...तो इसलिए परमाणु परीक्षण बंद करने के लिए राजी हुआ किम जोंग उन

वो सुरंग उत्तर कोरिया के तानाशाह मार्शल किम जोंग उन की उस न्यक्लियर साइट का एक नमूना है, जिसमें वो अब तक तमाम तरह के परमाणु बम बनाता आया है. लेकिन मई में अमेरिकी राष्ट़्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से पहले ही किम ने ये ऐलान कर दिया है कि अब वो और बम नहीं बनाएगा. किम के इस बदले रुख पर दुनिया हैरान थी, मगर अब जो सच सामने आया है वो कि परामणु बम बनाने वाले इस सुरंग में कुछ वक्त पहले एक ताकतवर ब्लास्ट हो गया था जिसकी वजह ये न्यूकलियर साइट पूरी तरह से ढह गई.

किम और ट्रंप की मुलाकात पर पूरी दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं
परवेज़ सागर/शम्स ताहिर खान
  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 1:12 PM IST

वो सुरंग उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की उस न्यक्लियर साइट का एक नमूना है, जिसमें वो अब तक तमाम तरह के परमाणु बम बनाता आया है. लेकिन मई में अमेरिकी राष्ट़्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से पहले ही किम ने ये ऐलान कर दिया है कि अब वो और बम नहीं बनाएगा. किम के इस बदले रुख पर दुनिया हैरान थी, मगर अब जो सच सामने आया है वो कि परामणु बम बनाने वाले इस सुरंग में कुछ वक्त पहले एक ताकतवर ब्लास्ट हो गया था जिसकी वजह ये न्यूकलियर साइट पूरी तरह से ढह गई. यानी कायदे से यहां अब किम बम बना ही नहीं सकता.

बदला बदला सा नज़र आता है किम

बाचतीच को तैयार है किम जोंग उन. परमाणु साइट खत्म करने को भी है राज़ी. यूएस के खिलाफ किम जीता या हार गया बाज़ी? क्या है किम की अगली रणनीति? क्यों किम ने रोका मिसाइलों का परीक्षण? क्या तानाशाह दुनिया को गुमराह कर रहा है? क्यों बदला बदला सा नज़र आ रहा है किम? ये सवाल इसलिए हैं क्योंकि अचानक उत्तर कोरिया का तानाशाह अमेरिका से बात को भी राज़ी हो गया है. और उसके कहने पर किम ने अपने मिसाइल परीक्षणों को भी रोक दिया है. और तो और दक्षिण कोरिया से भी उसका दोस्ताना बढ़ता जा रहा है.

कहानी कुछ और ही है!

अब ये तो मुमकिन लगता नहीं कि किम जोंग उन जैसा इंसान एक रात में तानाशाह से समाज सेवी हो जाए. लिहाज़ा कुछ तो है जिसने उसे अपनी पहली मोहब्बत. यानी हथियारों से अलग रहने के लिए मजबूर कर दिया है. कुछ जानकार मानते हैं कि देश की खस्ता आर्थिक स्थिति किम जोंग उन को अब इजाज़त नहीं देती कि वो और ज़्यादा हथियारों का परीक्षण करे. इसीलिए उसने अमेरिका की वो पेशकश मान ली है, जिसमें बातचीत के लिए उसे अपने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाना होगा. सुनने में तो ये अच्छा लग रहा है मगर किम के बदले किरदार की असली कहानी कुछ और है.

धमाके से न्यूक्लियर टेस्ट साइट बर्बाद

चीन के साइंसदानों के मुताबिक उत्तर कोरिया ने अमेरिका की ये पेशकश सिर्फ इसलिए मानी है क्योंकि पिछले साल एक ताकतवर बम ब्लास्ट के बाद उसकी अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट साइट काफी हद तक ढह गई थी. और अब ये साइट ना सिर्फ दुनिया की नज़र में है बल्कि यहां किसी तरह का कोई और टेस्ट किया भी नहीं जा सकता है. लिहाज़ा आम के आम और गुठलियों के दाम दोनों लेना चाहता है ये चालाक तानाशाह. और इसीलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात को देखते हुए उसने न्यूक्लियर टेस्ट और इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल लॉन्च पर रोक लगाने का फैसला कर दिया.

अमेरिका ने किम को फिर दी चेतावनी

मगर इस चीनी खुलासे के बाद अमेरिका ने किम को फिर चेताया है कि वो उसे भोला-भाला न समझे. और जब तक उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कायक्रमों को खत्म नहीं करता है, तब तक अमेरिका से किसी रियायत की उम्मीद न करे. अमेरिकी सरकार की प्रेस प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा कि अमेरिका इस प्रक्रिया में भोला-भाला रवैया नहीं अपनाएगा. हम उत्तर कोरिया को उसके शब्दों की तरह नहीं लेंगे. हमारा लक्ष्य प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त होते देखना है और हम अपना दबाव अभियान तब तक जारी रखेंगे, जब तक हम उत्तर कोरिया को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्ति की ओर ठोस कदम उठाते नहीं देख लेते.

चीनी वैज्ञानिकों ने खोली किम की पोल

जानकार मान रहे हैं कि अपनी पुरानी और खस्ता हो चुकी न्यूक्लियर साइट को बंद कर किम जोंग उन चोरी छुपे किसी दूसरी साइट के निर्माण का प्लान बना रहा था. ताकि उसे दुनिया का समर्थन भी मिलता रहे और उसकी हथियारों की सनक भी पूरी होती रहे. मगर चीनी वैज्ञानिकों ने किम का भांडा फोड़ कर दिया. चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी के वैज्ञानिकों और उनके रिसर्चरों के मुताबिक पिछले साल सितंबर में किए गए छठे परीक्षण का असर इतना ज़्यादा था कि परीक्षण के दौरान उसकी साइट का ज्यादातर हिस्सा बुरी तरह छतिग्रस्त हो गया. लिहाज़ा उसके वफादारों ने उसे सलाह दी कि यूं भी ये न्यूक्लियर साइट किसी काम की रही नहीं. इसलिए दुनिया को दिखाने के लिए वो इसे नष्ट कर राजनीतिक फायदा ले सकता है.

कहते हैं इसके बाद ही किम ने अमेरिकी प्रस्ताव को मानते हुए न्यूक्लियर साइट को खत्म करने का फैसला लिया.. और अब वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ मीटिंग कर अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाने की कोशिश में लगा हुआ है.

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