SME सेगमेंट में बुधवार को एक शेयर की लिस्टिंग हुई, जो 20 फीसदी डिस्काउंट पर लिस्ट हुई. डिस्काउंट पर लिस्ट होने के बाद भी इस शेयर में गिरावट नहीं थमी. इस शेयर से निवेशक अपने शेयर बेचने लगे. लोग डिस्काउंट पर शेयर बेच रहे थे, जिस कारण निवेश को हर लॉट पर 55,680 रुपये का तगड़ा नुकसान हुआ.
दरअसल, Yajur Fibres IPO के शेयरों की बुधवार को लिस्टिंग थी, जिसका इश्यू प्राइस 174 रुपये तय किया गया था. लेकिन यह शेयर 20 प्रतिशत गिरकर 139 रुपये पर लिस्ट हुआ. निवेशकों को झटका तब ज्यादा लगा, जब यह शेयर डिस्काउंट के बाद भी और नीचे गिरने लगा और लोअर सर्किट लगाया. फिलहाल यह शेयर अपने आईपीओ प्राइस से 24 फीसदी नीचे है.
निवेशकों का ज्यादा रिस्पांस नहीं
Yajur Fibres IPO को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था. इस आईपीओ को कुल 1.33 गुना सब्सक्राइब किया गया था. पब्लिक सेगमेंट में यह आईपीओ 1.51 गुना सब्सक्राइब हुआ था. क्यूआईबी ने भी इसमें 1 गुना पैसा लाया था. हालांकि अब लिस्टिंग पर इन सभी निवेशकों को तगड़ा नुकसान हुआ है.
निवेशकों को 33 हजार रुपये का नुकसान
इसका इश्यू प्राइस 174 रुपये था और इसके एक लॉट में 800 शेयर रखे गए थें. रिटेल निवेशकों को इस कंपनी के 2 लॉट यानी 1600 शेयर खरीदने थे, जिसके लिए ₹2,78,400 का निवेश करना था. इसका मतलब है कि लिस्टिंग पर रिटेल निवेशकों को 55,680 रुपये का तगड़ा नुकसान हुआ. वहीं 24 फीसदी की गिरावट पर कैलकुलेट करें तो रिटेल निवेशकों को 66,800 रुपये का नुकसान हुआ है.
कब आया था ये आईपीओ?
120 करोड़ रुपये का ये आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 जनवरी को खुला था. इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था. इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 69.20 लाख नए शेयर जारी किए गए थे और शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹11.93 करोड़ मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में शेड बनाने और डाईंग और ब्लीचिंग प्रोसेसिंग मशीनरी की खरीदारी और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए यूज किए जाने की बात कही गई. ₹48.00 करोड़ सब्सिडरी यशोदा लिनेन यार्न में एक ग्रीनफील्ड यूनिट लगाने के लिए यूज किया जाएगा और ₹36.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए यूज किया जाएगा.
क्या करती है ये कंपनी?
साल 1980 में बनी यजुर फाइबर्स लिमिटेड सन जूट और भांग जैसे बास्ट फाइबर की प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग करती है. कंपनी लंबे नाजुक बास्ट फाइबर को छोटे कपास जैसे फाइबर में बदलती है, जो कपास और मैन-मेड फाइबर के साथ आसानी से मिल जाते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर R&D और कमर्शियल प्रोडक्शन के साथ सस्टेनेबल बास्ट फाइबर में क्रांति आ रही है. कंपनी के पास हर महीने 300 MT से ज़्यादा कॉटन वाले फाइबर, सन यार्न और जूट यार्न बनाने की क्षमता है और इसे भारत और विदेश की टॉप स्पिनिंग और वीविंग मिलें पसंद करती हैं.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क