अगर आप क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल न सिर्फ छोटे-मोटे खर्चे, बल्कि बड़े पेमेंट पर करते हैं, तो फिर ये खबर आपके लिए खास है. आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर आ सकते हैं. दरअसल, आयकर विभाग अब हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन पर पहले से ज्यादा नजर रख रहा है, खासतौर पर क्रेडिट कार्ड से होने वाले बड़े खर्चों (Credit Card High Spending) पर और ऐसे मामलों में टैक्स नोटिस आने का जोखिम बढ़ गया है.
क्रेडिट कार्ड से किए गए खर्चों पर टैक्स नोटिस आ सकता है, अगर पेमेंट का स्रोत स्पष्ट न हो या रिपोर्ट की गई इनकम से मेल न खाता हो, इसलिए इससे संबंधित उचित डॉक्युमेंटेशन जरूरी है. आइए समझते हैं ऐसे मामले में जुर्माने और एक्स्ट्रा चार्ज से बचने के लिए टैक्सपेयर्स को किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा?
गलत जानकारी पड़ेगी भारी
गौरतलब है कि आयकर विभाग को बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) के जरिए डेटा मिलता है. इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि आपने सालभर में क्रेडिट कार्ड से कितना खर्च किया है. अगर आपका खर्च आईटीआर में दिखाई गई इनकम से मेल नहीं खाता है, तो फिर ऐसे मामले में टैक्स विभाग आपको नोटिस भेजकर जवाब मांग सकता है. ये इस बात पर फोकस करता है कि अस्पष्ट फाइलिंग और पेमेंट रिकॉर्ड कैसे अब टैक्स में भारी इजाफे का कारण बन सकते हैं.
एक्सपर्ट ने उदाहरण देकर समझाया
TaxBuddy के फाउंडर सुजीत बंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में एक टैक्सपेयर प्रतीक का उदाहरण देकर पूरे मामले को समझाया है. उन्होंने बताया कि यह समस्या तब शुरू हुई जब प्रतीक ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया. लेकिन, क्रेडिट कार्ड पेमेंट जैसे हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस को ट्रैक करने वाले SFT सिस्टम के जरिए से उसकी फाइनेंशियल एक्टिविटीज उजागर हुईं. आयकर अधिकारियों ने प्रतीक के क्रेडिट कार्ड से किए गए भारी भरकम खर्च पर आपत्ति जताई और उसके पैन कार्ड (PAN Card) से जुड़े क्रेडिट कार्ड के जरिए किए गए सभी लेनदेन को निजी खर्च की श्रेणी में रखा गया. इसी आधार पर उसकी टैक्सेबल इनकम में 16.6 लाख रुपये की बढ़ोतरी हो गई.
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अक्सर परिवार के सदस्य या व्यावसायिक खर्चों के लिए भी किया जाता है. हालांकि, टैक्स के हिसाब से देखें, तो कार्ड प्राथमिक धारक के पैन से जुड़ा होता है और इसका सीधा मतलब है कि टैक्स नोटिस भी उसी को भेजा जाएगा, भले ही उसके कार्ड से खर्च किसी ने भी किया हो. बंगर ने बताया कि उचित डॉक्युमेंटेशन के बिना टैक्सपेयर के लिए यह साबित करने में मुश्किल आ सकती है कि उसके क्रेडिट कार्ड से किया गया खर्च पूरी तरह से उसका नहीं है.
अब दस्तावेजी सबूत हो गए जरूरी
प्रतीक के मामले में निर्णायक मोड़ कोई तकनीकी खामी या कानूनी दलील नहीं थी, बल्कि अपर्याप्त दस्तावेजी सबूत थे. ये मामला सामने आने पर उन्होंने साबित किया कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल उनके पिता, भाई और स्वयं उनके अलावा कई अन्य द्वारा किया गया था.
इसे साबित करने के लिए प्रतीक ने अपने बैंक स्टेटमेंट, कार्ड के अन्य यूजर्स के जुड़े प्रूफ, संबंधित पक्षों के आईटीआर समेत एफिडेबिट समेत अन्य दस्तावेज पेश किए, जिनसे स्पष्ट पता चला कि क्रेडिट कार्ड से पेमेंट किसने किया, उसका स्रोत क्या था और लेन-देन का उद्देश्य क्या था. ITAT ने स्पष्टीकरण स्वीकार किया और सबूतों के आधार पर 16.6 लाख रुपये की पूरी राशि हटा दी गई.
ये मामला इस बात को उजागर करता है कि उचित डॉक्युमेंटेशन के बिना टैक्सपेयर्स को यह साबित करने में कठिनाई हो सकती है कि उसके क्रेडिट कार्ड से किया गया भारी-भरकम खर्च पूरी तरह से उनका नहीं है. ऐसे में अगर अन्य लोग आपके क्रेडिट कार्ड का यूज करते हैं, तो पेमेंट प्रूफ, बैंक रिकॉर्ड, स्पष्टीकरण और इस्तेमाल के उद्देश्य से संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना क्रेडिट कार्ड होल्डर के लिए जरूरी है.
कब आ सकता है नोटिस?
यहां ये जान लेना जरूरी है कि Credit Card से किया गया कितना खर्च आपको इनकम टैक्स के राडार पर ला सकता है. तो नियमों के मुताबिक, अगर आप एक फाइनेंशियल ईयर में एक ही बैंक के क्रेडिट कार्ड पर 1 लाख रुपये से ज्यादा कैश पेमेंट करते हैं या कुल मिलाकर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करते हैं, तो यह ट्रांजैक्शन रिपोर्टेबल कैटेगरी में आ जाता है.
ऐसे मामलों में इनकम टैक्स विभाग निगरानी बढ़ा सकता है. कुल मिलाकर अब क्रेडिट कार्ड खर्च सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि टैक्स ट्रैकिंग का अहम हिस्सा बन गया है. ऐसे में इससे जुड़े खर्च से जुड़े डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखें और पेनल्टी या नोटिस से बचें.
आजतक बिजनेस डेस्क