...ऐसे रंग लाई ISIS के खिलाफ फालूजा की लड़ाई

इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी की अगुआई में फौज इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसूल की तरफ कूच कर चुकी है. ताकि वहां से भी दहशतगर्दों के इस काले झंडे को उखाड़ कर राष्ट्रीय झंडा फहराया जा सके.

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फालूजा की लड़ाई फालूजा की लड़ाई

सुरभि गुप्ता / शम्स ताहिर खान

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2016,
  • अपडेटेड 4:30 AM IST

कुछ दिन पहले ISIS के सरगना बगदादी की एक हमले में मौत की खबर आई थी, हालांकि उस खबर के बाद से ना तो बगदादी अब तक खुद सामने आया है और ना ही उसकी मौत की तसदीक हो पाई है.

कमजोर होता ISIS, आजाद होते शहर
यह खबर आने के बाद से ISIS कमजोर जरूर होता जा रहा है. रमादी, तिरकित और सिंजर जैसे इलाकों के बाद अब इराकी शहर फालूजा भी आईएसआईएस के हाथों से निकल गया है.

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ISIS के कब्जे से आजाद, ये शहर है फालूजा
इराक की राजधानी बगदाद से महज 65 किलोमीटर दूर मौजूद एक ऐसा शहर, जिस पर दुनिया के सबसे खौफनाक आतंकवादी संगठन ISIS ने सबसे पहले कब्जा किया था. लेकिन इराकी फौज, काउंटर टेररिज्म यूनिट, इराकी फेडरल पुलिस, अनबार प्रोवेंशियल पुलिस और मान्यता प्राप्त मिलिशियाओं के फाइटर्स ने आखिरकार हफ्ते भर की जंग के बाद वो कर दिखाया, जिसका इंतजार पूरी दुनिया को था और ये काम था फालूजा को ISIS के कब्जे से आजाद करवाना.

फालूजा की जश्न-ए-आजादी की कीमत
फालूजा ने इस दिन के लिए जो और जैसी कीमत चुकाई है, उसे याद कर इस शहर के लोग अब भी सिहर उठते हैं. दो सालों तक ये शहर हर रोज गोलियों की शोर के बीच सोता रहा. गोलियों की शोर के बीच ही जागता रहा. यहां आतंकवादियों का हुक्म ना मानने का सिर्फ एक ही मतलब मौत था और हुक्म मानने का मतलब तिल-तिल कर मरना था. हालात कुछ ऐसे हुए कि शहर में आतंकवादियों की सनक और फौजियों से चलते आमने-सामने की जंग में दसियों लोग अपनी जान गंवा बैठते और तकरीबन 85 हजार लोगों को अपने-अपने कुनबे की हिफाजत के लिए अपना ही घर-बार छोड़ कर खुद अपने मुल्क में विस्थापितों की जिंदगी जीनी पड़ी.

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एक साथ 47 आतंकवादियों की लाशें
इसी 22 जून को फौज ने फालूजा को आतंकवादियों से आजाद करवाने के लिए जो आखिरी चढ़ाई की, उसमें छह दिन गुजरते-गुजरते ऐतिहासिक जीत हाथ आ लगी. इधर, फालूजा में एक साथ कई मोर्चे पर आमने-सामने की लड़ाई चल ही रही थी, उधर अमेरिका की अगुआई में कोलिशन फोर्सेज के लड़ाकू हवाई जहाजों ने फालूजा से सटे आईएसआईएस के कब्जेवाले रिहायशी इलाके जोलान को ऐसा टार्गेट किया कि महज एक हवाई हमले में एक साथ 47 आतंकवादियों की लाशें बिछ गईं. इस एक एयर स्ट्राइक ने जैसे आईएसआईएस की रूह फना कर दी. अब आतंकवादी अपनी आग उगलती बंदूकें फेंक कर खुद अपनी जान बचाने के लिए सिर पर पांव रख कर ऐसे भागे कि चंद घंटों में ही फालूजा दहशतगर्दों से पूरी तरह खाली हो गया.

फालूजा के बाद मोसूल की आजादी
ये इराक में आईएसआईएस , इराकी फौज और कोलिशन फोर्सेज के बीच चल रही लड़ाई का महज एक हिस्सा भर है. फालूजा की जीत ने उम्मीद की किरण तो जगाई ही है. इराकी फौज समेत आईएसआईएस के खिलाफ मोर्चा ले रहे तमाम फौजियों को भी जोश से भर दिया है. अब इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी की अगुआई में फौज इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसूल की तरफ कूच कर चुकी है. ताकि वहां से भी दहशतगर्दों के इस काले झंडे को उखाड़ कर राष्ट्रीय झंडा फहराया जा सके और लोग अमन और आजादी की फिजां में खुल कर सांस ले सकें.

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