चिदंबरम पर कसा शिकंजा, वित्त मंत्री रहते हुए लिए थे ये दमदार फैसले

आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद आरोपी पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

1996 में पहली बार वित्त मंत्री बने थे पी चिदंबरम (Photo: File)
अमित कुमार दुबे
  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 9:21 AM IST

आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद आरोपी पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ गई हैं. यूपीए सरकार में पी चिदंबरम की बड़ी भूमिका में थी. वैसे चिदंबरम का अब तक राजनीतिक सफर शानदार रहा है. 1996 में पहली बार पी चिदंबरम को वित्त मंत्रालय मिला था. लेकिन ये सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई थी. लेकिन चिदंबरम को अपेक्षित राजनीतिक पहचान मिल गई, उसके बाद साल 2004 में यूपीए की सरकार बनी तो दोबारा पी चिदंबरम को वित्त मंत्रालय सौंपा गया, इस पद पर वह 2008 तक बने रहे.

जब-जब वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी पी चिदंबरम को मिली, उन्होंने उम्मीद से बढ़कर रिजल्ट देने की कोशिश की. इसी कारण जब साल वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बन गए तो एक बार फिर वित्त मंत्रालय का जिम्मा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पी चिदंबरम को सौंप दी.

वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने सबसे पहले 28 फरवरी 1997 को बजट पेश किया था. वह कुल 6 बार बजट पेश कर चुके हैं. 1997 के बजट में चिदंबरम ने लोगों और कंपनियों के लिए अब तक चल रहे टैक्स में बदलाव किया था. कंपनियों को पहले से भुगते गए एम.ए.टी को आने वाले सालों में कर देनदारियों में समायोजित करने की छूट दे दी गई. वॉलेंटरी डिस्कलोजर ऑफ इनकम स्कीम (VDIS) स्कीम लॉन्च की गई, ताकि कालेधन को बाहर लाया जा सके.

पी चिदंबरम के इस कदम से लोगों ने खुद से ही अपनी आय का खुलासा करना शुरू कर दिया था. 1997-98 के दौरान पर्सनल इनकम टैक्स से सरकार को 18 हजार सात सौ करोड़ रुपये मिले, जबकि अप्रैल 2010 से जनवरी 2011 के बीच यह आय एक लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गई. चिदंबरम को ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का श्रेय जाता है.

उसके बाद पी चिदंबरम के द्वारा 2005 में पेश किया गया बजट ऐतिहासिक माना जाता है. पी चि‍दंबरम ने 28 फरवरी 2005 को बजट में पहली बार राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (नरेगा) को पेश कि‍या. आज भी मनरेगा की सफलता का श्रेय कांग्रेसी खुद लेते हैं. नरेगा से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और आमदनी का नया जरि‍या खुल गया. इसके साथ ही देश में बड़े पैमाने पर ब्‍यूरोक्रेसी को प्रोत्‍साहन मि‍ला. पंचायत, गांव और जि‍ला स्‍तर पर नौकरशाहों का जाल बि‍छ गया.

गौरतलब है कि चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड से गैरकानूनी रूप से स्वीकृति दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है. इस केस में अभी तक चिदंबरम को कोर्ट से करीब दो दर्जन बार अंतरिम प्रोटेक्शन यानी गिरफ्तारी पर रोक की राहत मिली हुई है. ये मामला 2007 का है, जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री के पद पर थे.

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