मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) जारी है. ट्रंप का नया 48 घंटे वाला अल्टीमेटम भी आ चुका है, तो वहीं ईरान झुकने को तैयार नहीं है. कुल मिलाकर करें, तो जंग हाल-फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है. इस बीच शेयर बाजारों में तो उथल-पुथल मची ही है, दूसरी ओर ग्लोबल टेंशन के बीच भी सुरक्षित निवेश का ठिकाना माने जाने वाली कीमती धातुओं सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में भारी गिरावट ने सभी को चौंकाया है. अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमला शुरू करने वाले दिन यानी 28 फरवरी से अब तक चांदी जहां 50,000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो चुकी है, तो वहीं सोने का भाव भी 16,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा कम हो गया है.
युद्ध के बीच चांदी क्रैश
सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में आई गिरावट के बारे में, तो बता दें कि मिडिल ईस्ट युद्ध को 37 दिन हो गए हैं और इस दौरान चांदी का भाव काफी गिर चुका है. दरअसल, बीते 28 फरवरी को पहली बार अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर अटैक किया था और इसके बाद ईरानी पलटवार से जंग तेज होती चली गई. इससे एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी का वायदा भाव 2,82,644 रुपये प्रति किलो था.
वहीं बीते गुरुवार को MCX Silver Price गिरकर 2,32,600 रुपये पर बंद हुआ था. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो 1 Kg Silver Price युद्ध के दौरान अब तक 50,044 रुपये प्रति किलो तक कम हो चुका है. वहीं हाई से चांदी अब 2.06 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती मिल रही है.
सोना भी जंग में खूब पिघला
न सिर्फ चांदी, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत भी ईरान जंग के दौरान जमकर पिघली है और 27 फरवरी से 2 अप्रैल तक 16,009 रुपये प्रति 10 ग्राम तक कम हो चुकी है. दरअसल, युद्ध की शुरुआत से पहले वायदा मार्केट में 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,65,659 रुपये था और अब ये गिरते हुए 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है.
अगर सोने के हाई लेवल आई गिरावट पर नजर डालें, तो ये कीमती पीली धातु बुरी तरह क्रैश नजर आती है. MCX पर गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है और यहां से अब तक ये 53,334 रुपये कम कीमत पर मिल रहा है.
युद्ध जारी, फिर क्यों टूटे सोना-चांदी?
युद्ध के हालात में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो होर्मुज टेंशन के चलते Crude Oil Price 110 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बना हुआ है, इससे ग्लोबल महंगाई का खतरा बढ़ा है और लोज अपने हाथ में कैश रखने को तरजीह देते नजर आ रहे हैं. इसके अलावा, ग्लोबल निवेशक सुरक्षित मुद्रा 'डॉलर' की ओर रुख कर रहे हैं, जो युद्ध के दौरान लगातार मजबूत हुई है और 100 के पार बनी हुई है. मजबूत डॉलर और बढ़ती महंगाई, जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी को रोक रहे हैं.
(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क