रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड... SBI ने रच दिया इतिहास, जानिए कब और कैसे हुई इस बैंक की शुरुआत

SBI ने मार्केट कैप में ICICI बैंक के अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को भी पीछे छोड़ दिया है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नींव 19वीं शताब्दी के पहले दशक में पड़ी थी. तारीख 2 जून 1806 थी.

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SBI ने ICICI बैंक को छोड़ा पीछे. SBI ने ICICI बैंक को छोड़ा पीछे.

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:03 AM IST

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए हैं. देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया है, मार्केट कैप में SBI ने ICICI बैंक को पीछे छोड़ दिया है. दरअसल, पिछले हफ्ते SBI ने दमदार नतीजे पेश किए थे. जिसके बाद शेयर में तूफानी तेजी देखी जा रही है.

 गुरुवार को कारोबार के दौरान SBI के शेयर 0.77 फीसदी चढ़कर 1,192 रुपये पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान शेयर 1,203 रुपये तक गया. पिछले 5 दिन SBI का शेयर 11 फीसदी चढ़ चुका है. इसके साथ ही शेयर ने नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड (All-Time High) भी छू लिया है. 

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इस तेजी के साथ ही SBI का मार्केट कैपिटलाइजेशन 11.01 लाख करोड़ रुपये हो गया है. मार्केट कैप के हिसाब से देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी बनकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. मार्केट कैप में इसने ICICI बैंक के अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को भी पीछे छोड़ दिया है. अब मार्केट कैप में SBI से आगे Reliance Industries, HDFC Bank और Bharti Airtel है. 

जानिए SBI का इतिहास

एक तरह से SBI ने इतिहास रच दिया है. फिलहाल देशभर में SBI के 23 हजार से ज्यादा ब्रॉन्च हैं. बैंक का इतिहास करीब 200 साल पुराना है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नींव 19वीं शताब्दी के पहले दशक में पड़ी थी. तारीख थी 2 जून 1806 और, इसी दिन कोलकाता में बैंक ऑफ कलकत्ता (Bank of Calcutta) के नाम से अस्तित्व में आया था. उस समय देश में ब्रिटिश राज था. इसकी शुरुआत के करीब 3 साल के बाद बैंक को अपना चार्टर प्राप्त हुआ और 2 जनवरी 1809 में इसका नाम बदलकर Bank of Bengal कर दिया गया. बदलाव का ये सिलसिला यहीं नहीं थमा और इसका नाम आगे भी बदलता रहा. 

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ऐसे बना 'इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया'
साल 1809 में 'बैंक ऑफ बंगाल' नाम मिलने के बाद देश में आगे के कुछ सालों में उस समय के हिसाब से बैंकिंग सेक्टर्स में तेजी आने लगी. ये तारीख थी 15 अप्रैल 1840, जब बंबई में बैंक ऑफ बॉम्बे (Bank Of Bombay) की नींव पड़ी थी और इसके बाद तीन साल बाद 1 जुलाई 1843 को बैंक ऑफ मद्रास अस्तित्व में आया था. 

इतिहास को खंगालें, तो देश के इन तीनों ही बैंकों को दरअसल, ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के फाइनेंशियल काम-काज की देखरेख के लिए खोला गया था. लेकिन इनमें प्राइवेट सेक्टर्स के लोगों की रकम भी जमा रहती थी. लंबे समय तक ये बैंक काम करते रहे और फिर 27 जनवरी 1921 में बैंक ऑफ मुंबई और बैंक ऑफ मद्रास का विलय बैंक ऑफ बंगाल में हो गया. इस बड़े मर्जर के बाद भारत में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया (Imperial Bank of India) का उदय हुआ. 

आजादी के बाद ऐसे बना SBI
गौरतलब है कि बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास, इन तीनों ही बैंकों को 1861 में करेंसी छापने और जारी करने का अधिकार मिल गया था और विलय के बाद भी इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया के जरिए ये काम जारी रहा. फिर जब देश को आजादी मिली, तो ब्रिटिशों की गुलामी से निकलने के बाद भी Imperial Bank Of India का काम जारी रहा, बल्कि इसमें विस्तार भी होता नजर आया. साल 1955 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को पार्लियामेंट्री एक्ट के तहत अधिग्रहित किया और इसके नाम में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला. 30 अप्रैल 1955 को इंपीरियल बैंक का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank Of India) यानी एसबीआई (SBI) कर दिया गया.

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आरबीआई द्वारा नया नाम दिए जाने के बाद 1 जुलाई 1955 को आधिकारिक रूप से SBI की स्थापना की गई. इसी दिन एसबीआई में पहला बैंक अकाउंट भी खोला गया था. इसके तहत देश में संचालित इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया के 480 ऑफिस SBI Office में बदल गए. इनमें ब्रांच ऑफिस, सब ब्रांच ऑफिस और तीन लोकल हेडक्वाटर मौजूद थे. इसके बाद से देश में बैंकिंग सेक्टर लगातार ग्रोथ करता चला गया. 

आजादी से पहले हुई शुरुआत और आजादी के बाद मिले नाम के साथ एसबीआई का दायरा समय के साथ बढ़ता ही चला गया. साल 2017 में एसबीआई में स्‍टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (SBBJ), स्‍टेट बैंक ऑफ मैसूर (SBM), स्‍टेट बैंक ऑफ त्रवाणकोर (SBT), स्‍टेट बैंक ऑफ पटियाला (SBH) और स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (SBH) का विलय कर दिया गया. यह विलय 1 अप्रैल 2017 को हुआ था. 

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