मिडिल क्लास की पहुंच से दूर नोएडा! कभी मिलते थे सस्ते घर, अब अल्ट्रा-लग्जरी घरों का बना हब

पिछले कुछ सालों में नोएडा में घरों के दाम इतने तेजी से बढ़े हैं कि आम मिडिल क्लास शख्स यहां घर खरीदने की सोच भी नहीं सकता, बड़े-बड़े बिल्डर यहां लग्जरी प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं जिनकी शुरुआती रेंज एक करोड़ है.

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नोएडा क्यों हुआ इतना महंगा (Photo-ITG) नोएडा क्यों हुआ इतना महंगा (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

नोएडा  का नाम आते ही पहले जहन में उन बहुमंजिला इमारतों की तस्वीर उभरती थी, जो दिल्ली में काम करने वाले मध्यम वर्ग के लिए एक किफायती विकल्प हुआ करती थीं. वो लोग जो दिल्ली में घर नहीं ले सकते थे वो नोएडा को विकल्प के तौर पर देखते थे, लेकिन पिछले 3-4 सालों में नोएडा के रियल एस्टेट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. आज नोएडा केवल दिल्ली-एनसीआर का ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग मार्केट बनकर उभरा है. 

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कई बड़े डेवलपर यहां अपने प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं. नोएडा के सेक्टर 94 में ट्रंप टॉवर बन रहा है, जहां 3BHK फ्लैट की शुरुआती रेंज 18 करोड़ रुपये है.

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रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म Anarock की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा के कुल लॉन्च होने वाले प्रोजेक्ट्स में से 45% से अधिक अब 'लग्जरी' (1.5 करोड़ रुपये से ऊपर) और 'अल्ट्रा-लग्जरी' (5 करोड़ रुपये से ऊपर) श्रेणी में आते हैं. वहीं, Knight Frank India के मुताबिक, नोएडा में घरों की कीमतों में सालाना औसत वृद्धि 20-25% दर्ज की गई है, जो कई मामलों में गुरुग्राम को भी टक्कर दे रही है.

लग्जरी हब बनने की क्या है वजह?

नोएडा की सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ बसी ऊंची इमारतें आज अमीरों की पहली पसंद हैं. इसके अलावा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) के निर्माण ने निवेशकों और खरीदारों के बीच एक ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि भविष्य में यहां की कीमतें और भी बढ़ेंगी.

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रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम में अनियोजित विकास और ट्रैफिक जाम की समस्या ने खरीदारों को नोएडा की ओर मोड़ा है. नोएडा का नियोजित ग्रिड सिस्टम, चौड़ी सड़कें और हरियाली इसे प्रीमियम लिविंग के लिए एक बेहतर विकल्प बनाती है. सेक्टर 150, सेक्टर 128 और सेक्टर 94 जैसे इलाके लोगों के लुभा रहे हैं. 

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नोएडा अब केवल रहने की जगह नहीं है, सैमसंग, माइक्रोसॉफ्ट, और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के आने से हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) की संख्या यहां बढ़ी है. जब ऊंचे वेतन वाले प्रोफेशनल्स एक जगह जुटते हैं, तो वहां प्रीमियम घरों की मांग बढ़ जाती है.

पहले नोएडा में स्थानीय बिल्डर्स का बोलबाला था, लेकिन अब बड़े राष्ट्रीय डेवलपर्स ने यहां कदम रखे हैं. ये डेवलपर्स पेंटहाउस, निजी स्विमिंग पूल वाले फ्लैट्स और स्मार्ट होम फीचर्स के साथ ऐसे प्रोजेक्ट ला रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं.


नोएडा अथॉरिटी ने अब नई जमीन के आवंटन में कड़ाई की है, जिससे जमीन की कीमतें बढ़ी हैं. जब जमीन महंगी होती है, तो बिल्डर्स छोटे और किफायती घरों के बजाय 'हाई-मार्जिन' लग्जरी घर बनाना ज्यादा फायदेमंद समझते हैं.

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नोएडा के 'प्रीमियम' हॉटस्पॉट्स

सेक्टर 150 को एनसीआर का 'ग्रीनवेस्ट' सेक्टर कहा जाता है, यहां ओवरहेड तारें नहीं हैं और 80% हिस्सा हरियाली के लिए सुरक्षित है. सेक्टर 94 और 124 गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं, जहां एक फ्लैट की कीमत 10 से 20 करोड़ रुपये तक जा रही है.

खरीदार पर इसका क्या असर?

यह बदलाव उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है जो अभी भी नोएडा में 40-50 लाख का घर तलाश रहे हैं. अब उन्हें ग्रेटर नोएडा वेस्ट (Noida Extension) या यमुना एक्सप्रेसवे की ओर रुख करना पड़ रहा है. नोएडा अब मध्यम वर्ग के लिए 'किफायती' नहीं रहा, बल्कि यह एक 'स्टेटस सिंबल' बन गया है.

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