कोई बचना नहीं चाहिए, ओवर एंड आउट...

31 अक्तूबर की सुबह जिस वक्त भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के आठ विचाराधीन आतंकवादियों का एनकाउंटर चल रहा था तब भोपाल पुलिस कंट्रोल रूम में जबरदस्त गहमागमी थी. एसपी रैंक का एक अफसर खुद कंट्रोल रूम में बैठ कर वायरलेस सेट से पुलिस टीम को ऑर्डर दे रहा था. पुलिस कंट्रोल रूम की उस बातचीत का ऑडियो वारदात टीम के पास है. इस बातचीत को सुनने के बाद साफ हो जाता है कि भोपाल पुलिस ने पहले से तय कर रखा था कि उन आठों में से एक को भी ज़िंदा नहीं पकड़ना है.

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वारदात वारदात

शम्स ताहिर खान

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 12:28 AM IST

31 अक्तूबर की सुबह जिस वक्त भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के आठ विचाराधीन आतंकवादियों का एनकाउंटर चल रहा था तब भोपाल पुलिस कंट्रोल रूम में जबरदस्त गहमागमी थी. एसपी रैंक का एक अफसर खुद कंट्रोल रूम में बैठ कर वायरलेस सेट से पुलिस टीम को ऑर्डर दे रहा था. पुलिस कंट्रोल रूम की उस बातचीत का ऑडियो वारदात टीम के पास है. इस बातचीत को सुनने के बाद साफ हो जाता है कि भोपाल पुलिस ने पहले से तय कर रखा था कि उन आठों में से एक को भी ज़िंदा नहीं पकड़ना है. बल्कि उन सभी का काम तमाम करना है.

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पुलिस कंट्रोल रूम के ऑडियो को सुनने के बाद इस बात को लेकर कोई शक या सवाल नहीं रह जाता है कि ने पहले से ही ठान लिया था कि जेल से भागे आठों आरोपियों को मार डालना है. पुलिस ने पहले ही तय कर लिया था कि इनमें से एक को भी जिंदा नहीं पकड़ना है. इस ऑडियो से ये भी पता चलता है कि ऑपरेशन में शामिल भोपाल पुलिस और दूसरी टीमें गलती से एक-दूसरे पर आमने सामने ही गोली चलाने लगे थे. लिहाजा बीच-बीच में बार-बार ये मैसेज आता है कि क्रॉस फायरिंग ना करें.

ऑडियो में जो सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है वो ये कि खत्म होने और आठों के मारे जाने के बाद भी पुलिस टीम लगातार फायरिंग करती जा रही थी. जबकि उन्हें फायरिंग रोकने के लिए बार-बार कंट्रोल रूम से हिदायत दी जा रही थी. फायरिंग कितने राउंड हुई ये तो पता नहीं मगर एनकाउंटर में मारे गए आठों विचाराधीन आतंकवादियों को कुल 25 गोलियां लगी थीं. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के मुताबिक इन 25 गोलियों में से सिर्फ एक गोली ऐसी थी जो एक के कमर के नीचे लगी थी. एक गोली एक के सिर में लगी. बाकी सारी की सारी गोलियां आठों के सीने और पेट पर लगी थीं.

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जाहिर है ऐसा तभी मुम्किन है जब गोली बेहद करीब से मारी जाए. जबकि एनकाउंटर में ऐसा मुम्किन नहीं होता. क्योंकि एनकाउंटर हमेशा दूर से होता है. जिससे शरीर में कहीं भी लग सकती हैं. जेल के सिर्फ एक खास हिस्से का सीसीटीवी कैमरा खऱाब था. जेल का सायरन ना बजना, सर्च लाइट टावर का अंधेरे में डूबे रहना, 70 में से 30 जेल स्टाफ का उसी रात छुट्टी पर होना. ऐसे कई सवाल हैं जो आठों वचाराधीन आरोपियों के जेल से फरारी और फिर एनकाउंटर के बाद से उठ रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस एनकाउंटर की जांच कराने से साफ इनकार कर दिया है.

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