जनकपुरी हादसा: सब-कॉन्ट्रैक्टर की जमानत खारिज, कोर्ट ने पुलिस से मांगा CCTV फुटेज

जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर बैंक कर्मचारी की मौत के मामले में दिल्ली की अदालत ने सब-कॉन्ट्रैक्टर की जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को अहम बताते हुए जांच में दखल की आशंका जताई. इसके साथ ही गैर-कानूनी हिरासत के आरोप पर पुलिस से सीसीटीवी फुटेज तलब की है.

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बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी की गड्ढे में गिरने की वजह से मौत हो गई थी. (File Photo: ITG) बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी की गड्ढे में गिरने की वजह से मौत हो गई थी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:02 PM IST

दिल्ली के जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर 25 साल के बाइकर की मौत के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. बुधवार को दिल्ली की अदालत ने आरोपी सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार प्रजापति की रेगुलर जमानत याचिका खारिज कर दी. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरजोत सिंह औजला ने कहा कि अपराध की गंभीरता और उसके समाज पर असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

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कोर्ट ने साफ कहा कि इस स्टेज पर मिनी ट्रायल की जरूरत नहीं है, लेकिन पहली नजर में सुरक्षा उपायों और सुपरवाइजरी जिम्मेदारी में गंभीर कमियां दिखती हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है. जांच अधिकारी परमिशन, सुरक्षा नियमों के पालन, बैरिकेडिंग की व्यवस्था, मौके पर लोगों की तैनाती और जिम्मेदारी के मैट्रिक्स से जुड़े अहम रिकॉर्ड जुटा रहे हैं.

कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन आरोपों की गंभीरता, जांच की स्थिति और जांच में दखल की आशंका को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा. जज ने कहा कि जरूरी गवाहों, खासकर प्रोजेक्ट से जुड़े स्थानीय लोगों, मजदूरों या अधिकारियों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही डॉक्यूमेंट्री सबूतों पर खतरा जताया.

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कोर्ट ने यह भी कहा कि बेल नियम है और जेल अपवाद, लेकिन इस सिद्धांत को हर मामले के तथ्यों के आधार पर समझदारी से लागू किया जाना चाहिए. सार्वजनिक कार्यों में लापरवाही से जान जाने के मामलों में अदालत को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज के हित, इसके साथ ही निष्पक्ष और बिना दबाव वाली जांच के बीच संतुलन बनाना होता है. हालांकि, अदालत ने आरोपी की एक दलील पर फैसला सुरक्षित रखा.

इसमें कहा गया है कि उसकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी और असंवैधानिक थी. सब-कॉन्ट्रैक्टर के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को 6 फरवरी को हिरासत में लिया गया था, लेकिन 8 फरवरी को कोर्ट में पेश किया गया. यह संविधान के अनुच्छेद 22(2) और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के प्रावधान का उल्लंघन है. इस पर कोर्ट ने जांच अधिकारी को जरूरी निर्देश दिया.

इसमें कहा गया कि 6 से 8 फरवरी के बीच संबंधित पुलिस स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज और आरोपी के आने-जाने के समय का स्पष्ट ब्योरा दाखिल किया जाए. गैर-कानूनी हिरासत से जुड़ी याचिका पर अब 16 फरवरी को सुनवाई होगी. इससे पहले मंगलवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को FIR के संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.

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गौरतलब है कि 5 और 6 फरवरी की दरमियानी रात को रोहिणी स्थित एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाले कमल ध्यानी अपनी बाइक से घर लौट रहे थे. वेस्ट दिल्ली के जनकपुरी इलाके में वह दिल्ली जल बोर्ड के सीवर प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए करीब 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गए. हादसे में उनकी मौत हो गई. इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है. दिल्ली पुलिस ने सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति और मजदूर योगेश को गिरफ्तार किया है. दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उन पर आरोप है कि उसने बाइकर के गड्ढे में गिरने की जानकारी छिपाई और पुलिस तथा इमरजेंसी रिस्पॉन्स में देरी की थी. योगेश पर आरोप है कि उसने घटना की जानकारी नहीं दी थी.

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