दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने पिछले कुछ वक्त में खूब मुनाफा कमाया है. मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आवासीय इकाइयों की बढ़ती मांग और बिक्री की नई रणनीतियों के चलते पिछले चार सालों में डीडीए की आवास बिक्री और राजस्व में भारी उछाल दर्ज किया गया है.
'पहले आओ पहले पाओ' (First-Come-First-Serve) जैसी योजनाओं और ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रियाओं ने खरीदारों को आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई है. सालों से खाली पड़े फ्लैट्स, खासकर नरेला और द्वारका जैसे क्षेत्रों में, अब बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण तेजी से बिक रहे हैं.
29,909 यूनिट्स बिके
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच डीडीए ने कुल 29,909 आवास इकाइयां बेचीं, जो 2018-19 से 2021-22 की पिछली चार साल की अवधि में बेची गई 6,783 इकाइयों की तुलना में 340.9% की भारी वृद्धि दर्शाती है. इस दौरान बिक्री से प्राप्त राजस्व भी 152.9% बढ़कर 10,446 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले चार वर्षों में यह आंकड़ा 4,130 करोड़ रुपये था. अधिकारियों ने इस शानदार वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत मांग और बिक्री प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ योजनाओं को खरीदारों के लिए अधिक सुलभ बनाने वाले नीतिगत बदलावों को बताया है.
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इन सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 67 वर्ग मीटर या उससे अधिक की संपत्ति रखने वाले मालिकों पर दूसरा डीडीए फ्लैट खरीदने से लगा प्रतिबंध हटाना रहा. साथ ही, प्राधिकरण ने पुरानी लॉटरी प्रणाली की जगह 'पहले आओ, पहले पाओ' मॉडल पेश किया, जिसमें खरीदारों को चुनाव करने से पहले सैंपल फ्लैट और वास्तविक इकाइयों को देखने की अनुमति दी गई.
बिना बिके फ्लैटों के पुराने स्टॉक को निपटाने और बाजार की मांग के अनुरूप योजनाएं तैयार करने के लिए सचेत प्रयास किए गए. इसके अतिरिक्त, साथ लगे फ्लैटों को जोड़ने, सरकारी या निजी संस्थाओं द्वारा थोक खरीद की अनुमति देने और फ्लैट की लागत गणना से पार्किंग क्षेत्र को हटाने जैसे उपायों ने भी अधिक खरीदारों को आकर्षित किया और आवंटन प्रक्रिया को तेज कर दिया.
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