भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा है कि इस समझौते को लेकर संप्रभुता छोड़ने की बात करना 'बकवास' है और ऐसा कहने वाला व्यक्ति 'काफी अज्ञानी' है. एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील 'लेबर ऑफ लव' है, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्यों को मजबूत नतीजों में बदलेगी. दरअसल लेबर ऑफ लव का मतलब होता है, ऐसा काम जो दिल से और पूरी मेहनत से किया जाए, जिसमें किसी तरह की मजबूरी ना हो.
रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देगा समझौता
पीयूष गोयल ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा. बातचीत और मोलभाव की प्रक्रिया के बाद एक अच्छा एग्रीमेंट सामने आया है, जो दोनों देशों के हितों और उनकी ताकत वाले क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा.
ट्रस्ट डेफिसिट से किया इनकार
गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका या दोनों देशों के नेताओं के बीच किसी तरह का भरोसे का संकट नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों देश आपसी विश्वास और सहयोग के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं.
ऊर्जा आयात भारत के हित में, कंपनियां लेंगी फैसला
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमेरिका से कच्चा तेल, LNG और LPG खरीदना भारत के अपने रणनीतिक हित में है, क्योंकि इससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता आती है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि क्या खरीदा जाएगा और कहां से खरीदा जाएगा, इसका फैसला कंपनियां खुद करती हैं. ट्रेड डील में यह तय नहीं होता कि कौन किससे क्या खरीदेगा, बल्कि यह व्यापार का रास्ता आसान और सुगम बनाती है.
प्रेफरेंशियल एक्सेस पर जोर
गोयल ने बताया कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का मकसद प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर और प्राथमिकता वाला बाजार पहुंच दिलाना होता है. उन्होंने कहा कि भारत को 18% रेसिप्रोकल टैरिफ का फायदा मिला है, जिससे अन्य विकासशील देशों के मुकाबले भारत को बढ़त मिलेगी.
राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका की सराहना
वाणिज्य मंत्री ने अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के योगदान की भी खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि सर्जियो गोर इस रिश्ते के शुभचिंतक रहे हैं और बातचीत को अंतिम रूप देने व घोषणा तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. गोयल ने उनके योगदान को सम्मान देने की बात कही.
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