देश का आम बजट (Budget 2026) आने वाला है और इससे पहले पेट्रोल और डीजल के दाम में बदलाव (Petrol-Diesel Price Change) देखने को मिल सकता है. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने ये आशंका जताई है. JM Financifal ने कहा है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले ऑटो फ्यूल यानी पेट्रोल-डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क (Petrol-Diesel Excise Duty) में 3-4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की संभावना है.
एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से क्या फायदा?
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने गुरुवार को एक नोट में कहा कि केंद्रीय बजट से पहले पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सालाना आधार पर राजस्व में 50,000-70,000 करोड़ रुपये की अच्छी खासी वृद्धि हो सकती है. ऐसे में इस बढ़ोतरी की काफी संभावनाएं बन रही हैं, क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMC) हाई मार्जिन कमा रही हैं और केंद्र सरकार अपनी राजकोषीय स्थिति पर दबाव का सामना कर रही है.
सरकार क्यों बढ़ा सकती है शुल्क?
JM Financial ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की करीब 61 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा हाजिर कीमत पर ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) और इंटिग्रेटेड मार्जिन सामान्य स्तर से काफी ज्यादा हैं. ब्रोकरेज के मुताबिक, मौजूदा जीएमएम लगभग 10.60 रुपये प्रति लीटर , जबकि ऐतिहासिक औसत 3.50 रुपये प्रति लीटर है. इंटिग्रेटेड मार्जिन का अनुमान करीब 19.20 रुपये प्रति लीटर जताया गया है.
ब्रोकरेज के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि राजकोषीय मोर्चे पर केंद्र सरकार की FY2026 की रेवेन्यू ग्रोथ रेट बजट अनुमानों से पीछे है. अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान रेवेन्यू कलेक्शन बजट अनुमान का करीब 56% रहा, जबकि इससे पिछले साल की समान अवधि में यह 60% था. जेएम के मुताबिक, महंगाई में कमी से नॉमिनल GDP Growth करीब 8% रहने की उम्मीद है, जिससे केंद्र सरकार के 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में दबाव पड़ सकता है. ऐसे में सरकार FY2027 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को घटाकर जीडीपी के 4-4.2% तक कर सकती है.
Duty Hike से फायदे का कैलकुलेशन
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार बजट से रेवेन्यू ग्रोथ बढ़ाने के लिए तमाम रास्ते तलाश सकती है. Auto Fule पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकती है. अनुमान है कि प्रति लीटर 3 से 4 रुपये की वृद्धि से सालाना आधार पर करीब 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये की इनकम हो सकती है, जो जीडीपी के लगभग 0.15 से 0.2% के बराबर है. ब्रोकरेज ने इसका कैलकुलेशन देते हुए बताया कि Petrol-Diesel Excise Duty Hike से तगड़ा फायदा होता है और इसमें महज 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी राजस्व में सालाना 17,000 करोड़ रुपये के आसपास आते हैं.
तेल कंपनियों पर होगा ये असर
अपनी रिपोर्ट में JM Financial ने ऑटो फ्यूल मार्जिन में बदलाव के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की इनकम पर होने वाले असर पर भी फोकस किया है. इकोनॉमिस्ट ने कहा कि Petrol-Diesel GMM में प्रति लीटर 1 रुपये की वृद्धि या कमी से कंसोलिडेटेड EBITDA में 12 से 17 फीसदी की घट-बढ़ होती है, जिसका अनुमानित प्रभाव HPCL के लिए 16.6%, BPCL के लिए 14.5% और IOCL के लिए 12.4% है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जीएमएम में ऐतिहासिक 3.50 रुपये प्रति लीटर के स्तर से ऊपर प्रत्येक 1 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि या कमी से तेल कंपनियों ओएमसी के बुक वैल्यू में प्रति माह 0.2- 0.5% की वृद्धि या कमी देखने को मिल सकती है.
आजतक बिजनेस डेस्क