मिडिल क्लास परिवार के लिए अपना घर केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि जीवन भर की जमा-पूंजी और भावनाओं का केंद्र होता है. इस बड़े सपने को हकीकत में बदलने के लिए लोग दशकों तक चलने वाले 'होम लोन' का सहारा लेते हैं, जिसकी हर महीने कटने वाली EMI घर के बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है. लेकिन, आज के अनिश्चित दौर में बड़े पैमाने पर छंटनी की खबरें आम हो चुकी हैं, वहां नौकरी जाना केवल करियर के लिए ही नहीं, बल्कि सिर पर मौजूद छत के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है.
अचानक आय बंद होने की खबर किसी भी व्यक्ति के पैरों तले जमीन खिसका सकती है और मन में सबसे पहला डर 'बैंक द्वारा घर की नीलामी' का घर कर जाता है. वित्तीय अनिश्चितता के इस काले बादल के बीच, अक्सर लोग घबराहट में गलत फैसले ले लेते हैं या बैंक के डर से छिपने लगते हैं. हालांकि, यह समझने की जरूरत है कि नौकरी का जाना एक अस्थाई चुनौती है और कानून व बैंकिंग व्यवस्था में ऐसे कई प्रावधान मौजूद हैं जो आपको इस कठिन समय में सहारा दे सकते हैं.
यह भी पढ़ें: 2026 में घर खरीदना कितना अलग होगा? रियल एस्टेट के ये 'गेम-चेंजर' बदलाव जान लीजिए
अगर सही वित्तीय नियोजन और ठंडे दिमाग से रणनीति बनाई जाए, तो न केवल आप अपने क्रेडिट स्कोर को बिगड़ने से बचा सकते हैं, बल्कि अपने सपनों के आशियाने को भी सुरक्षित रख सकते हैं. जानते हैं, नौकरी जाने पर होम लोन की EMI के बोझ को संभालने के वो प्रभावी तरीके क्या हैं.
छूट जाए नौकरी तो क्या करें?
जैसे ही आपको पता चले कि आप अगली कुछ EMI देने की स्थिति में नहीं हैं, तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें. बैंक को अपनी समस्या (जैसे टर्मिनेशन लेटर या कंपनी बंद होने का नोटिस) दिखाएं. बैंक को आपकी संपत्ति जब्त करने में ज्यादा कानूनी झंझट झेलना पड़ता है, इसलिए वे अक्सर सहयोग के लिए तैयार रहते हैं. आप बैंक से 3 से 6 महीने का 'मोराटोरियम' या 'पेमेंट हॉलिडे' मांग सकते हैं, जिससे आपको नई नौकरी ढूंढने का समय मिल जाएगा.
अगर आपको लगता है कि नई नौकरी मिलने पर आपकी सैलरी कम हो सकती है, तो बैंक से 'Loan Restructuring' के लिए बात करें. आप अपने लोन की अवधि को 5 या 10 साल के लिए बढ़वा सकते हैं. इससे आपकी मासिक EMI का बोझ काफी कम हो जाएगा. उदाहरण के लिए, अगर आपकी EMI ₹40,000 है, तो अवधि बढ़ने पर यह ₹25,000 तक आ सकती है, जिसे मैनेज करना आसान होगा.
यह भी पढ़ें: मेट्रो सिटीज नहीं, अब टियर-2 शहरों में बढ़ेगी प्रॉपर्टी की मांग, हवाई कनेक्टिविटी ने बदला रियल एस्टेट का गेम
होम लोन लेते समय अक्सर बैंक 'होम लोन प्रोटेक्शन प्लान' (HLPP) बेचते हैं. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन संकट में यह सबसे बड़ा सहारा होता है. अपनी पॉलिसी के कागजात ध्यान से पढ़ें. कई पॉलिसियों में 'Involuntary Loss of Employment' का क्लॉज होता है. अगर आपकी नौकरी छंटनी के कारण गई है, तो बीमा कंपनी आपकी अगली 3 से 6 EMI का भुगतान सीधे बैंक को करती है.
PF और अन्य निवेशों का स्मार्ट इस्तेमाल
अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है, तो अपने पुराने निवेशों की ओर रुख करें. ईपीएफओ (EPFO) के नियमों के अनुसार, बेरोजगार होने की स्थिति में आप एक महीने बाद अपने पीएफ खाते से 75% तक राशि निकाल सकते हैं. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड या एफडी (FD) को तोड़ने में संकोच न करें, क्योंकि घर बचाना किसी भी निवेश से ज्यादा जरूरी है. पर्सनल लोन लेने से बचें, क्योंकि इसकी ब्याज दरें (12-18%) आपके संकट को और बढ़ा सकती हैं.
कानूनी अधिकारों को समझें
याद रखें कि एक या दो EMI बाउंस होने पर बैंक तुरंत घर पर कब्जा नहीं कर सकता. कानून के मुताबिक, लगातार 3 EMI मिस होने के बाद ही लोन अकाउंट को NPA घोषित किया जाता है. इसके बाद भी बैंक को आपको 60 दिनों का नोटिस देना होता है. इस दौरान आपके पास लोक अदालत जाने या बैंक के साथ सेटलमेंट करने का पूरा मौका होता है. अपनी स्थिति को छुपाने के बजाय बैंक के नोटिस का जवाब देना हमेशा फायदेमंद रहता है.
नौकरी जाना एक अस्थाई वित्तीय झटका है, इसे अपनी हार न मानें. अपनी लाइफस्टाइल के खर्चों में कटौती करें और सबसे पहले EMI को प्राथमिकता दें. बैंक के साथ लगातार संवाद ही वह रास्ता है, जो आपके घर की छत को सुरक्षित रख सकता है.
यह भी पढ़ें: जितेंद्र और तुषार कपूर की मेगा रियल एस्टेट डील, ₹559 करोड़ में बेची मुंबई की प्रॉपर्टी
aajtak.in