दिल्ली पुलिस ने इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट बेनकाब किया है. इस सिंडिकेट के एक अहम सदस्य को गोवा के मोपा एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही अब तक 17 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. आरोपी दुबई से ऑपरेट कर रहा था. 61.72 लाख की ठगी के मामले में वॉन्टेड इस शख्स की गिरफ्तारी से कई राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
आरोपी की पहचान रोनक जगदीश भाई ठक्कर के रूप में हुई है. उसे 5 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था. साल 2024 में दर्ज एक केस में वो वॉन्टेड था. इसके साथ ही दुबई से इस इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था. इसके लिए भारत में म्यूल बैंक अकाउंट अरेंज करने का काम किया करता था.
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी एक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित ने बताया कि मेसर्स ग्लोब कैपिटल मार्केट लिमिटेड के प्रतिनिधि बनकर ठगों ने उससे 61.72 लाख रुपए ठग लिए. उसे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया. एक फेक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट के लिए कहा गया.
पीड़ित शख्स को शुरुआत में बड़े रिटर्न का लालच दिया गया, लेकिन जब वो अपनी रकम नहीं निकाल सका और उसे एप्लीकेशन के फर्जी होने का शक हुआ, तब उसने पुलिस से संपर्क किया. जांच में सामने आया कि ठगी की रकम जूनागढ़ स्थित महादेव एंटरप्राइजेज और श्रीनगर की न्यू सदीकीन जैसी शेल कंपनियों से जुड़े बैंक अकाउंट में पहुंची थी.
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) आदित्य गौतम ने बताया कि इसके बाद पैसा कई राज्यों में फैले म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया, जिनमें मुंबई और सूरत से जुड़ी कंपनियों के खाते भी शामिल थे. यह एक संगठित इंटरस्टेट नेटवर्क है, जिसमें शेल कंपनियां, नकली MSME डॉक्यूमेंट, फर्जी रबर स्टैम्प और SIM कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था.
इन सबके जरिए असली फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन की नकल कर लोगों का भरोसा जीता जाता था. अब तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 81 SIM कार्ड, 24 मोबाइल फोन, नकली स्टैम्प, MSME डॉक्यूमेंट, चेक बुक, CPU और कई डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं. पुलिस को जांच के दौरान अहमदाबाद से जारी SIM कार्ड के दुरुपयोग का सुराग मिला.
यह भी पता चला कि एक ही POS वेंडर के जरिए कई SIM कार्ड लिए गए थे. इसके बाद पुलिस ने अहमदाबाद, मुंबई और सूरत में एक साथ छापेमारी की, जिससे कई गिरफ्तारियां संभव हो सकीं. पुलिस का कहना है कि साइबर सिंडिकेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को ज्यादा रिटर्न और VIP स्टॉक टिप्स का लालच देता था.
पीड़ितों को नामी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन जैसे दिखने वाले नकली व्हाट्सऐप ग्रुप्स में जोड़ा जाता था, जहां मनगढ़ंत सक्सेस स्टोरी साझा कर भरोसा बनाया जाता था. इसके बाद उन्हें नकली ट्रेडिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करवाकर पैसा शेल कंपनियों और म्यूल अकाउंट्स के जरिए घुमाया जाता था. पैसो को क्रिप्टोकरेंसी या हवाला चैनलों के जरिए आगे भेजा जाता था.
इससे इंटरनेशनल साइबर क्राइम लिंक की आशंका गहराती है. रोनक जगदीश भाई ठक्कर सिंडिकेट के किंगपिन कृष हसमुख भाई शाह के लिए कमीशन पर अकाउंट अरेंज करता था. कृष शाह को इस मामले में भगोड़ा घोषित किया गया है. पुलिस का कहना है कि मनी ट्रेल, इंटरनेशनल कनेक्शन और अन्य साथियों की तलाश के लिए जांच अभी जारी है.
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