DDA निवासियों की पानी-बिजली की समस्या होगी दूर, हर बुधवार इंजीनियर करेंगे सुनवाई

DDA अधिकारियों का कहना है कि इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर और कम से कम समय में करना है. जनसुनवाई में साइट इंजीनियरों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायतों को केवल दर्ज ही न करें, बल्कि समाधान की स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए कार्यवाही शुरू करें.

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फ्लैट से जुड़ी सभी समस्याओं पर सुनवाई होगी (Photo-ITG) फ्लैट से जुड़ी सभी समस्याओं पर सुनवाई होगी (Photo-ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:04 PM IST

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट्स में रहने वाले लाखों निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब फ्लैट्स से जुड़ी रोज़मर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को DDA ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे DDA ने एक नई व्यवस्था लागू करते हुए हर हफ्ते साइट-लेवल जनसुनवाई शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें साइट इंजीनियर सीधे तौर पर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे.

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इस संबंध में DDA के हाउसिंग डिप्टी डायरेक्टर चिन्मय चक्रवर्ती ने 19 जनवरी को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया गया है. सर्कुलर के अनुसार, यह जनसुनवाई हर बुधवार दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी. फ्लैट से जुड़ी सभी समस्याओं पर सुनवाई होगी.
 
DDA की इस साप्ताहिक जनसुनवाई में फ्लैट्स से जुड़ी सभी बुनियादी और तकनीकी समस्याओं को शामिल किया गया है. इनमें पीने के पानी की आपूर्ति में बाधा सीवर, ड्रेनेज और गंदे पानी की निकासी फ्लैट्स की मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिकल और स्ट्रक्चरल समस्याएं हाउसिंग स्कीम से जुड़े लंबित मामले फ्लैट्स की पोज़िशन, अलॉटमेंट और हैंडओवर से संबंधित शिकायतें पर साइट इंजीनियर मौके पर ही सुनवाई करेंगे.

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जमीनी स्तर पर समाधान पर ज़ोर

अब तक फ्लैट निवासियों को अपनी समस्याओं के लिए अलग-अलग विभागों के बीच भटकना पड़ता था. नई व्यवस्था के तहत, निवासी सीधे उस साइट के जिम्मेदार इंजीनियर से संवाद कर सकेंगे, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि जवाबदेही भी तय होगी. DDA अधिकारियों के अनुसार, प्राधिकरण स्तर पर पहले से ही हर हफ्ते केंद्रीय जनसुनवाई आयोजित की जाती रही है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी हाउसिंग स्कीम, फ्लैट्स की स्थिति और पॉलिसी से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हैं. हालांकि, नई व्यवस्था के तहत साइट-लेवल जनसुनवाई को प्राथमिकता दी गई है ताकि छोटी लेकिन अहम समस्याएं तुरंत हल हो सकें. 

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