Mood Of The Nation Survey: देश का मिजाज (Mood Of The Nation) सर्वे के अनुसार, साल भर पहले चलाए गए वैक्सीनेशन के प्रयास को 82 प्रतिशत लोगों ने सही माना है. इंडिया टुडे और सी वोटर ने एक सर्वे किया है, जिसमें जनता से मोदी सरकार के कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन के प्रयास पर राय मांगी गई थी. मोदी सरकार की ओर से चलाए गए वैक्सीनेशन के प्रयास को 8 प्रतिशत लोग एवरेज मानते हैं. वहीं देश में 7 प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो इसे खराब मानते हैं.
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देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल पर जनता की राय
सवाल के जरिए जनता का मूड जानने की कोशिश की गई थी, एनडीए सरकार 2018 जनवरी से लेकर जनवरी 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में कितनी सक्षम दिखी है. जनता के मुताबिक, 52 प्रतिशत लोगों ने माना कि एनडीए सरकार देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में सक्षम दिखी है. वहीं 26 प्रतिशत लोगों ने सरकार के प्रयास को एवरेज बताया है. वहीं 19 फीसदी लोगों का मानना है कि एनडीए सरकार देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम रही है.
पिछले 6 महीने में देश की अर्थव्यवस्था
जनता का मानना है कि पिछले छह महीने में देश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है. अगस्त 2021 में 21 प्रतिशत लोगों ने माना था कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, वहीं जनवरी 2022 में 31 प्रतिशत लोगों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था सुधरी है. वहीं अगस्त 2021 में 32 प्रतिशत लोग मानते थे कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है तो वहीं जनवरी 2022 में ऐसा मानने वालों की संख्या घटकर 29 प्रतिशत रह गई. वहीं 2021 अगस्त में 43 प्रतिशत लोगों ने माना कि देश की अर्थव्यवस्था में कोई चेंज नहीं हुई है. जनवरी 2022 में ऐसा मानने वालों की संख्या घटकर 22 प्रतिशत रह गई.
सरकार की पॉलिसी से किसको सबसे ज्यादा लाभ
इस सवाल के जवाब में जनता ने बताया कि सरकार की पॉलिसी से 48 प्रतिशत बड़े बिजनेसमैन को लाभ मिला है, जबकि 12 प्रतिशत किसानों के लिए सरकारी नीतियां कारगर साबित हुई हैं. वहीं 8 प्रतिशत वेतनभोगियों को भी सरकार की पॉलिसी का लाभ मिला है तो वहीं 8 प्रतिशत छोटे कारोबारियों को भी मोदी सरकार की नीतियों का लाभ मिला है.
एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन को आप कितना सपोर्ट करते हैं?
India today-CVoter biannual Mood of the Nation (MOTN) 2022 बताता है कि 41 प्रतिशत जनता ने बताया कि वह एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन के सपोर्ट में हैं जबकि 43 प्रतिशत लोगों ने इसका सपोर्ट नहीं किया.
क्या ममता एक संयुक्त विपक्ष बना सकती हैं और उसे लीड कर सकती हैं?
एमओटीएन के जरिए इस सवाल पर जनता का मूड जाना गया तो जवाब मिला कि 48 प्रतिशत लोग मानते हैं कि ममता बनर्जी एक मजबूत संयुक्त विपक्ष बनाकर उसे लीड कर सकतीं हैं. वहीं 38 प्रतिशत लोग ऐसा नहीं मानते हैं. वहीं 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस सवाल के बारे में वे कुछ नहीं कह सकते हैं.
क्या विपक्ष भाजपा को चैलेंज कर सकता है?
इस सवाल का जवाब कुछ दिलचस्प रहा. छह महीना पहले यानी अगस्त 2021 में 49 प्रतिशत लोगों का मानना था कि विपक्षी गठबंधन भाजपा को चैलेंज कर सकता है. वहीं 6 महीने बाद यानी जनवरी 2022 में भी 49 प्रतिशत लोगों ने भी माना कि विपक्षी गठबंधन भाजपा को चैलेंज कर सकता है. अगस्त 2021 में 43 प्रतिशत लोगों ने माना था कि विपक्षी गठबंधन भाजपा को टक्कर नहीं दे सकता जबकि 2022 जनवरी में 41 फीसदी लोगों ने माना कि विपक्षी गठबंधन भाजपा को टक्कर नहीं दे सकता.
क्या सोनिया, प्रियंका और राहुल गांधी के बिना कांग्रेस कुछ नहीं?
6 महीने पहले 45 प्रतिशत लोगों का मानना था कि कांग्रेस गांधी के बिना कुछ नहीं है. अब 6 महीने बाद यानी जनवरी 2022 में ऐसा मानने वालों की संख्या बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई है. 6 महीने पहले 46 प्रतिशत लोग ऐसा नहीं मानते थे. 6 महीने बाद अब 35 फीसदी लोगों का मानना है कि कांग्रेस गांधी के बिना कुछ नहीं है. वहीं 6 महीने पहले 10 प्रतिशत लोगों ने इस सवाल का जवाब देने में असहमति जताई थी जबकि जनवरी 2022 में 13 प्रतिशत लोगों ने सवाल के जवाब में कहा कि कुछ नहीं कह सकते.
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