WFH होना चाहिए या नहीं? देश के बड़े उद्योगपतियों की जानिए राय... उदय कोटक बोले- कठिन दौर के लिए रहें तैयार

WFH vs Office: जब हम WFH अपनाते हैं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, तो हम सीधे तौर पर देश के आयात बिल को कम करते हैं. अब तमाम उद्योगपति इसपर मंथन कर रहे हैं.

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वर्क फ्रॉम होम के विकल्प पर अब तेजी से विचार. (Photo: ITG) वर्क फ्रॉम होम के विकल्प पर अब तेजी से विचार. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद वर्क फ्रॉम होम (WFH) की खूब चर्चा हो रही है. लोगों को लॉकडाउन जैसी आदतें डालने की सलाह दी जा रही है. आम आदमी के साथ-साथ उद्योगपतियों के बीच भी अब WFH चर्चा का विषय है. क्या देश में ऐसी स्थिति आ गई है कि तमाम कंपनियों को अब WFH के विकल्प पर विचार करना चाहिए?

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कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने ईरान संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है. CII वार्षिक बिजनेस समिट 2026 में उन्होंने कहा कि देश को कठिन समय के लिए तैयार रहना चाहिए. 

कोटक ने चेतावनी दी कि पिछले आठ हफ्तों से ईरान संघर्ष का आर्थिक प्रभाव काफी हद तक शांत रहा है. लेकिन अब यह शांति खत्म होने वाली है. उन्होंने कहा, 'अगर जल्द ईरान युद्ध नहीं रुकता है, तो हमें बड़े आर्थिक झटके के लिए तैयार रहना चाहिए.'

उदय कोटक के अनुसार दुनिया अब मिल-जुलकर चलने वाली 'दावोस मानसिकता' से हटकर 1945 से पहले वाले दौर की ओर जा रही है, जिसे उन्होंने 'कबीलाई' फेज करार दिया. कोटक ने भारत की सबसे बड़ी कमजोरी कच्चे तेल पर भी ध्यान आकर्षित किया. जब कच्चा तेल $60 प्रति बैरल पर था, तब भारत का चालू खाता घाटा (CAD) -1% के साथ प्रबंधनीय था. लेकिन अब तेल $100 प्रति बैरल के ऊपर है, तो यह घाटा बढ़कर -2.5% हो सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है. 

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PM मोदी की अपील और WFH का समर्थन
उन्होंने कहा कि भारतीयों को फिर से वर्क-फ्रॉम-होम (WFH), ऑनलाइन मीटिंग और कम यात्रा करने जैसी आदतों को अपनानी चाहिए. जिससे पेट्रोल-डीजल पर कम खर्च होगा, और डॉलर बचेगा. कोटक का मानना है कि हमें संकट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, सभी को मिलकर इस मुसीबत से मुकाबला करना चाहिए. 

सुनील भारती मित्तल (भारती एयरटेल) 
एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि ये कठिन दौर है. देश तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा है, देश सालाना 6-7% की वृद्धि दर से विकास कर रहा है. लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं जो किसी के नियंत्रण से बाहर होती हैं, फिलहाल वैश्विक स्थिति ऐसी है.  हालांकि उन्होंने वर्क फ्रॉम होम (WFH) के प्रस्ताव पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की. उन्होंने उद्योग जगत से घरेलू पूंजीगत व्यय बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया.  

सुनील कांत मुंजाल (हीरो एंटरप्राइज) को प्रोडक्शन की चिंता
हीरो एंटरप्राइज के सुनील कांत मुंजाल ने अलर्ट करते हुए कहा कि कोविड के समय मजबूरी में WFH अपनाया गया था, लेकिन लंबे समय में यह 'क्रिएटिविटी' और 'वर्क कल्चर' को नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने जोर दिया कि भारत जैसे देश में जहां बुनियादी ढांचे की चुनौतियां हैं, ऑफिस का माहौल काम के लिए अधिक प्रभावी होता है. हालांकि उन्होंने तेल संकट के दौरान गैर-जरूरी यात्राओं में कटौती का समर्थन किया है. 

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शोभना कामिनेनी (अपोलो हॉस्पिटल्स): फ्लेक्सिबिलिटी की जरूरत
शोभना कामिनेनी ने कहा कि सर्विस सेक्टर और डिजिटल भूमिकाओं के लिए WFH एक बेहतरीन टूल है. उन्होंने बताया कि इससे न केवल फ्यूल की बचत होती है, बल्कि वर्क-फोर्स में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है., संकट के समय इसे एक 'रणनीतिक हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

वहीं उद्योगपति हर्ष गोयंका का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में भारत की 'आर्थिक ढाल' को मजबूत करने का मंत्र है. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर एक साल तक सोने की खरीदारी टालना, स्थानीय प्रोडक्ट्स को अपनाना और अनावश्यक ईंधन खर्च में कटौती करना करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद कर सकता है.  जब हम WFH अपनाते हैं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, तो हम सीधे तौर पर देश के आयात बिल को कम करते हैं.

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