ऑनलाइन जॉब दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली में ऑनलाइन जॉब फ्रॉड रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है. यहां फर्जी वेबसाइट से लोगों को नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. ये गिरोह अब तक कई लोगों से हजारों रुपए वसूल चुका है. इस गिरोह का मास्टरमाइंड अभी फरार है.

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फर्जी वेबसाइट के जरिए नौकरी का सपना दिखाकर लोगों को लूट लेते थे. (Photo: Representational) फर्जी वेबसाइट के जरिए नौकरी का सपना दिखाकर लोगों को लूट लेते थे. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

दिल्ली में नौकरी का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये लोगों से Steps4Career.com नामक वेबसाइट के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ऐंठ लेते थे. आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक और कई सिम कार्ड बरामद किए गए हैं.

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डीसीपी (आउटर नॉर्थ) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गढ़ी निवासी मोहम्मद अकबर (32) और द्वारका निवासी रूपेंद्र कुमार (36) के रूप में हुई है. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि रूपेंद्र पहले से डकैती के दो मामलों में शामिल रहा है. इस गिरोह के बारे में तब पता चला जब रोहिणी निवासी एक महिला ने अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई. 

महिला ने आरोप लगाया कि Steps4Career.com नाम की एक वेबसाइट के जरिए उस नौकरी दिलाने की बात कही गई. उस वेबसाइट के एक प्रतिनिध ने उससे संपर्क किया. रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज सत्यापन शुल्क के तौर पर उससे 39498 रुपए की मांग की गई. महिला ने उसके बताए गए बैंक खाते में पूरे पैसे ट्रांसफर कर दिए. लेकिन बाद में उसे पता चला कि ठगी की गई है.

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पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दिया. बैंक खातों की जांच में पता चला कि ठगी की गई रकम दो खातों में ट्रांसफर की गई थी. एक बैंक खाता अकबर के नाम पर था, जबकि दूसरा संजय अहिरवाल के नाम पर. पुलिस ने तकनीकी निगरानी और बैंक ट्रेल के जरिए अकबर तक पहुंच बनाई. 

उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस की पूछताछ में अकबर ने अपने दो साथियों रूपेंद्र कुमार और संजय अहिरवाल के नाम बताए. उसने खुलासा किया कि यह पूरा गिरोह प्रद्युम्न पांडे नामक एक शख्स के इशारे पर काम करता था, जो इस ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड है. रूपेंद्र एक समन्वयक की भूमिका में था और 10 प्रतिशत कमीशन के बदले स्थानीय संपर्कों से बैंक खाते उपलब्ध कराता था. 

अकबर उन खातों में ठगी की राशि मंगवाता था, जिसे बाद में कई माध्यमों से निकालकर आगे भेज दिया जाता था. इस तरह पुलिस जांच के दौरान कोई सुराग हाथ नहीं लगता था. पुलिस इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है. मास्टरमाइंड प्रद्युम्न पांडे के लिए एक खास टीम गठित की गई है. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय साइबर ठग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.

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