देश के उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी बढ़ने लगे हैं कोरोना के मामले

छोटे उत्तर-पूर्वी राज्यों में, मणिपुर में 23 वर्षीय महिला के तौर पर पहला पॉजिटिव केस आया जो ब्रिटेन से लौटी थी. इस समूह वाले राज्यों में त्रिपुरा के बाद अब मणिपुर में सबसे ज्यादा केस हैं. 28 जून तक त्रिपुरा में 1,350 और मणिपुर में करीब 1,200 केस रिपोर्ट हुए.

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aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 01 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

  • मेघालय में सबसे कम कोरोना के कुल 50 केस हैं
  • मणिपुर में 23 वर्षीय महिला पहली कोरोना संक्रमित
  • मणिपुर में 15 जुलाई तक सख्त लॉकडाउन लागू है

भारत में उत्तर-पूर्व के छोटे राज्य अब तक कोविड-19 महामारी के प्रकोप से बचे रहे हैं, लेकिन इस हफ्ते वहां भी कुछ राज्यों में केसों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है. छोटे उत्तर-पूर्वी राज्यों में न सिर्फ कुल केसों की संख्या अब तक कम रही है बल्कि यहां आबादी के अनुपात में भी केस कम रहे हैं.

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मेघालय में सबसे कम कुल 50 केस हैं. ये आंकड़ा दस लाख की आबादी पर 16 केस बैठता है. यहां लोगों की आवाजाही पर सख्त बंदिशें हैं. जो भी कोई बाहर से राज्य में आता है उसे संस्थागत क्वारनटीन में जाना पड़ता है.

2 जून को, मेघालय स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि राज्य में सभी को 'डिफॉल्ट रूप से' कोरोना वायरस का बिना लक्षण वाला कैरियर (वाहक) माना जाता है. सामुदायिक संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए ये आदेश तर्कसंगत कदम था.

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छोटे उत्तर-पूर्वी राज्यों में, मणिपुर में 23 वर्षीय महिला के तौर पर पहला पॉजिटिव केस आया जो ब्रिटेन से लौटी थी. इस समूह वाले राज्यों में त्रिपुरा के बाद अब मणिपुर में सबसे ज्यादा केस हैं. 28 जून तक त्रिपुरा में 1,350 और मणिपुर में करीब 1,200 केस रिपोर्ट हुए. मणिपुर में 15 जुलाई तक सख्त लॉकडाउन लागू है. अभी तक मेघालय और सिक्किम (कुल 88 केस) अपेक्षाकृत कोरोना वायरस के केस अधिक प्रभावित नहीं हुए हैं.

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नगालैंड की टेस्ट पॉजिटिविटी दर 2.7% है

उत्तर-पूर्व के सात छोटे राज्यों में नगालैंड इस समय सबसे बड़े संकट में है. देश के किसी भी राज्य की तुलना में नगालैंड में केस दोगुने होने की रफ्तार सबसे तेज है. यहां एक हफ्ते से भी कम समय में केस दोगुने हो रहे हैं. नगालैंड में ऐसी स्थिति प्रवासियों के लौटने से बनी है, जिसमें दक्षिणी राज्यों से लौटे प्रवासी भी शामिल हैं.

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हालांकि त्रिपुरा और मणिपुर पर केसों का बोझ अधिक है, लेकिन इन राज्यों में केस दोगुने होने की रफ्तार लगातार घट रही है. जबकि मणिपुर में केसों के दोगुने होने का समय दो हफ्ते से भी कम है, वहीं त्रिपुरा में, ऐसा होने में लगभग 50 दिन लग रहे हैं.

छोटे उत्तर-पूर्वी राज्यों में देश में सबसे कम मृत्यु दर है. यहां अब तक केवल तीन कोविड-19 से मौतें रिपोर्ट हुईं जिनमें से एक-एक मौत त्रिपुरा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में सामने आई.

इन राज्यों में टेस्ट पॉजिटिविटी दर कुल मिलाकर कम है, इसके मायने हैं कि ये राज्य लोगों की पर्याप्त टेस्टिंग कर रहे हैं. हालांकि, नगालैंड ऐसा उत्तर-पूर्वी राज्य है, जहां कम टेस्टिंग बड़ी समस्या है. यहां 1000 की आबादी पर सिर्फ 7 टेस्ट ही हो रहे हैं. नगालैंड की टेस्ट पॉजिटिविटी दर 2.7% है जो क्षेत्र में अन्य छोटे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है.

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