कर्ज का बोझ, सरेआम बेइज्जती और खौफनाक फैसला... परेशान दंपती ने बेटे समेत दे दी जान, बैंक कर्मचारियों पर गंभीर आरोप

लखनऊ के बंथरा इलाके में कर्ज के दबाव और कथित बैंक कर्मचारियों की बेइज्जती से परेशान होकर एक दंपती और उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली. इस दर्दनाक वारदात के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. लोग इस केस में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. जानें क्या है पूरा मामला.

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लखनऊ पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है (फोटो-ITG) लखनऊ पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है (फोटो-ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

लखनऊ के बंथरा इलाके में मौजूद नीवां गांव में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब एक ही घर से तीन अर्थियां उठीं. वहां मौजूद हर चेहरा बस एक ही सवाल पूछ रहा था कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक पूरा परिवार खत्म हो गया? शुरुआत में मामला संदिग्ध आत्महत्या का लगा, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलीं, कहानी कर्ज, दबाव और बेइज्जती की दर्दनाक दास्तान में बदलती चली गई. इस घटना ने न सिर्फ गांव, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है.

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ये कहानी है रूपनारायण, उनकी पत्नी तारावती और बेटे संदीप की. आरोप है कि इन तीनों ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली. पीछे छूट गया उनका दूसरा बेटा कुलदीप, जो अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है. कुलदीप का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि मजबूरी में उठाया गया आखिरी कदम है. उसने आशियाना चौराहा स्थित एक निजी बैंक के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. तहरीर में कहा गया है कि लगातार लोन की वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा था.

कुलदीप के मुताबिक, 28 नवंबर 2023 को रूपनारायण ने होटल चलाने के लिए 5 लाख 30 हजार 450 रुपये का लोन लिया था. समय के साथ यह रकम घटकर 5 लाख 18 हजार 670 रुपये बकाया रह गई थी. परिवार का कहना है कि मां तारावती की तबीयत खराब थी, इसलिए उन्होंने बैंक से कुछ समय मांगा था. लेकिन आरोप है कि राहत देने के बजाय बैंक कर्मचारियों ने सख्ती दिखाई. घर पर नोटिस चस्पा कर दिया गया, जिससे परिवार और ज्यादा दबाव में आ गया.

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परिजनों के आरोप यहीं नहीं रुकते. उनका कहना है कि 19 मार्च को बैंक कर्मचारी रूपनारायण की पान की दुकान पर पहुंचे. वहां कथित तौर पर उन्हें सबके सामने अपमानित किया गया. लोगों के बीच हुई इस बेइज्जती ने परिवार को अंदर तक तोड़ दिया. इसके साथ ही मकान नीलाम करने की धमकी भी दी गई. यही वो पल था, जब रूपनारायण और उनका परिवार पूरी तरह टूट गया और जिंदगी से हार मान बैठा.

गांव में उस रात का मंजर आज भी लोगों को सिहरन दे जाता है. बताया जा रहा है कि तीनों घर लौटे और कुछ ही देर बाद जहरीला पदार्थ खा लिया. जब तक किसी को भनक लगती, बहुत देर हो चुकी थी. इस घटना ने बैंक रिकवरी के तौर-तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या वसूली के नाम पर किसी की इज्जत और मानसिक स्थिति को इस हद तक चोट पहुंचाई जा सकती है? यही सवाल अब हर किसी के मन में है.

मामला अब सिर्फ एक परिवार की मौत तक सीमित नहीं रहा. सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि बैंक के कौन-कौन कर्मचारी घर और दुकान पर पहुंचे थे और उन्होंने क्या कहा था? फिलहाल पुलिस सबूत जुटा रही है और आरोपियों से पूछताछ की तैयारी में है. 

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