पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं. गुरुवार की रात यानी चंद घंटे के बाद टैरिफ पर फैसला आने वाला है. दरअसल, अप्रैल 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने तमाम देशों पर 10 से 50% तक टैरिफ लगाए थे, जिन्हें अदालतों में चुनौती दी गई थी, दलील ये थी कि राष्ट्रपति के पास संविधान के तहत इतनी व्यापक शक्तियां नहीं हैं.
अमेरिका ने अपने मनमुतााबिक टैरिफ कई देशों पर लगाए थे, जिसका विरोध भी हो रहा है. अमेरिका में भी टैरिफ का असर देखा जा रहा है, जिसके बाद ये मामला कोर्ट तक पहुंच गया. अब शुक्रवार की रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए बेहद अहम यानी 'फैसले का दिन' रहने वाला है. इस फैसले पर तमाम देशों के शेयर बाजारों की निगाहें भी टिकी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था की नजरें हैं.
अमेरिकी कोर्ट पर दुनिया की नजर
दरअसल, वैश्विक शेयरों बाजारों पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट का माहौल देखा जा रहा है. जिसके कई कारण हैं, लेकिन उनमें से एक बड़ा कारण टैरिफ भी है. अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार टैरिफ को लेकर धमकी दे रहे हैं, इसी हफ्ते उन्होंने रूस से कारोबार करने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
इस बीच , 9 जनवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला आने वाला है, यह मामला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता (legality) को लेकर है. कोर्ट सुनवाई कर रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत जो टैरिफ लगाए थे, वे कानूनी रूप से सही है या नहीं?
इस फैसले से पहले दुनिया के सभी बाजार दबाव में हैं. लेकिन फैसला ट्रंप प्रशासन के खिलाफ आता है, तो फिर भारत समेत दुनिया के कई बाजारों में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. कुछ जानकार कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ आने की संभावना है. ऐसे में ये फैसला सोमवार को बाजार का रुख तय करेगा. ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला जाने पर भारतीय शेयर बाजार को फायदा हो सकता है.
बाजार में लगातार 5वें दिन गिरावट
शुक्रवार को लगातार 5वें दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए. सेंसेक्स इस दौरान करीब 2200 अंक गिरा है, और निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. शुक्रवार को सेंसेक्स 604 अंक गिरकर 83576 अंक और निफ्टी 193 अंक गिरकर 25,683.30 अंक पर बंद हुआ. वहीं अगर ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला जाता है तो फिर बाजार में दबाव जारी भी रह सकता है. ये फैसला अमेरिका के साथ-साथ कई देशों के लिए अहम है.
अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, यानी यह फैसला आता है कि ट्रंप के दौर में लगाए गए टैरिफ अवैध थे, तो उसके कानूनी, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े असर होंगे. ट्रंप के फैसले को अवैध करार देने पर अमेरिकी सरकार को कंपनियों और आयातकों से टैरिफ के नाम पर वसूला गया पैसा करना होगा और अरबों डॉलर का रिफंड देना पड़ सकता है. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह रकम 100–150 अरब डॉलर (करीब 8–12 लाख करोड़ रुपये) तक हो सकती है. ऐसे में अमेरिकी खजानों पर इसका असर होगा.
वहीं अगर ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला आता है, यानी कोर्ट अगर यह कह देता है कि राष्ट्रपति के पास आपातकालीन कानून (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार है, तो ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए सभी विवादित टैरिफ कानूनी रूप से सही ठहरेंगे. कंपनियों और आयातकों को कोई रिफंड नहीं मिलेगा. सरकार को अरबों डॉलर का राजस्व सुरक्षित रहेगा. इसके बाद टैरिफ को लेकर ट्रंप इससे भी बड़ा दांव चल सकते हैं. ट्रंप की America First और हार्ड ट्रेड पॉलिसी को मजबूती मिलेगी. चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने की रणनीति को समर्थन मिलेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क