5 लाख लगाओ, 3 करोड़ पाओ... ऐसे धोखाधड़ी के जाल में फंसे हजारों लोग, IT प्रोफेशनल भी शामिल

हैदराबाद में मल्टी-लेवल मार्केटिंग धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है. हैदराबाद पुलिस ने इस मामले में 32 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें 11 महिलाएं भी शामिल हैं. पुलिस लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही है.

Advertisement
हैदराबाद में मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटाले का पर्दाफाश, 32 आरोपी गिरफ्तार, 11 महिलाएं भी शामिल. (Photo: Representational) हैदराबाद में मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटाले का पर्दाफाश, 32 आरोपी गिरफ्तार, 11 महिलाएं भी शामिल. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • हैदराबाद,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

हैदराबाद में मल्टी-लेवल मार्केटिंग फ्रॉड को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. यहां QNet से जुड़े नेटवर्क के जरिए हजारों लोगों को निवेश के नाम पर फंसाया गया. पुलिस ने 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल मोटे रिटर्न के लालच और नए लोगों को जोड़ने की चेन पर टिका था.

पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने बताया कि पूरा नेटवर् विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के जरिए संचालित हो रहा था. ये QNet ब्रांड के तहत काम करता था. इस कार्रवाई को हैदराबाद पुलिस के सेंट्रल क्राइम स्टेशन की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अंजाम दिया. 

Advertisement

SIT ने 30 टीमें बनाकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की थी. कंपनी ई-कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग की आड़ में अवैध निवेश योजनाएं चला रही थी. लोगों को 5 से 10 लाख रुपए लगाने के लिए कहा जाता था. 2 साल में 3-4 करोड़ कमाने का दावा किया जाता था.

पुलिस की जांच में सामने आया कि असली रिटर्न की जगह पीड़ितों को कुछ प्रोडक्ट भेज दिए जाते थे, जिन्हें गिफ्ट बताया जाता था. आरोपियों ने खास तौर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बेरोजगार युवा, कारोबारी और गृहिणियों को टारगेट किया. उनको पार्ट-टाइम जॉब के झांसे में बुलाकर होटलों में मीटिंग करवाई.

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क बाइनरी प्लान पर चलता था, जिसमें हर सदस्य को दो नए लोगों को जोड़ना होता था. इस तरह 1+2+4+8 की चेन बनती जाती थी. सभी सदस्यों को स्वतंत्र प्रतिनिधि कहा जाता था. ऊपर वालों को अपलाइनर्स और नए जुड़े लोगों को डाउनलाइनर्स बताया जाता था.

Advertisement

पुलिस के मुताबिक, यह मॉडल असल में प्रोडक्ट सेलिंग के बजाय नए लोगों की भर्ती पर आधारित था, जो कि अवैध मनी सर्कुलेशन स्कीम की श्रेणी में आता है. पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के कुरियाचन चाको बनाम केरल राज्य (2008) फैसले का हवाला दिया. इसमें ऐसी स्कीमों को असंभव बताया गया था.

इसके संबंध में चार दर्ज मामलों में अब तक 11 पीड़ितों से पूछताछ हुई है, जिसमें करीब 75 लाख रुपए के नुकसान की पुष्टि हुई है. पुलिस को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क का दायरा देशभर में हजारों करोड़ रुपए तक फैला हो सकता है. गिरफ्तार आरोपियों में कई IT प्रोफेशनल शामिल हैं.

ये लोगों को जोड़ने, ट्रेनिंग देने और स्कीम को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे. फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी निवेश स्कीम में शामिल होने से पहले पूरी जांच करें. उन्होंने साफ किया है कि कानून के तहत ऐसी स्कीम चलाना अपराध है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement