'अगर सिस्‍टम गलत होता तो...' गिग वर्कर्स की मांगों के बीच दीप‍िंदर गोयल का बड़ा बयान

गिग वर्कर्स के हड़ताल के ऐलान के बाद जोमैटो के सीईओ और फाउंडर दीप‍िंदर गोयल ने बड़ा स्‍टेटमेंट दिया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया पर चल रहे 10 मिनट डिलीवरी को लेकर भी समझाया है कि कैसे यह डिलीवरी पाटर्नर्स के लिए अनसेफ नहीं है.

Advertisement
जोमैटो सीईओ दीपिंदर गोयल. (Photo: File/ITG) जोमैटो सीईओ दीपिंदर गोयल. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:48 PM IST

गिग वर्कर्स के हड़ताल और उनकी मांग के बीच दीपिंदर गोयल ने 1 जनवरी 2026 को बड़ी जानकारी दी. उन्‍होंने कहा कि ज़ोमैटो और ब्लिंकिट ने 31 दिसंबर को रिकॉर्ड तेजी से डिलीवरी की, उन हड़ताल की धमकियों का उन पर कोई असर नहीं पड़ा जो हममें से कई लोगों ने पिछले कुछ दिनों में सुनी थीं.

दीपिंदर गोयल ने कहा कि स्थानीय पुलिस की मदद से मुट्ठी भर शरारती तत्वों को काबू में रखा गया, जिससे दोनों प्लेटफॉर्म पर 4.5 लाख से ज्‍यादा डिलीवरी पार्टनर दिन भर में 63 लाख से ज्‍यादा कस्‍टमर्स को 75 लाख से ज्‍यादा ऑर्डर (अब तक का सबसे ज्‍यादा) डिलीवर किया है. यह सब डिलीवरी पार्टनर को बिना किसी एक्स्ट्रा इंसेंटिव के हुआ है. 

Advertisement

उन्‍होंने कहा कि नए साल की पूर्व संध्या पर आम दिनों के मुकाबले ज्‍यादा इंसेंटिव दिए जाते हैं और 31 द‍िसंबर का दिन पिछले नए साल की पूर्व संध्या के दिनों से अलग नहीं था. मैं पूरे देश में स्थानीय अधिकारियों और जमीन पर हमारी टीमों का साफ-सुथरी कार्रवाई और तेजी  से तालमेल के लिए आभारी हूं. 

अगर सिस्‍टम गलत होता तो... 
दीपिंदर गोयल ने कहा कि सबसे जरूरी बात, हमारे डिलीवरी पार्टनर का धन्यवाद, जिन्होंने धमकियों के बावजूद काम किया, डटे रहे और ईमानदारी का काम और तरक्की के रास्‍ते को अपनाया. दीपिंदर गोयल ने कहा कि अगर कोई सिस्टम असल में गलत होता, तो वह लगातार इतने सारे लोगों को आकर्षित और बनाए नहीं रख पाता जो उसमें काम करना चुनते हैं. कृपया निहित स्वार्थों द्वारा फैलाई गई बातों में न फंसें. 

Advertisement

गिग इकॉनमी भारत के सबसे बड़े संगठित रोजगार पैदा करने वाले इंजनों में से एक है और इसका असली असर समय के साथ और बढ़ेगा. जब डिलीवरी पार्टनर के बच्चे, स्थिर इनकम और शिक्षा की मदद से, वर्कफोर्स में शामिल होंगे और बड़े पैमाने पर हमारे देश को बदलने में मदद करेंगे.

क्‍या असुरक्षित है 10 मिनट वाली डिलीवरी? 
गिग वर्कर्स यूनियंस द्वारा 31 दिसंबर को हड़ताल के आह्वान के दौरान सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उठाए जाने के बाद अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी को लेकर बहस छिड़ गई है. सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या 10 मिनट की डिलीवरी मॉडल राइडर्स पर दबाव डालती है. 

ज़ोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि 10 मिनट की डिलीवरी कैसे काम करता है. यह डिलीवरी पार्टनर्स के लिए समझौता नहीं है. उन्‍होंने कहा कि डिलीवरी की गति इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर निर्भर करता है, न कि राइडर्स पर पड़ने वाले दबाव पर.  

उन्होंने लिखा कि हमारे 10 मिनट में डिलीवरी का वादा आपके घरों के आसपास मौजूद दुकानों की अधिकता के कारण संभव हो पाता है. यह डिलीवरी पार्टनर्स को तेज गाड़ी चलाने की जरूरत को खत्‍म करता है. उन्होंने आगे कहा कि डिलीवरी पार्टनर अपने ऐप पर डिलीवरी का वादा किया गया समय भी नहीं देख पाते हैं. गोयल ने कहा कि डिलीवरी पार्टनर के ऐप में टाइमर भी नहीं होता है, जिससे उन्हें पता चले कि ग्राहक को डिलीवरी का मूल समय क्या बताया गया था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement