माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को बेहतर बनाने में जुटी सरकार इसका प्रचार करने में भी पीछे नहीं है. उसने जीएसटी का प्रचार-प्रसार करने पर 132.38 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक एजेंसी ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है.
के तहत काम करने वाले ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशंस ने 9 अगस्त को यह जानकारी दी. ब्यूरो की तरफ से सूचना के अधिकार के जवाब में बताया गया है कि सरकार की तरफ से पत्र-पत्रिकाओं में जीएसटी के जो विज्ञापन दिए गए थे. उन पर 1,26,93,97,121 रुपये खर्च किए गए.
वहीं, इलेक्ट्रोनिक मीडिया की बात करें, तो यहां शून्य खर्च बताया गया है. जानकारी के मुताबिक खुले में इस्तिहार आदि के माध्यम से के प्रचार पर 5,44,35,502 रुपये खर्च किए गए.
बता दें कि माल एवं सेवा कर को पिछले साल जुलाई में लागू किया गया था. उसके बाद से सरकार लगातार इसे न सिर्फ अपना एक अहम कदम बताते फिर रही है, बल्कि इसमें काफी बदलाव भी किए जा रहे हैं. पिछले एक साल के दौरान की कई बैठकें हो चुकी हैं.
इन बैठकों में घटाने से लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं. जीएसटी परिषद की अगली बैठक गोवा में होनी है. इस बैठक में छोटे उद्यमियों के लिए जीएसटी रिटर्न भरना आसान बनाने को लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है.
विकास जोशी