भारत को फंड जुटाने के लिए विदेशी निवेश पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. ये कहना कोटक एसेट मैनेजमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह का है. उन्होंने फंड जुटाने को लेकर एक खास मंत्र भी बताया.
ग्लोबल सिक्योरिटीज मार्केट्स कॉन्क्लेव 2.0 में पैनलिस्ट के रूप में बोलते हुए नीलेश शाह ने कहा कि भारत को धन जुटाने के लिए बाहर देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 150 प्रतिशत सोने और चांदी में निवेशित है. उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जीडीपी का महज 2 प्रतिशत प्राप्त करने के लिए हम पूरी दुनिया में घूमते रहते हैं.
इसको लेकर नीलेश शाह ने 'कस्तूरी मृग' और 'सोने की चिड़िया' का उदाहरण देकर समझाया. कस्तूरी मृग अपनी खुशबू को बाहर खोजता है, जबकि वह उसके अंदर ही होती है. उसी तरह भारत भी कई बार निवेश के लिए बाहर देखता है, जबकि असली ताकत देश के अंदर ही है.
भारत खुद सोने की चिड़िया
नीलेश शाह का साफ कहना है कि भारत के पास खुद को 'सोने की चिड़िया' बनाने की पूरी क्षमता है. जरूरत सिर्फ इस बात की है कि देश के अंदर मौजूद बचत और धन को सही दिशा में लगाया जाए. अगर घरेलू निवेश बढ़ेगा, तो अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी और भारत तेजी से आगे बढ़ सकेगा.
उन्होंने कहा, 'अगर भारतीय खुदरा निवेशकों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि उन्होंने सोने और चांदी से पर्याप्त मुनाफा कमा लिया है और अब इसे नकद में बदलने का समय आ गया है, तो भारत की विकास दर में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है.'
केवल सही फैसला सही समय पर लेने की जरूरत
इसको लेकर उन्होंने एक शानदार उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि अगर भारतीय निवेशकों ने शुरुआती समय में Nvidia जैसी कंपनी में हिस्सा लिया होता, तो आज उन्हें बड़ा फायदा मिलता. उस समय कंपनी की कीमत बहुत कम थी, लेकिन आज वह दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल है. इससे यह सीख मिलती है कि सही समय पर किया गया निवेश भविष्य में बड़ा लाभ दे सकता है.
नीलेश शाह ने कहा, 'चर्चा 2035 तक भारत में आने वाले निवेशों की है. लेकिन अगर भारतीयों के पास एनवीडिया में 10 फीसदी हिस्सेदारी होती, जब इसकी कीमत 300 मिलियन डॉलर थी, तो भारत तकनीकी अंतर को कम कर सकता था. एनवीडिया 22 जनवरी, 1999 को सार्वजनिक हुई थी, आज कंपनी का मार्केट कैप करीब 4.76 ट्रिलियन डॉलर है.'
कोटक AMC के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक भारतीय घरों में बहुत बड़ी मात्रा में सोना और चांदी रखा हुआ है. यह पैसा इस्तेमाल में नहीं आ रहा, बस तिजोरियों में पड़ा है. अगर इस धन को सही तरीके से निवेश में लगाया जाए, तो देश को पूंजी की कमी नहीं होगी. इससे उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और नई कंपनियों को मजबूती मिल सकती है.
नीलेश शाह ने यह भी कहा कि निवेश सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है. इसमें लोगों की भावनाएं भी जुड़ी होती हैं. कई बार लोग डर या लालच में गलत फैसले ले लेते हैं. इसलिए जरूरी है कि निवेशक समझदारी से और लंबी सोच के साथ पैसा लगाएं.
आजतक बिजनेस डेस्क