FPO की लिस्टिंग के बाद येस बैंक के शेयर धड़ाम, लगा 10 फीसदी का लोअर सर्किट

सोमवार को येस बैंक के FPO शेयरों की लिस्टिंग के बाद खरीद-फरोख्त शुरू हुई. येस बैंक के शेयर की कीमत उसके एफपीओ कीमत के करीब ही पहुंच गई है. सोमवार को येस बैंक के शेयर थोड़ी ही देर में धड़ाम होकर 12.30 पर पहुंच गए. इसके बाद इसमें 10 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया.

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येस बैंक के शेयर टूटे येस बैंक के शेयर टूटे

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

  • सोमवार को येस बैंक के एफपीओ शेयरों की लिस्टिंग
  • इसके साथ ही येस बैंक के शेयर हो गए धड़ाम
  • इसमें 10 फीसदी का लोअर सर्किट लगाना पड़ा

सोमवार को बाजार खुलते ही येस बैंक के FPO शेयरों की लिस्टिंग के बाद खरीद-फरोख्त शुरू हुई. इससे येस बैंक की शेयर में भारी गिरावट आ गई और उसमें 10 फीसदी का निचला सर्किट लगाकर कारोबार रोक देना पड़ा. येस बैंक के शेयर की कीमत उसके एफपीओ कीमत के करीब ही पहुंच गई है.

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अब तक 74 फीसदी की गिरावट

शुक्रवार को येस बैंक का शेयर 13.65 रुपये पर बंद हुए थे. सोमवार को येस बैंक के शेयर खुले और थोड़ी ही देर में धड़ाम होकर 12.30 पर पहुंच गए. इसके बाद इसमें 10 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया और कारोबार रोक दिया गया. इस साल येस बैंक के शेयर में अब तक 74 फीसदी की गिरावट आ चुकी है.

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बीएसई के मुताबिक येस बैंक ने यह जानकारी दी है कि अमेरिकी निवेशक Tilden Park के नियंत्रण वाली कंपनी Bay Tree India को येस बैंक के 187.5 करोड़ शेयर एलॉट किए गए हैं यानी करीब 7.48 फीसदी हिस्सेदारी दी गई है.

क्‍या होता है लोअर सर्किट?

दरअसल, शेयर बाजार में 10 फीसदी या उससे अधिक की गिरावट की स्थिति में लोअर सर्किट लगता है और ट्रेडिंग रोक दी जाती है. इसका मतलब ये हुआ कि इस दौरान शेयर बाजार में किसी भी तरह का कारोबार नहीं होता है. स्‍टॉक एक्‍सचेंज के नियमों के मुताबिक दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से अलग-अलग अवधि के लिए बाजार बंद होते हैं. नियम के मुताबिक 1 बजे से पहले पहला लोअर सर्किट 45 मिनट का लगता है. शेयर बाजार को भारी गिरावट से बचाने के लिए लोअर सर्किट लगाया जाता है. इसका मकसद निवेशकों के निवेश को सुरक्षित रखा होता है.

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एफपीओ के ऐलान के बाद लगातार गिरावट

येस बैंक ने 10 जुलाई को यह घोषणा की थी कि एफपीओ की अंतिम तय कीमत 12 रुपये प्रति शेयर है. यह बैंक के 9 जुलाई के शेयर भाव से करीब 60 फीसदी कम था. इसके बाद अब तक येस बैंक के शेयर में करीब 54 फीसदी की गिरावट आ चुकी है.

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येस बैंक के एफपीओ को आम निवेशकों ने बहुत पसंद नहीं किया. संस्थागत निवशकों ने किसी तरह बैंक की इज्जत बचाई और इसका एफपीओ 95 फीसदी सब्सक्राइब हुआ. बैंक को 15 हजार करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 14,267 करोड़ रुपये ही मिल पाए.

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