सोना-चांदी की कीमतों शुक्रवार को देखते ही देखते क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो गई. कॉमैक्स, एमसीएक्स से लेकर घरेलू मार्केट में भी गोल्ड सिल्वर अचानक काफी सस्ता (Gold-Silver Cheaper) हो गया. सिल्वर प्राइस में तो एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में एक देखने को मिली और ये झटके में 30% से ज्यादा टूट गई. इस गिरावट के बाद साल 1980 की याद ताजा हो गई, उस समय भी Silver Rate बुरी तरह फिसला था, जिसे 'सिल्वर थर्सडे' के तौर पर याद किया जाता है. ठीक उस समय जैसा हाहाकार शुक्रवार को आई गिरावट के बाद चांदी के निवेशकों में दिख रहा है.
सोना-चांदी देखते ही देखते क्रैश
सबसे पहले बात करते हैं Gold-Silver प्राइस क्रैश के बारे में, तो बीते गुरुवार को ये कीमती धातुएं रॉकेट की रफ्तार के भाग रही थीं और पहली बार चांदी ने जहां 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर पार कर लिया था, तो वहीं सोने का भाव भी 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया था. फिर शुक्रवार को अचानक इसमें गिरावट का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, कि एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली एक किलो चांदी का वायदा भाव (1 Kg Silver Price) पिछले बंद के मुकाबले 1,07,971 रुपये कम हो गया. वहीं अपने हाई लेवल 4,20,048 रुपये प्रति किलो की तुलना में Siver Price Crash होकर 2,91,922 रुपये पर आ गया. यानी ये झटके में 1,28,126 रुपये सस्ती हो गई.
सोने के भाव की बात करें, तो 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate में गुरुवार के बंद के मुकाबले शुक्रवार को 33,113 रुपये सस्ता हुआ और 1,83,962 रुपये से 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. वहीं अपने हाई लेवल 1,93,096 रुपये से ये 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया.
क्यों आ गई 1980 की याद?
अब बताते हैं कि शुक्रवार का गोल्ड-सिल्वर क्रैश देखकर आखिर कैसे 1980 की याद दिला रहा है. Silver Thursday की घटना अरबपति भाइयों हंट ब्रदर्स (Hunt Brothers) से जुड़ी हुई थी. दरअसल, टेक्सास के बड़े तेल कारोबारी इन हंट ब्रदर्स ने 1970 के दशक के खत्म होते-होते चांदी में निवेश करना शुरू किया और इसका दायरा इतना बढ़ा दिया, कि चांदी की सप्लाई पर पूरा कंट्रोल सा कर लिया.
उन्होंने फिजिकल सिल्वर, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट जरिए बाजारों से भारी खरीदारी की. रिपोर्ट्स की मानें, तो उनका उद्देश्य इस खरीद के बाद चांदी की कमी दिखाकर दाम में इजाफा कर मुनाफा कमाना था. इसका असर ये हुआ कि जनवरी 1980 में Silver Price अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 डॉलर प्रति औंस तक जा पहुंचा था, जो 70 के दशक में 2 डॉलर से भी नीचे थी. ठीक वैसा ही नजारा था, जैसा कि बीते कुछ दिनों से चांदी की कीमतों में आए उछाल के दौरान दिखा.
फिर अचानक क्रैश, निवेशक बर्बाद
चांदी में चल रहे इस गोलमाल पर जब नियामक की नजर पड़ी, तो उसने सख्त रुख अपनाया और फिर देखते ही देखते पूरी बाजी पलट गई. US रेगुलेटर आनन-फानन में तमाम नए नियम लागू कर दिए. इसके तहत उधार लेकर चांदी खरीदने पर बैन लगा, तो मार्जिन बढ़ाने का ऐलान कर दिया. इसने हंट ब्रदर्स को नए सौदे करने से रोक दिया. मार्जिन मनी के नियम सख्त करने से उन्हें ज्यादा कैश की जरूरत पड़ी, जिसे वो भर नहीं पाए और फिर सामने आया सबसे बड़ा Silver Crash, जिसे 'सिल्वर थर्सडे' भी कहा जाता है.
27 मार्च 1980 भुगतान न कर पाने के चलते हंट ब्रदर्स की पोजिशन कट की गई, तो इसके बाद चांदी बेचने की होड़ सी मच गई और बिकवाली भी ऐसी कि पूरा कमोडिटी मार्केट ही हिल गया. कुछ ही दिनों में चांदी 50 डॉलर से फिसलकर 10 डॉलर के स्तर पर आ गई यानी 80 फीसदी टूट गई. इस क्रैश से बड़ी संख्या में चांदी में निवेश करे वाले निवेशक देखते ही देखते बर्बाद हो गए थे. Hunt Brothers दिवालिया हो गए थे.
तेज उछाल और गिरावट के ताजा कारण
2025 के अंतिम महीनों में चांदी की कीमत में शुरू हुआ तेजी का सिलसिला बीते गुरुवार तक जारी थी और शुक्रवार को आए क्रैश ने इस हंट ब्रदर्स घटना को ताजा कर दिया. बता दें कि ग्लोबल टेंशन, ट्रंप टैरिफ से ट्रेड वॉर की स्थितियां बनने के अलावा सेंट्रल बैंकों की खरीद समेत कई कारण कीमती धातुओं की दाम बढ़ाने की वजह रहे हैं और बीते साल की रैली इस साल भी लगातार देखने को मिल रही थी.
वहीं गिरावट के पीछे के कारण देखें, तो वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के फेड उम्मीदवार Kevin Wrash को महंगाई और डॉलर के मामले में सख्त रुख वाला व्यक्ति माना जाता है. उनके नाम की चर्चाएं तेज होते ही डॉलर की कीमतों में सुधार आया, तो सोना-चांदी दबाव में गए. इसके अलावा निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली ने गिरावट को और बढ़ाने का काम किया.
दीपक चतुर्वेदी