महादेव ऑनलाइन बुक केस से जुड़े अवैध बेटिंग नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने 10 जनवरी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए करीब 21.45 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच की हैं.
ईडी के मुताबिक यह कार्रवाई महादेव ऑनलाइन बुक के गैर-कानूनी बेटिंग ऑपरेशन की चल रही जांच का हिस्सा है. अटैच की गई संपत्तियों में करीब 98.55 लाख रुपए की चल संपत्ति है. इसके साथ ही भारत और दुबई में स्थित 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं. इनमें रिहायशी मकान, कमर्शियल दुकानें, खेती की जमीन और लग्ज़री अपार्टमेंट शामिल हैं.
इनकी कुल कीमत लगभग 20.46 करोड़ रुपए आंकी गई है. इस ऑर्डर के तहत महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमुख प्रमोटर रवि उप्पल की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं. ईडी ने रवि को मामले का मुख्य प्रमोटर बताया है, जो फिलहाल फरार है. उसकी दुबई स्थित विदेशी प्रॉपर्टी अट्रिया रा को अटैच किया गया है, जिसकी कीमत 6.75 करोड़ बताई गई है.
सौरभ चंद्राकर के करीबी सहयोगी रजत कुमार सिंह की भिलाई और दुबई स्थित प्रॉपर्टी भी ईडी के शिकंजे में आई है. जांच में सामने आया है कि रजत ने कई पैनल चलाए और करीब 15 से 20 करोड़ की अपराध से अर्जित आय हासिल की थी. वहीं सौरभ आहूजा और विशाल रमानी पर लगभग 100 पैनल चलाने और करीब 30 करोड़ रुपए का POC कमाने का आरोप है.
इन दोनों की दुर्ग और भिलाई की संपत्तियां अटैच की गई हैं. इस कार्रवाई में विनय कुमार और हनी सिंह की संपत्तियां भी शामिल हैं. दोनों ने छह पैनल चलाए और बेटिंग ऐप के फर्जी प्रमोशन में सक्रिय भूमिका निभाई. जांच के मुताबिक दोनों ने करीब 7 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की थी. उनकी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के साथ महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर अटैच की गई है.
टेलीग्राम आधारित प्रमोशन में शामिल लकी गोयल पर भी ईडी ने कार्रवाई की है. उसने करीब 2.55 करोड़ की अपराध से अर्जित आय कमाई थी. राजस्थान में उसकी कई दुकानें और प्लॉट इस ऑर्डर के तहत अटैच किए गए हैं. वहीं दुबई में ऑपरेशन संभालने वाले राजा गुप्ता की रायपुर स्थित एक अचल संपत्ति को भी POC से खरीदी गई मानते हुए अटैच करने पर विचार किया गया है.
ईडी ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई केस के आधार पर इस केस में जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर247 जैसे डोमेन नेम के जरिए अवैध बेटिंग सर्विस देता था. यह पूरा नेटवर्क फ्रेंचाइजी मॉडल पर चलता था, जिसमें पैनल और ब्रांच के जरिए ऑपरेशन मैनेज किए जाते थे.
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे थे. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रमोटर पैनल से होने वाले मुनाफे का 70 से 75 फीसदी हिस्सा खुद रखते थे. अपराध से अर्जित रकम को हजारों म्यूल या डमी बैंक खातों के जरिए लेयर किया गया, जो फर्जी या अनजान लोगों के KYC दस्तावेजों पर खोले गए थे. ED इस मामले में 175 से ज्यादा जगहों पर तलाशी ले चुकी है.
दिव्येश सिंह