खुद को कागजों में मृत दिखाकर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से ऐंठ लिए लाखों रुपये, पूर्व सैनिक और पत्नी पर FIR

दिल्ली में एक पूर्व सैनिक ने पत्नी के साथ मिलकर खुद को कागजों में मृत दिखाया और आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से 3 लाख से ज्यादा रुपये का क्लेम हासिल कर लिया. जांच में खुलासा होने के बाद वसंत विहार थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज हुआ है. पढ़ें ये हैरान करने वाली कहानी.

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पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है (फोटो-ITG) पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है (फोटो-ITG)

हिमांशु मिश्रा / अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

दिल्ली में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भारतीय सेना के एक पूर्व सैनिक ने खुद को कागजों में मृत दिखाकर लाखों रुपये का बीमा क्लेम हासिल कर लिया. इस पूरी साजिश में उसकी पत्नी भी बराबर की भागीदार बताई जा रही है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर सेना के आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से धोखाधड़ी की और फर्जी दस्तावेजों के सहारे पैसे हासिल कर लिए. अब इस मामले में अदालत के आदेश पर दिल्ली के वसंत विहार थाने में केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है.

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पूर्व सैनिक की हैरान करने वाली साजिश
भारतीय सेना के एक पूर्व जवान ने सरकारी पैसे हड़पने के लिए बेहद चौंकाने वाली साजिश रची. उसने खुद को कागजों में मृत दिखाकर बीमा की रकम हासिल कर ली. इस साजिश में उसकी पत्नी ने भी पूरा साथ दिया. मामला सामने आने के बाद सेना के अधिकारी भी हैरान रह गए. आरोपियों ने योजना बनाकर ऐसा जाल बुना कि शुरुआत में किसी को शक तक नहीं हुआ. लेकिन बाद में एक छोटी सी जानकारी ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया. अब पुलिस इस मामले में विस्तृत जांच कर रही है.

बिहार रेजिमेंट में था तैनात
एफआईआर के मुताबिक अखिलेश कुमार नाम का यह जवान बिहार रेजिमेंट में तैनात था. वह साल 1998 में सेना में भर्ती हुआ था और करीब 12 साल 8 महीने तक सेवा देने के बाद 2010 में रिटायर हो गया. चूंकि उसकी सेवा अवधि पूरी नहीं थी, इसलिए उसे पेंशन का लाभ नहीं मिला. रिटायरमेंट के बाद वह बिहार स्थित अपने गांव लौट आया. इसी दौरान उसने अपनी पत्नी ज्ञानती देवी के साथ मिलकर सरकारी पैसे हड़पने की योजना बनाई.

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पत्नी को बनाया नॉमिनी
सेना में नौकरी के दौरान अखिलेश कुमार ने अपने बीमा से जुड़े दस्तावेजों में पत्नी ज्ञानती देवी को नॉमिनी बनाया हुआ था. यही बात बाद में इस साजिश की सबसे अहम कड़ी बनी. रिटायरमेंट के बाद दोनों ने सोचा कि अगर अखिलेश को कागजों में मृत दिखा दिया जाए तो बीमा की रकम मिल सकती है. इसी सोच के साथ दोनों ने मिलकर पूरी योजना तैयार की. इसके बाद मौत का झूठा दावा करने की तैयारी शुरू कर दी गई.

मौत की झूठी कहानी गढ़ी
साल 2011 में ज्ञानती देवी ने सेना को सूचना दी कि उनके पति अखिलेश कुमार की मौत 17 सितंबर 2011 को बिजली का करंट लगने से हो गई है. इस सूचना के साथ उन्होंने संबंधित दस्तावेज भी जमा कराए. पहली नजर में यह मामला सामान्य लगा और अधिकारियों को किसी तरह का शक नहीं हुआ. यही वजह रही कि बीमा क्लेम की प्रक्रिया आगे बढ़ गई. लेकिन असल में यह पूरी कहानी एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी.

फर्जी दस्तावेजों का सहारा
बीमा की रकम हासिल करने के लिए आरोपियों ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए. इनमें ग्राम पंचायत से जारी किया गया कथित मृत्यु प्रमाणपत्र भी शामिल था. इसके अलावा एक एफिडेविट और अन्य कागजात भी जमा कराए गए. इन दस्तावेजों को देखकर ऐसा लगा जैसे अखिलेश की वास्तव में मौत हो चुकी है. इसी आधार पर बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी की गई. बाद में जांच में सामने आया कि ये सभी दस्तावेज जाली थे.

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क्लेम पास, खाते में पहुंचे लाखों
जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर जून 2013 में बीमा क्लेम पास कर दिया गया. इसके तहत 3 लाख रुपये की राशि सीधे ज्ञानती देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई. इतना ही नहीं, भुगतान में देरी होने के कारण उन्हें 21,750 रुपये का अतिरिक्त ब्याज भी दिया गया. इस तरह कुल मिलाकर लाखों रुपये आरोपियों ने हासिल कर लिए. उस समय तक किसी को इस धोखाधड़ी का अंदाजा भी नहीं था.

ऐसे खुला फर्जी मौत का राज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार के जहानाबाद में एक पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. गांव के एक व्यक्ति को पता चला कि सेना के दस्तावेजों में अखिलेश को मृत बताया गया है. जबकि वह वास्तव में जिंदा है और गांव में रह रहा है. यह जानकारी धीरे-धीरे सेना के अधिकारियों तक पहुंची. इसके बाद पुलिस की जांच में पुष्टि हुई कि अखिलेश कुमार जिंदा है और ये पूरा मामला धोखाधड़ी का है.

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR
मामले का खुलासा होने के बाद आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड के अधिकारियों ने अदालत का रुख किया. कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली के वसंत विहार थाने में अखिलेश कुमार और उसकी पत्नी ज्ञानती देवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. दोनों पर धोखाधड़ी और जालसाजी की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जाली प्रमाणपत्र कैसे जारी हुआ?

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इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है. जिनमें धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और धारा 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना) शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं.

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