ये क्या हो रहा है? क्या लोगों का सब्र खत्म होता जा रहा है? क्या गुस्सा बेकाबू होता जा रहा है? क्या रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है? दिल्ली-एनसीआर में पारिवारिक मर्डर की घटनाएं दिल दहलाने वाली हैं. चिंता की बात ये है कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. सिर्फ महीने भर के अंदर दिल्ली, गुरूग्राम और गाजियाबाद में चार परिवार के 17 लोगों को उनके अपनों ने ही मौत के घाट उतार दिया.
गाजियाबाद में एक शख्स ने बीवी बच्चों का कत्ल कर दिया इसके बाद खुदकुशी कर ली. गुरुग्राम में कुछ दिन पहले एक केमिकल इंजीनियर ने बीवी और बच्चों की कत्ल करने के बाद खुदकुशी कर ली थी. वहीं महरौली में सरकारी स्कूल के एक टीचर ने अपनी बीवी और बच्चों का बेरहमी से कत्ल कर दिया. जरा सोचिए कि इन सब घटनाओं में एक बात कॉमन है कि परिवार के मुखिया ने ही इन वारदात को अंजाम दिया और मासूम बच्चों का कत्ल कर दिया.
किसी ने बीवी बच्चों पर खंजर चला दिया तो किसी ने गला घोंट डाला. और किसी ने अपनी मासूम बेटियों के मुंह और नाक पर टेप बांध कर अपने ही आशिय़ाने को श्मशान बना दिया. क्या माली तंगी. डिप्रेशन और मनमुटाव दूर करने का बस यही एक रास्ता बचा है?
गाजियाबाद के मसूरी में प्रदीप अपने परिवार के साथ रहता था. लेकिन 3 दिन पहले उसके कमरे में बेड पर चार लाशें पड़ी थीं. प्रदीप के अलावा उसकी तीन, पांच और आठ साल की तीन बेटियों की लाशें. तीनों बच्चियों के हाथ-पैर खुले थे. बस आंख से लेकर मुंह तक चार इंच की काली टेप चिपकी थी. टेप इस तरह लपेटी गई थी कि वो नाक या मुंह से सांस ही ना ले सकें. खुद प्रदीप ने भी अपने मुंह और नाक को उसी काली टेप से लपेट रखा था. पर सवाल ये है कि क्या कोई शख्स जिसके दोनों हाथ खुले हों सिर्फ मुंह और नाक पर टेप लपेट कर खुदकुशी कर सकता है?
एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली वारदात गुरूग्राम में हुई. एक अच्छा-खासा परिवार. बेहद पढ़ा-लिखा. अच्छी कंपनी में ऊंची तनख्वाह पर काम करने वाला. मगर एक रोज़ नौकरी पर आंच आ जाती है. कम तनख्वाह पर वो दूसरी नौकरी करता है. और फिर एक रोज़ अपने ही हाथों अपनी बीवी और बच्चों को खंजर से मार डालता है. फिर खुद भी खुदकुशी कर लेता है.
दरअसल, पूरी जिंदगी एक जैसी नहीं होती. अच्छा-बुरा दिन सभी के साथ आता है. माली हालत उसकी भी बिगड़ी. मगर आर्थिक तंगी उसकी जेब पर ही नहीं दिमाग पर भी असर कर गई. बस फिर क्या था. एक ही चाकू से उसने बीवी और तीन बच्चों को ज़िंदगी छीन ली. ये सारी घटनाएं इंसान के खत्म होते सब्र और बेकाबू होते गुस्से का नतीजा हैं.
परवेज़ सागर