड़ा.

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गुप्त जांच में खुली पोल
सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) अविनाश पांडेय को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी कि एक कारोबारी से पुलिसकर्मियों ने अवैध उगाही की है. सूचना गंभीर थी, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया गया. शहर पुलिस अधीक्षक ने व्यापारी को बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. हर तथ्य को बारीकी से परखा गया. इसके बाद गोपनीय जांच के आदेश दिए गए. जांच में जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया.

दो सब-इंस्पेक्टरों की करतूत
जांच में साफ हुआ कि लोहिया नगर थाने में तैनात दो सब-इंस्पेक्टर इस साजिश में शामिल थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों की पहचान महेश और लोकेन्द्र साहू के रूप में हुई है. दोनों 2023 बैच के अधिकारी बताए जा रहे हैं. आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई. हालांकि कार्रवाई से पहले ही दोनों फरार हो गए. अब पुलिस उनकी तलाश में जुटी है.

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धागा व्यापारी ऐसे बना निशाना
पीड़ित रासिक लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र का निवासी है, वह धागे का व्यापारी है. उसका कारोबार दुबई तक फैला हुआ है. पुलिस के मुताबिक, जमीन की बिक्री से बड़ी रकम मिलने की सूचना इन अधिकारियों तक पहुंची थी. इसी लालच में व्यापारी को निशाना बनाया गया. आरोप है कि उसे अगवा कर फर्जी गोल्ड स्मगलिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई. डर के साये में उससे 20 लाख रुपये वसूले गए.

20 लाख के बाद मांगे थे और 10 लाख
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. 20 लाख रुपये लेने के बाद भी दोनों सब-इंस्पेक्टरों का लालच कम नहीं हुआ. उन्होंने व्यापारी से अतिरिक्त 10 लाख रुपये की और मांग कर दी. व्यापारी को जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई. यह दबाव इतना बढ़ा कि व्यापारी ने अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने का फैसला किया. यहीं से कहानी ने नया मोड़ ले लिया.

दोनों के खिलाफ ऐसे मिला सबूत
जांच टीम ने तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली. मोबाइल फोन की लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. जांच में पुष्टि हुई कि व्यापारी और दोनों सब-इंस्पेक्टर एक ही स्थान पर मौजूद थे. यह सबूत मामले की कड़ी साबित हुए. तकनीकी प्रमाणों ने आरोपों को मजबूती दी. इसके बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाए.

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15 लाख बरामद
पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों सब-इंस्पेक्टरों से 15 लाख रुपये बरामद किए. यह रकम कथित उगाही की बताई जा रही है. लेकिन कहानी ने फिर करवट ली. बाकी रकम लाने का बहाना बनाकर दोनों मौके से फरार हो गए. अब पुलिस टीमें उनकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं. विभाग के लिए यह मामला बड़ी चुनौती बन गया है.

BNS की धाराओं में दर्ज केस
दोनों फरार सब-इंस्पेक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) और 308(6) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. ये धाराएं किसी व्यक्ति को मौत या गंभीर चोट के डर से उगाही करने और झूठे आरोप में फंसाने की धमकी से संबंधित हैं. मामला दर्ज होते ही पुलिस महकमे में सख्ती का संदेश दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है.

थानाध्यक्ष की भूमिका भी जांच के दायरे में
एसएसपी अविनाश पांडेय ने स्पष्ट किया कि लोहिया नगर थाने के प्रभारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है. यह देखा जा रहा है कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम में उनकी जानकारी या लापरवाही तो शामिल नहीं थी. विभाग इस मामले को उदाहरण बनाना चाहता है. संदेश साफ है खाकी की आड़ में गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फरार अधिकारी कब तक कानून से बच पाते हैं.

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