LPG की न हो किल्लत... केंद्र ने निकाला ये तरीका, सबसे पहले इन्हें मिलेगा सिलेंडर

LPG Allocation: एलपीजी सप्लाई को सुचारु रखने के लिए केंद्र सरकार ने नया प्लान बनाया है और इसके तहत राज्यों को 70% कमर्शियल एलपीजी का आवंटन किया गया है.

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सरकार ने राज्यों के लिए तय किया एलपीजी आवंटन. (File Photo: ITG) सरकार ने राज्यों के लिए तय किया एलपीजी आवंटन. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:27 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर (US-Iran Ceasfire) पर सहमति बन गई है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी टेंशन में कमी आई है. हालांकि, करीब एक महीने से ज्यादा समय से बंद तेल-गैस आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रूट की वजह से भारत में पैदा हुई एलपीजी शॉर्टेज को पूरा करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसे लेकर अब केंद्र ने राज्यों और प्रमुख उद्योगों के लिए एलपीजी आवंटन तय कर दिया है. 

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गैस सप्लाई से जुड़े दबावों के मद्देनजर सरकार ने औद्योगिक एलपीजी आपूर्ति पर सीमा लगाई है, जबकि नॉन-डॉमेस्टिक एलपीजी का 70% हिस्सा राज्यों को आवंटित किया है. इस कदम का उद्देश्य जरूरी उपयोग को प्राथमिकता देना और उद्योगों को PNG जैसे वैकल्पिक ईंधनों की ओर प्रोत्साहित करना है. 

राज्यों को 70% गैस का आवंटन
केंद्र सरकार ने राज्यों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पैक्ड और बल्क कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के आवंटन को लेकर नया फैसला किया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉक्टर नीरज मित्तल की ओर से बुधवार को जारी एक लेटर के मुताबिक, राज्यों को कुल 70 फीसदी एलपीजी का आवंटन किया गया है. इसमें जिसमें पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने से जुड़े सुधारों पर बेस्ड अतिरिक्त 10 फीसदी हिस्सा भी शामिल है.

सरकार के इस कदम के तहत तहत पाइप्ड गैस (पीएनजी) जैसे वैकल्पिक ईंधनों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने वाले राज्यों को एलपीजी का ये अतिरिक्त 10% आवंटन दिया जाएगा. यह एलपीजी पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने के लिए एक व्यापक नीतिगत प्रयास का संकेत है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां इस तरह के विकल्प मौजूद हैं.

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फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पॉलिमर, एग्रीकल्चर, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, मेटल, सिरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग, कांच, एयरोसोल सहित कई सेक्टर्स को अब मार्च 2026 से पहले उनकी औसत खपत  स्तर का सिर्फ 70% ही मिलेगा. इसके अलावा इस आपूर्ति पर प्रतिदिन 0.2 टन मीट्रिक टन की की लिमिट लागू होगी. इससे उद्योगों के लिए उपलब्ध कुल मात्रा प्रभावी रूप से सीमित हो जाएगी. हालांकि, इसका सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ने की आशंका है जो ईंधन के रूप में एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं. 

इन्हें मिलेगी पहले एलपीजी
केंद्र द्वारा तय किए गए आवंटन में उन इकाइयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें एलपीजी का उपयोग ऐसे विशेष कामों के लिए होता है, जिन्हें पीएनजी से बदला नहीं जा सकता. सामान्य रूप से उद्योगों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में रजिस्ट्रेशन और पीएनजी के लिए अप्लाई करना होगा, लेकिन जहां एलपीजी जरूरी कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होती है, वहां पीएनजी आवेदन की शर्त से छूट दी गई है. इसके अलावा, केंद्र ने राज्यों से पाइपलाइन वितरण आदेशों और CBG पॉलिसी को जल्द से जल्द लागू करने के लिए कहा है. 

बता दें कि होर्मुज टेंशन और अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वहां फंसे जहाजों के चलते देश में बीते दिनों एलपीजी क्राइसिस के हालात देखने को मिल रहे थे और जहां घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लोग एजेंसियों के बाहर कतारों में खड़े नजर आए, तो कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिल पाने के कारण तमाम उद्योगों पर संकट खड़ा हो गया था. ऐसे में सरकार ने एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही बुकिंग की समय सीमा समेत कई उपाय किए. 

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