केरल के टूरिज्म सेक्टर पर मंदी की मार, कर्ज में डूबे हाउस-बोट्स मालिक

देश आर्थिक सुस्‍ती के दौर से गुजर रहा है. इसका असर केरल के टूरिज्म सेक्टर पर भी देखने को मिल रहा है. हालात ये हो गए हैं कि केरल की हाउस-बोट पानी में तैरने की बजाए किनारों पर लंगर डाले दिखाई दे रही हैं.

केरल के टूरिज्म सेक्टर पर मंदी की मार
शालिनी मारिया लोबो
  • कोट्टायम,
  • 17 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

  • आर्थिक मंदी का असर केरल के टूरिज्‍म सेक्‍टर पर
  • जीएसटी और बाढ़ की वजह से भी टूरिज्‍म हुआ प्रभावित

केरल में ओणम के त्योहार से जुड़े जश्न हाल में संपन्न हुए. ओणम सीजन में केरल में जहां स्कूलों में दस दिनों की छुट्टी रहती है, वहीं नौका दौड़ जैसे आयोजन भी पूरे उत्साह और परंपरा के साथ मनाए जाते हैं. इन दिनों में देश-विदेश से सैलानी भी बड़ी संख्या में केरल आते हैं. लेकिन इस बार केरल में कुछ और ही देखने को मिला. इस बार हाउस-बोट्स पानी में तैरती नहीं बल्कि किनारों पर लंगर डाले दिखाई दीं. किसी भी हाउस-बोट मालिक से बात करो, उसके पास सुनाने के लिए एक ही कहानी है- ‘धंधा बहुत मंदा है, मुनाफा गिर गया है और हर कोई कर्ज में डूबा है.’

31 वर्षीय सुबिन इस पेशे में 8 साल से हैं. सुबिन ने जब हाउस-बोट खरीदी थी तो 25 लाख रुपये का उस पर निवेश किया. सुबिन एक घंटे के लिए बोट का 700 रुपये किराया चार्ज करते थे. लेकिन अब वो 400 रुपये में भी इसे देने के लिए तैयार हो जाते हैं. सुबिन को अपने स्टाफ में भी कटौती करनी पड़ी है. सुबिन कहते हैं, ‘बाढ़ ने पिछले दो साल में हमें बुरी तरह प्रभावित किया. हमें तीन महीने दोबारा पटरी पर आने में लगे, फिर जीएसटी आ गया. बोट को बनाने का खर्च बढ़ गया है. नई बोट लाने के लिए किसी के पास पैसा नहीं है. बाढ़ की वजह से सैलानी नहीं आ रहे हैं, इससे हम सब को भुगतना पड़ रहा है.’

जीएसटी भी बड़ी वजह

2018 और 2019 में बाढ़ ने केरल में टूरिज्म सेक्टर को ओणम सीजन में बैकफुट पर धकेल दिया. जीएसटी एक और बड़ी वजह है जिसे बोट मालिक खुद के कर्ज में डूबने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. सुबिन ने कहा, ‘खरीदी जाने वाली सामग्री पर टैक्स की वजह से लागत दोगुनी हो गई है. 5 साल पहले जो बोट 10 लाख रुपये में बन जाती थी अब उस पर 20 लाख लग रहे हैं.  मैंने अपना घर और जमीन गिरवी रख कर कर्ज लिया. ब्याज बकाया है. मैं क्या करूं?’

स्टाफ को नहीं रख पा रहे मालिक

हाउस-बोट मालिक अब महीने के आधार पर स्टाफ को नहीं रख पा रहे हैं. अनीष बीते 10 साल से हाउस-बोट पर काम कर रहा था. जब टूरिज्म सेक्टर फल-फूल रहा था तो अनीष हर महीने 20,000 रुपये वेतन पाता था. अब उसे 700 रुपये दिहाड़ी पर काम करना पड रहा है. पहले जहां हाउस-बोट महीने में 22 चक्कर लगाती थी. अब ये महीने में सिर्फ 3 या 4 चक्कर ही लगा पाती है.

अनीष ने बताया, ‘पांच दिन से कोई काम नहीं है. मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि अपना घर छोड़कर बाहर काम ढूंढने के लिए जाऊं. मेरे ऊपर कर्ज है और मैं अपनी पत्नी का सोना भी बेच चुका हूं. अब मुझे नया काम ढूंढना पड़ेगा. मैंने अपने बच्ची का इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला कराया था लेकिन अभी तक फीस नहीं दे पाया हूं. अब उसे सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाना होगा.’

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