मंगलवार का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए मंगलमय नहीं रहा. ऐसा हाहाकार मचा है कि देखते ही देखते निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए. वैसे डूबने का ये खेल पिछले काफी दिनों से चल रहा है और अब निवेशकों का धैर्य भी डगमगाने लगा है.
सबसे ज्यादा कोहराम रिटेल निवेशकों (Retail Investors) में मचा है. ऐसे रिटेल निवेशक, जो पिछले 2 साल से बाजार में पैसे लगा रहे थे, उनमें से ज्यादातर की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है. क्योंकि जिस भरोसे के साथ वे शेयर बाजार (Share Market) में आए थे, वह अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है. हर रोज गिरते बाजार के साथ पोर्टफोलियो (Portfolio) का लाल रंग गहराता जा रहा है.
पिछले दो साल से शेयर बाजार की तरफ रुख करने वाले अधिकतर निवेशक अब पछता रहे हैं. उनका दर्द है कि ये कहां आ गए? कमाई तो दूर, गाढ़ी पूंजी पर ग्रहण लग रहा है, यानी धीरे-धीरे कैपिटल डूब रहा है.
सेबी के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना काल के बाद रिटेल निवेशक बाजार से तेजी से प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई बाजार में झोंक दी है. लेकिन अब हर रोज बाजार टूट रहा है और पैसे डूब रहे हैं.
अब क्या करें रिटेल निवेशक?
फिलहाल नए रिटेल निवेशकों के सामने कई चुनौतियां हैं. एक तो पहले सारा प्रॉफिट साफ हो गया और अब धीरे-धीरे कैपिटल घट रहा है. हर दिन की शुरुआत इस उम्मीद से होती है कि आज बाजार में सबकुछ ठीक रहेगा, लेकिन होता इससे विपरीत है. वित्तीय नियम कहता है कि गिरावट के दौर में सभी शेयर बेचकर निकलना भी सही कदम नहीं होता है. क्योंकि हमेशा ये सलाह दी जाती है कि गिरते बाजार में अच्छे स्टॉक (Stocks) को पकड़ने का एक मौका भी होता है. फिर ऐसे माहौल में सभी शेयर बेचकर निकलने से नुकसान ही नुकसान होगा.
कई ऐसे इंवेस्टर्स हैं, जिनका पोर्टफोलियो चंद महीने पहले तक 20% प्रॉफिट में था, वो अब गिरकर 20 फीसदी निगेटिव हो गया है, यानी बाजार में कमाने आए थे, और अब अपनी गाढ़ी कमाई ही गंवा रहे है. फिलहाल राहत की उम्मीद भी नहीं दिख रही है. वैसे रिटेल निवेशक को ज्यादा नुकसान इसलिए भी हो रहा है क्योंकि अधिकतर रिटेल निवेशक स्मॉलकैप (Small Cap) और मिडकैप (Midcap) में पैसे लगाते हैं, और सबसे ज्यादा बिकवाली इन्हीं दोनों सेगमेंट में देखने को मिल रही हैं.
इसके अलावा पैनी स्टॉक में फंसना रिटेल निवेशक के लिए आम बात है. आंकड़ों की मानें तो लॉर्ज कैप ने साल 2025 में भी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन स्मॉलकैप इंडेक्स पिछले साल 6 फीसदी गिरा और मिडकैप इंडेक्स बिल्कुल फ्लैट रहा. ऐसे में रिटेल निवेशकों का दांव उल्टा पड़ना लाजिमी है.
इंडेक्स ऑल टाइम हाई से 5 फीसदी दूर
इंडेक्स लेवल पर देखें तो निफ्टी-50 ने पिछले एक साल में करीब 10 फीसदी का रिटर्न दिया है. अपने हाई से निफ्टी महज 1000 अंक नीचे है. जबकि सेंसेक्स ऑल टाइम हाई के करीब 4 हजार अंक यानी करीब 5 फीसदी नीचे है. यानी लॉर्ज कैप कंपनियों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई है. लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में भगदड़ जैसा माहौल है.
अब क्या करें? एक्सपर्ट्स की मानें तो गिरावट के दौर में लंबी अवधि के निवेशक को घबराना नहीं चाहिए. लेकिन सवाल ये है कि क्या चुपचाप बैठने से नुकसान कम होगा? वैसे ऐसी सिचुएशन में रिटेल निवेशक को सबसे पहले अपने पोर्टफोलियो पर गौर करना चाहिए. अगर उनके पोर्टफोलियो में डामेंटली मजबूत स्टॉक्स हैं तो उसे बनाए रखें, अगर आपकी खरीद से नीचे स्टॉक मिल रहे हैं तो एवरेजिंग कर सकते हैं. ताकि जब बाजार में तेजी आए तो जल्दी नुकसान से उबर जाएं.
निवेश से पहले ध्यान रखें ये बातें
इसके अलावा अगर खराब स्टॉक्स ले रखे हैं तो उससे बाहर निकलकर अच्छे स्टॉक की तरफ जा सकते हैं. लेकिन घबराकर सभी शेयर बेच देना गलत फैसला होगा. हालांकि, ये किसी को पता नहीं होता है कि बाजार में और कितने दिन तक ये गिरावट रहेगी, इसलिए एक साथ और सिंगल स्टॉक में निवेश से बचें. अगर निवेश के लिए सोच रहे हैं तो थोड़ा-थोड़ा करके पैसे लगाएं. इसके अलावा पोर्टफोलियो को डायवर्सीफाई रखें, यानी रिटेल निवेशक को सबसे ज्यादा लॉर्ज कैप में निवेश करना चाहिए, उसके बाद मिडकैप और फिर कम जोखिम वाले स्मॉल कैप में पैसे लगाएं. इसके साथ ही पोर्टफोलियो का करीब 5 फीसदी हिस्सा सोने-चांदी के लिए रखें. क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है और शेयर बाजार में सबसे ज्यादा इसी का असर दिख रहा है. तीसरी तिमाही के नतीजे भी मिले-जुले आ रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में कहीं भी निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.
अमित कुमार दुबे