अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रही है और इस टेंशन को होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट ने चरम पर पहुंचा दिया है. दुनिया के तमाम देशों में तेल संकट गहरा गया है और क्रूड के दाम बढ़ रहे हैं. भारत की बात करें, तो सरकार के पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज मिनिस्ट्री ने बुधवार को बड़ा जानकारी शेयर करते हुए बताया है कि 11 भारतीय जहाज इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट में फंसे हुए हैं.
मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी शेयर की है. उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में करीब 2.2 मिलियन टन तेल-गैस का भंडार फंसा हुआ है.
क्रूड, LPG-LNG से भरे हैं जहाज
मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते इस रूट में रुकावट की वजह से भारतीय तिरंगा झंडा वाले 11 जहाज जहां के तहां रुके हुए हैं, जिनमें बड़ा एनर्जी भंडार है. इन जहाजों में 1.67 मिलियन टन कच्चा तेल, 0.32 मिलियन टन एलपीजी और 0.2 मिलियन टन एलएनजी शामिल हैं.
बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह की शुरुआत में मंत्रालय ने होर्मुज में भारतीय जहाजों के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि 22 जहाज LPG, LNG, Crude Oil और अन्य एनर्जी प्रोडक्ट्स की आपूर्ति ला रहे हैं. इनमें से 6 एलपीजी टैंकर, 4 कच्चे तेल के टैंकर, 1 एलएनजी टैंकर, 1 रसायन ले जाने वाला टैंकर, 3 कंटेनर जहाज, 2 बल्क कैरियर और 1 ड्रेजर शामिल हैं.
ऊर्जा आयात के लिए खास है Hormuz
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जिससे ग्लोबल तेल सप्लाई का 20 फीसदी हर रोज गुजरता है. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान युद्ध के चलते होर्मुज की स्थिति वैश्विक बाजारों के लिए एक अहम बनी हुई है, क्योंकि इसमें रुकावट से दुनिया के तमाम देशों में तेल संकट गहरा गया है.
पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर वियतनाम तक में तेल संकट से हालात बिगड़ चुके हैं, तो भारत में भी एलपीजी संकट देखने को मिला है. बता दें भारत अपनी जरूरतों का 80% से अधिक तेल आयात करता है और खाड़ी देशों में किसी भी प्रकार का लंबा तनाव सप्लाई में बड़ा खतरा है.
LPG लेकर भारत आ चुके ये दो जहाज
हालांकि, मंत्रालय की ओर से हाल ही में दो एलपीजी से भरे जहाजों, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी को भारतीय तटों पर सुरक्षित पहुंचाया गया है, जिससे गैसे की किल्लत को कम करने में मदद मिली है. बहरहाल, होर्मुज में फंसे 11 जहाजों और उनके क्रू चर्चा का विषय बने हुए हैं और सरकार की ओर से स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
आजतक बिजनेस डेस्क