पिछले कुछ सालों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने गोल्ड भंडार में तेजी दर्ज की है. RBI ने भी खूब सोना खरीदा है. भारत का केंद्रीय बैंक न सिर्फ अपने गोल्ड स्टोर को बढ़ा रहा है, बल्कि वह भारत में ही ज्यादा गोल्ड का स्टोरेज भी कर रहा है. विदेशों में रखे सोने को भी वह भारत वापस मंगा रहा है.
RBI द्वारा जारी छमाही आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक, उसके पास 880.52 मीट्रिक टन सोना था. इसमें से 680.05 मीट्रिक टन सोना घरेलू भंडार में था.
मार्च 2025 के अंत में, आरबीआई के पास 879.59 मीट्रिक टन सोना था, जिसमें से 511.99 मीट्रिक टन सोना देश के भीतर ही रखा गया था. इसका मतलब है कि पिछले एक वर्ष में ही लगभग 168 मीट्रिक टन सोना वापस लाया गया है.
मार्च 2024 में, 822.10 मीट्रिक टन सोना था, जिसमें से 408.31 मीट्रिक टन घरेलू स्तर पर मौजूद था. इसी प्रकार, मार्च 2023 में, 794.64 मीट्रिक टन सोना था और उसमें से केवल 301.10 मीट्रिक टन घरेलू स्तर पर मौजूद था.
अभी तक इंग्लैंड से कितना भारत आया सोना?
रिजर्व बैंक विदेशों में जमा किए गए सोने को वापस ला रहा है. खासकर वह सोना जो बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE) के पास रखा हुआ सोना. मार्च 2023 में, 437.22 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ यूरोप (BOE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रूप से विदेशों में रखा गया था. यह मार्च 2024 तक घटकर 387.26 मीट्रिक टन, मार्च 2025 में 348.62 मीट्रिक टन और मार्च 2026 तक 197.67 मीट्रिक टन रह गया है यानी 2023 से अबतक 150.67 मीट्रिक टन सोना वापस आ चुका है.
आरबीआई अपना सोना वापस क्यों ला रहा है?
जियो-पॉलिटिकल तनाव इसके पीछे एक खास कारण हो सकता है. पहले रूस और यूक्रेन और अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है. ऐसी अस्थिरता के बीच, अपने गोल्ड रिजर्व पर कंट्रोल रखना हमेशा फायदेमंद होता है. साल 2022 में, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूसी केंद्रीय बैंक को उसके विदेशी गोल्ड रिजर्व तक पहुंचने से प्रतिबंधित कर दिया था.
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के अलावा, आमतौर पर रिजर्व बैंक को BOE या BIS के पास रखे सोने के लिए शुल्क भी देना पड़ता है. यह भी याद रखने योग्य है कि 1991 में, जब भारत को गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा, तो उसे इमरजेंसी लोन सेफ करने के लिए कुछ सोना विदेश में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
बता दें 1991 की शुरुआत में, भारत के पास लगभग 1.2 अरब डॉलर का भंडार था, जो कुछ हफ्तों के आयात के लिए मुश्किल से ही पर्याप्त था. मार्च 2026 के अंत तक, सोने का भंडार 691 अरब डॉलर से अधिक हो गया था.
केंद्रीय बैंक सोना क्यों खरीद रहे हैं?
पिछले कुछ सालों में केंद्रीय बैंकों ने जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता के बीच अमेरिकी डॉलर से हटकर अपने भंडार में बदलाव लाने के उद्देश्य से सोने का भंडार जमा किया है. सोना महंगाई की तुलना में एक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करता है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2025 में 863 टन सोना खरीदा. 2024 में उन्होंने 1,045 टन सोना जमा किया था, और 2023 में उन्होंने 1,037 टन सोना खरीदा था. हालांकि पिछले साल सोने की खरीद 2024 की तुलना में कम थी, फिर भी यह 2010-21 के बीच की 473 टन की सालाना एवरेज खरीद की तुलना में काफी ज्यादा रही.
सोने की खरीदारी को लेकर एक्सपर्ट ने क्या कहा?
केयरएज रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर योगेश शाह ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद रिजर्व, डॉलर घटते विश्वास और बढ़े हुए भू-राजनीतिक जोखिम से प्रेरित है. यह आधिकारिक क्षेत्र की मांग वैल्यू के प्रति असंवेदनशील और लॉन्गटर्म नेचर की है, जो सोने की कीमतों के लिए एक पॉजिटिव बेस तैयार करती है.
अन्य केंद्रीय बैंकों की तरह, RBI ने भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाई है, जिसमें अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी मुद्राएं शामिल हैं. कुछ सोने के अलावा, इसके स्वर्ण भंडार में तेजी आई है, जब वैश्विक अनिश्चितताएं भी बढ़ी हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क