शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से डर लगता है, पूंजी भी डूब सकती है. बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) नहीं कर सकते, क्योंकि बहुत कम ब्याज मिलता है. फिर क्या करें? ऐसे में रियल एस्टेट (Real Estate) एक शानदार विकल्प है. खासकर अगर आप रिटायरमेंट प्लान कर रहे हैं तो ये फॉर्मूला आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकता है.
दरअसल, तेजी से आर्थिक हालात बदल रहे हैं, महंगाई बढ़ रही है. इसलिए रिटायरमेंट की प्लानिंग आज सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. लेकिन रियल एस्टेट निवेश को सही तरीके से इस्तेमाल कर रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाया जा सकता है. एक्सपर्ट की मानें तो दो घरों की रणनीति रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है, बशर्ते इसे सही ढंग से प्लान किया जाए.
दो घर वाला फाइनेंशियल फॉर्मूला
इस रणनीति में पहला घर रहने के लिए होना चाहिए. सबसे पहले एक घर लीजिए, अगर लोन लेकर घर ले रहे हैं, तो उसे जल्द चुकाने पर फोकस रखें, ये मकान रिटायरमेंट से पहले और रिटायरमेंट के बाद भी रहने के लिए होगा. कोशिश ये होनी चाहिए कि रिटायरमेंट से पहले या 50 की उम्र तक इस घर का होम लोन पूरी तरह से खत्म हो जाए, ताकि रिटायरमेंट के वक्त कोई EMI का दबाव न रहे.
अब बात दूसरे घर की करते हैं... दूसरा घर खरीदने का मकसद निवेश होना चाहिए, जो मुख्यतौर पर रिटायरमेंट के लिए हो, एक तरह से पेंशन का काम ये घर कर सकता है. या फिर दूसरे घर को दो तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं, या तो उसे किराये पर देकर हर महीने नियमित आय की व्यवस्था की जा सकती है, या फिर 60 की उम्र के बाद उसे बेचकर उस रकम को रिटायरमेंट फंड में बदला जाए. दूसरे घर के तौर पर जमीन के विकल्प को भी देख सकते हैं. जो कि ऐसी जगह पर हो, जिसे 10-15 साल के बाद बेचने पर अच्छी वैल्यू मिल जाए.
किराये पर देना पहला फॉर्मूला
अगर आप दूसरा घर अच्छे इलाके लेते हैं और उससे ठीक-ठाक किराया मिल जाएगा, तो यह हर महीने पेंशन जैसा कैश फ्लो दे सकता है. मान लीजिए किराया 30-40 हजार रुपये मंथली है, तो उससे रिटायरमेंट के बाद रोजमर्रा के खर्च, दवाइयां और बिजली-पानी जैसे खर्च आसानी से पूरे हो सकते हैं. किराये भी साल-दर-साल बढ़ते रहते हैं, इसे एक तरह से रिटायरमेंट के बाद पेंशन के तौर पर देख सकते हैं.
अब अगर आप दूसरा घर ऐसे इलाके लेते हैं, जहां बहुत अच्छा किराया नहीं है, या फिर आप जमीन खरीदते हैं तो ऐसी स्थिति घर-जमीन को बेच लेना फायदे का सौदा साबित होगा, क्योंकि दूसरे घर या जमीन को आपने रिटायरमेंट फंड के लिए खरीदा है. एक्सपर्ट बताते हैं कि जब दूसरे घर का किराया बेहद कम हो, तो जैसे ही आपकी उम्र 60 साल हो जाए, उसे बिना सोचे-समझे बेच लें, ये बिल्कुल समझदारी भरा फैसला हो सकता है. इस घर बेचकर मिलने वाली रकम को सही तरीके से निवेश करके स्थाई रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है.
बेचकर रिटायरमेंट फंड के तौर पर करें इस्तेमाल
उदाहरण के लिए मान लीजिए दूसरे घर को बेचने पर 1 करोड़ रुपये मिलता है. फिर इसमें से 60 फीसदी रकम सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम या बैंक एफडी में लगाया जा सकता है, जिससे बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित हो जाए, जो कि पेंशन के तौर पर हो. बाकी 20 फीसदी रकम ऐसे फंड में लगाई जा सकती है जो महंगाई से लड़ने में मदद करें, जैसे कंजर्वेटिव हाइब्रिड या शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में. बाकी 20 फीसदी राशि को हमेशा इमरजेंसी और मेडिकल जरूरतों के लिए सेविंग अकाउंट में रख सकते हैं. ताकि जब जरूरत पड़ते ही तुरंत निकाल सकें.
अब सवाल उठता है कि इतनी महंगाई में एक खरीदना तो मुश्किल हो रहा है, फिर दो घर खरीदना कैसे संभव है? दरअसल, आंकड़े बताते हैं कि अधिकतर नौकरी-पेशा लोग अपनी जिंदगी में एक से दो घर जरूर खरीदते हैं. ऐसे में जब आप पहला घर खरीदने का प्लान बनाएं, तो ये भी सोच लें इसी में अगले 30-40 साल तक रहना है. पहले घर को खरीदते समय अधिक डाउन पेमेंट करें, और किश्त जल्द चुकाने की कोशिश करें.
इसके अलावा बचत राशि को बैंक में रखने की बजाय दूसरे घर को खरीदने में खर्च कर सकते हैं. पहला और दूसरा घर को खरीदने में कम से कम 10 से 15 साल का अंतर रखें. ताकि पहले घर का वित्तीय बोझ दूसरे घर पर न पड़े. अगर दूसरे घर को भी लोन लेकर खरीदते हैं तो उसे 60 की उम्र तक चुका सकते हैं. फिर उसी घर को रिटायरमेंट फंड के तौर पर इस्तेमाल कर लें.
अमित कुमार दुबे